प्रख्यात पत्रकार #पी_साईंनाथ की अपील : किसान. मुक्ति मार्च .

29.11.2018

सबसे पहले मैं पाठकों को यह कहना चाहता हूं कि 29 और 30 तारीख को एक किसान मुक्ति मोर्चा का आयोजन होगा। 29 तारीख को दिल्ली के चारों तरफ से किसान रामलीला मैदान आएंगे। 29 तारीख शाम को ‘एक शाम किसान के नाम’ से कल्चरल प्रोग्राम भी होगा।

30 तारीख सुबह दिल्ली पहुंचे किसानों के साथ मध्यम वर्ग के लोग पार्लियामेंट की तरफ मार्च करेंगे। इस मार्च के लिए निमंत्रण दिया है ऑल इंडिया किसान संघर्ष कोऑर्डिनेशन कमिटी ने, जो एक बड़ी ऑर्गेनाइजेशन है दो सौ किसान संगठनों की। मार्च में मध्यम वर्ग के लोग किसानों के साथ सॉलिडेरिटी के लिए जा रहे हैं।

हम सभी का किसानों के साथ एक कनेक्शन है। हम सब एक या दो जनरेशन पहले गांव वाले हैं कुछ लोग अभी भी गांव के हैं। एग्रेरियन क्राइसिस बढ़ने के बाद इसी साल मार्च में हुए मुम्बई किसान मार्च में सॉलिडेरिटी में 10000 तक मध्यमवर्ग के लोग आ गए थे।

29 और 30 नवंबर को होने वाले मार्च में मुख्य दो डिमांड हैं। ऑल इंडिया किसान संघर्ष कोऑर्डिनेशन कमिटी ने दो बिल बनाए हैं, एक एमएसपी के बारे में है तो दूसरा कर्जे के बारे में जिन्हें पास करने के लिए मांग है कि संसद का तीन हफ्ते का एक स्पेशल सेशन बुलाया जाए। इसमें कृषि संकट के साथ दलित, किसान, आदिवासी और महिला किसानों के बारे में भी चर्चा हो। पानी के संकट और पानी के निजीकरण के खिलाफ बातचीत हो।

जब जीएसटी की बात आई तो सरकार ने मिडनाइट को एक स्पेशल सेशन बुलाया और राष्ट्रपति जी को लाकर एक हफ्ते-एक रात में जीएसटी बिल पास कर दिया। स्वामीनाथन रिपोर्ट जिसे राष्ट्रीय किसान आयोग रिपोर्ट भी कहते हैं, 14 साल हो गए हैं लेकिन उस पर आज तक एक घण्टे का भी डिस्कशन नहीं हुआ है।

मैं मध्यम वर्ग के लोगों को यह भी कहना चाहता हूं कि किसान आपको साल में 365 दिन देते हैं क्या हम लोग उनको दो दिन भी नहीं दे सकते हैं? 29 और 30 नवंबर वे दो दिन हैं जिनमें आपको आना चाहिए और किसानों के साथ खड़ा होना चाहिए।

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