सावधान मोदी सरकार! किसान आ रहे हैं : कृषि विरोधी नीतियों के खिलाफ देश भर के किसानों के दिल्ली कूच 29-30 नवंबर का समर्थन करें.

29 नवम्बर के मार्च में शामिल किसानों का अभिनंदन करो
30 नवम्बर को संसद मार्ग पर किसान रैली में शामिल हों

दिल्ली 27 नवम्बर 2018। विशाल कृषि संकट और केवल उससे जुड़े मुद्दों पर ही विचार-विमर्श करने के लिए संसद का तीन-साप्ताही विशेष सत्र बुलाओ। इससे पिछले 20 वर्षों में 3 लाख से ऊपर किसानों की हत्या जुड़ी इस ज्वलंत समस्या पर राष्ट्र का ध्यान केन्द्रित होगा। संसद सत्र निम्न कार्य अवश्य करे-

  • अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा तैयार किए गए 2 महत्वपूर्ण बिलों को पास करें- ऋणग्रस्तता से किसानों की मुक्ति बिल, 2018 और कृषि वस्तुओं के लाभकारी उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी, किसानों का अधिकार बिल 2018।
  • 2004-2006 से संसद में पड़ी “किसानों के लिए राष्ट्रीय कमिशन रिपोर्ट (स्वामीनाथन)” पर विस्तार से बहस हो। इसका अर्थ है कि अन्य चीजों के अलावा, उत्पादकता, लाभजन्यता, दीर्घकालिक अनुसंधान और तकनीकी से पैदा हो रही ऊब पर विचार-विमर्श हो। कृषि अनुसंधान और तकनीकी के निजीकरण पर रोक लगे। इन क्षेत्रों और अन्य क्षेत्रों में निजीकरण के विरुद्ध संघर्ष देशभर के किसानों, मजदूरों और सभी गरीब व हाशिये पर पड़े लोगों का संघर्ष है।
  • महिला किसानों और उन सभी लोगों, जो खेती का अधिकांश कार्य करते हैं, के अधिकारों और पट्टों को ठोस ढंग से सुनिशिचत करो। उसी मजबूती से दलितों और आदिवासियों के भूमि अधिकारों को सुनिशिचत करो। इसे लागू करते हुए जैव विविधता, पानी और मिट्टी की जरूरत के महत्व को समझते हुए सामूहिक स्रोतों के निजीकरण और उनकी गिरावट को खत्म करो। ऐसे ढांचों का निर्मार्ण करो जो कृषि अर्थव्यवस्था के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों, जिनमे विभिन्न तरह की खेती, अन्य फसलें, मछली पालन, पशुधन और मवेशियों से जुड़ी अर्थव्यवस्था तथा कृषि वानकी भी शामिल है, की मदद करें और प्रोत्साहित करें।
  • देश में कृषि के एक के बाद एक क्षेत्र में बढ़ते कॉर्पोरेट शिकंजे को तोड़ो। एसी खेती जो सामुदायिक हित मं हो, न कि कॉर्पोरेटस द्वारा नियंत्रित। कॉर्पोरेटस के लाभ की खातिर कृषि भूमि के जबरन अधिग्रहण को ख़त्म करो, और जो लोग अपनी जमीन के मनमाने अधिग्रहण का विरोध करते हैं, उनका दमन बंद करो।
  • देश के विभिन्न हिस्सों में व्याप्त कृषि संकट से पीड़ित लोगों की गवाहियों (बयानों) को सुनें। उन नीतियों, जैसे कि स्वास्थ्य और शिक्षा के बढ़ते निजीकरण ने कैसे भारत में खेती को तबाह किया है, किसानों और सभी ग्रामीण गरीबों को बदहाल किया है, का पर्दाफाश किया जाए। कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में सार्वजनिक निवेश में आ रही गिरावट को पहले रोको और फिर उसे बढ़ाओ।
  • विभिन्न राज्यों में खेती उजाड़ते गंभीर सूखे की पृष्ठभूमि में देश में फैल रहे भीषण जल संकट पर विचार-विमर्श करो और उसे प्रकाश में लाओ। केवल वर्षा की मात्रा से सबंधित समस्याएँ ही नहीं, मुलभुत वर्गीय, जातीय और लिंग आधारित असमानताओं पर भी विचार हो, जो इस देश में पानी पर नियंत्रण और उपभोग को प्रभावित करती हैं। मकसद पानी पर नियंत्रण और उस तक पहुँच को सामान करना है, विशेषकर भूमिहीनों के लिए।
  • “ऋण-ग्रस्तता से मुक्ति बिल” को पास करते हुए ऋण-ग्रस्तता पर विचार-विमर्श करके न्यायोचित और सबके लिए समान ऋण व्यवस्था कायम करो। एसी व्यवस्था जो किसानों और ग्रामीण गरीबों को कर्ज के जल में पुन: डूबने से बचाए। आश्वस्त करो कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का उन स्वार्थी ताकतों द्वारा निजीकरण न किया जाए जिन्होंने दशकों से उन्हें लूटा है।

कार्यक्रम

पहला दिन : 29 नवम्बर 2018

• 29 नवम्बर 2018 : 12 बजे से दिल्ली के चारों सीमओं से किसान मार्च की शुरुआत

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