1.12.2018 रायपुर

एक थे फूफा’ अनाम-सर्वनाम का लोकवृत्त है। व्यक्ति चित्र के माध्यम से पिछली सदी की आंचलिक जीवन शैली और सोच को आधार बनाया गया है, जो संस्कृति के पक्षों को स्पर्श करता चलता है। बिड़ी और तोते के रूपक वाला जीवन, अंततः संदर्भ-रहित हो कर निस्सार, रेखांकित हुआ है।
पुस्तक की प्री-बुकिंग के पहले हफ्ते में लगभग 200 प्रतियां बुक होने के बाद प्री-बुकिंग स्थगित कर दी गई थी। आज से यह पुस्तक पाठकों के लिए उपलब्ध करा दी गई है। पुस्तक के आवरण चित्रकार प्रसिद्ध रंगोलीकार प्रमोद साहू हैं। अंतिम पृष्ठ तथा रेखांकन जनजातीय शैली की चित्रकार द्वय लतिका-रागिनी वैष्णव हैं तथा द्वितीय आवरण युवा चित्रकार सौरभ कश्यप ने बनाया है।

वैभव प्रकाशन, पुरानी बस्ती, रायपुर से प्रकाशित राहुल कुमार सिंह द्वारा लिखित इस पुस्तक की पहली प्रति, आज शनिवार, 1 दिसंबर को औपचारिक रूप से सर्वाधिक प्रतियां प्री-बुक करने वाले श्री ललित सुरजन को भेंट की गई तथा इसी अवसर पर पुस्तक के सर्वाधिकारी अनुपम सिंह सिसोदिया के माध्यम से श्री सुरजन के करकमलो पुस्तक की बिक्री से संभावित अधिकतम आय की पूरी राशि के लिए चिकित्सा सुविधा एवं सहयोग उपलब्ध कराने हेतु कार्यरत स्वयंसेवी संस्था ‘जीवनदीप, सुमित फाउंडेशन’ के प्रतिनिधि श्री रविन्द्र सिंह क्षत्रिय को प्रदाय की गई। इस अवसर पर पूर्व मुख्य सचिव द्वय श्री शिवराज सिंह, श्री एस के मिश्रा, पूर्व कुलाधिपति डॉ एस के पांडेय, संचालक संस्कृति श्री तारन सिन्हा व अन्य संस्कृति प्रेमियों की गरिमामय उपस्थिति थी।

यह पुस्तक पिछली सदी के विशेषकर छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति को आधार बनाकर आंचलिक जीवन और स्वास्थ्य को अनूठी शैली में लक्ष्य करती है, जिसमें आप अपने पास-पड़ोस के साथ स्वयं की झलक पा सकते हैं। लागत मूल्य से भी कम कीमत पर यह सचित्र 32 पेज की पुस्तक मात्र 20/- में रायपुर में वैभव प्रकाशन, पुरानी बस्ती, नुक्कड़ जलविहार तथा दुर्ग-भिलाई में श्री संजीव तिवारी से प्राप्त की जा सकती है।

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श्री राहुल कुमार सिंह की वाल से आभार सहित .