फोटो और खबर : पत्रकार अविनाश प्रसाद

ब्लिट्ज हिन्दी. काँम से आभार सहित 

1.12.2018

जी हां , तस्वीरों में मौजूद हाँथों में बंदूख लिए हुये , पेड़ों के पीछे मोर्चा जमाए ये पुतले सुकमा जिले के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र के जंगलों में देखने में तब आए जब सुरक्षाबल के जवान सर्चिंग पर थे । दरअसल इन इलाक़ों में नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच हर पल मारो या मरो वाली स्थिति बनी रहती है ।

युद्द के दौरान एक तिनके का सहारा भी जीवनदायी सिद्ध हो सकता है तो मृत्यु का कारण भी । सुरक्षाबल के जवानों को एकबारगी लगा की उन्हें निशाना बनाने के लिए नक्सली पेड़ों के पीछे बंदूख ताने तैनात हैं । जवान ठिठक गए, उन्होंने पोज़ीशन ली लेकिन लम्बे समय तक कोई हलचल न होता देख तहक़ीक़ात की गयी और पता चला की ये पुतले झाँसा देने के लिए नक्सलियों द्वारा लगाए गए हैं ।

ज़रा सोचिए…

आम लोगों के लिए तो ये बेहद आम खिलौने की तरह ही हैं ना ? लेकिन नक्सलियों के लिए ये बेहद सहयोगी और सुरक्षाबलों के लिए उतने ही ख़तरनाक हैं । सहयोगी इसलिए की इससे जवान झाँसे में आ गए, इस दौरान नक्सलियों को अतिरिक्त समय मिल गया, जवानों का वक़्त बरबाद हुआ और ख़तरनाक इसलिए की इन पुतलों में से एक के नीचे नक्सलियों ने बारूद भी लगा रखा था । हालाँकि जवानो की सूझबूझ ने उन्हें बचा लिया । मुठभेड़ के दौरान ख़ुद को कमज़ोर पड़ता देख नक्सली जंगलों की आड़ में भागने लगते हैं और ऐसे में ये पुतले पीछा कर रहे सुरक्षाबलों को रूकने पर मजबूर कर सकते हैं ।

 

बस्तर के युद्दक्षेत्र में आधुनिक, परम्परागत और नायाब… सभी तरह की चुनौतियाँ हैं । टी.व्ही., मोबाइल, अख़बार से अनुभव कर पाना सम्भव नहीं ।

फोटो और खबर : पत्रकार अविनाश प्रसाद

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