पत्रकार गोविंद शर्मा पर कोलमाफ़ियाओं ने किया जानलेवाहमला, सत्ता की चापलूसी नहीं करने वाले पत्रकारों की खैरनहीं :- जावेद अख्तर.

सलाम  छत्तीसगढ़…

बिलासपुर (25 नवंबर 2018)

बिलासपुर में पत्रकार गोविंद शर्मा पर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें वे बुरी तरह से घायल हुएं हैं, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां पर उनका उपचार चल रहा है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पत्रकार गोविंद शर्मा और बिलासपुर जिलाध्यक्ष अमित संतवानी के ऊपर शनिवार को कोल माफियाओं ने योजनाबद्ध तरीके से हमला कर दिया। बता दें कि पत्रकार गोविंद शर्मा कोल माफियाओं के कई काले कारनामों को लगातार उजागर कर रहे थे। इन खुलासों से घबराए कोलमाफ़ियाओं ने प्लान बनाकर दोनों पत्रकारों के ऊपर डंडे व रॉड से हमला कर दिया और जिस मोबाइल में सारे सबूत थे, उसे कुचल दिया। उनके साथ बुरी तरह से मारपीट करके माफियाओं ने तड़पता हुआ छोड़ दिया था।सम्बन्धित थाना में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। दोनों पत्रकारों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। वहीं पत्रकार गोविंद शर्मा की हालत काफी खराब होने से उनको जिला चिकित्सालय सेअपोलो हास्पिटल रेफर किया गया है।

 

 

पत्रकार की बेरहमी से की गई पिटाई की सलाम छत्तीसगढ़,खुलासा टीवी और दैनिक दैनन्दिनी परिवार कड़े शब्दों में निंदा करता है और मारपीट करने वाले कोलमाफ़ियाओं पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की मांग करता है।
यह बेहद अफसोसजनक और दुखद पहलू है कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में पत्रकारों पर लगातार हमले किए जा रहे बावजूद इसके सरकार और प्रशासन मूकदर्शक तमाशाबीन साबित हुआ है।
इस संबंध में अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के ऋषिकेश मुखर्जी ने कहा है कि आरोपियों के खिलाफ अगर त्वरित कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन के बैनर तले न्यायधानी में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

  लंबे समय से पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग – 

गोविंद शर्मा पत्रकार सुरक्षा समिति के प्रदेश अध्यक्ष हैं और पत्रकारों को लेकर सुरक्षा कानून की मांग व आंदोलन करने में अग्रणी रहें हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से मांग की जा रही है, सुरक्षा कानून को लेकर राजधानी से लेकर न्यायधानी तक, कोयलांचल से लेकर ऊर्जालांचल तक, बस्तर से लेकर मोहला मानपुर तक आदि समस्त हिस्सों में रैली, ज्ञापन व धरना प्रदर्शन किया जा चुका है। प्रदेश के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और मुख्य सचिवों से लेकर कलेक्टर, एसपी और एसडीएम तक को ज्ञापन सौंप कर मांग की जाती रही है।

प्रदेश में पत्रकार सबसे ज्यादा असुरक्षित – 

अभी तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पत्रकार दोधारी नंगी तलवार पर चल रहे थे, किंतु विगत कुछेक सालों से तो पूरे प्रदेश में पत्रकार हाशिए पर रख दिये गये हैं। लगातार पत्रकारों पर फर्जी मामले दर्ज करने और झूठी एफआईआर से डराया व धमकाया जाता रहा है। जब पत्रकार इन गीदड़ भभकियों से नहीं डरे तो मारपीट का सिलसिला शुरू कर दिया गया। जिसके भुक्तभोगीबिलासपुर के पत्रकार गोविंद शर्मा हुए।
वरिष्ठ पत्रकार गोविंद शर्मा पर हुए हमले के लिए पूरी तरह से प्रदेश का शासन और प्रशासन जिम्मेदार है। प्रशासन इस पर कितनी भी दिलेरी दिखाए लेकिन हकीकत तो यही है कि जिन्होंने हमला किया उनमें इतना साहस आया कहां से? क्योंकि बिना शासन प्रशासन के सरंक्षण के किसी भी पत्रकार पर हमला करने की हिम्मत और हिमाकत कोई भी माफिया नहीं कर सकता है। इसके अलावा और किसी की क्या मजाल जो एक आम नागरिक को हाथ लगा दे, ये तो फिर भी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के कलमकार ठहरे।

सवाल यही उठता है कि आखिरकार शासन प्रशासन ऐसा क्यों चाहेगा? इसका उत्तर इस बात से समझ सकते हैं कि प्रदेश में सत्तासीन दल लगातार पंद्रह सालों से सत्ता की कुर्सी पर काबिज़ है, और लंबे समय तक मिली सत्ता का नशा अब अहंकार और घमंड का रूप ले चुका है। सत्ता के नशे में चूर प्रमुख दल की अपनी एक व्यक्तिगत गाइडलाइंस बन चुकी है कि जो सत्ता के तलुवे चाटेगा वही सुरक्षित रहेगा और फले-फूलेगा यानि हर तरीके से सत्ता की चापलूसी करने वालों के लिए ही अच्छे दिन है और उनका ही विकास होगा। जो भी सत्ता की खामियां उजागर करेगा, सवाल करेगा, अधिकारों की बात करेगा, कानून और मानवाधिकारों की बात करेगा वो सत्तासीनों का विरोधी माना जाएगा और उसके प्रति एक असुरक्षित माहौल बना दिया जाएगा, उक्त को डराने धमकाने और मारने पीटने के लिए पुलिस और माफियाओं का सदुपयोग किया जाएगा। फिर वो चाहे आम नागरिक होगा या सामाजिक कार्यकर्ता, आरटीआई एक्टिविस्ट होगा या कर्मचारी, फिर वो चाहे पत्रकार होगा या संपादक।
सबको पहले डराया धमकायाा जाएगा, अगर फिर भी सत्ता की चापलूसी नहीं करेंगे तो फिर मारा और पीटा जाएगा, फर्जी केस लादे जाएंगे, बेवजह थानों मेंं बंंद कर पिटाई की जाएगी। जिनको लोगों का समर्थन होगा उन पर माफियाओं और गुंडों द्वारा हमला करवाया जाएगा, यहां तक कि जानलेवा हमले होंगे और हत्या भी करवा दी जाएगी। कुल मिलाकर प्रदेश में रह रहे निवासियों को दो श्रेणी में रख दिया है।

पहली श्रेणी होगी सत्ता के चाटुकार यानि जो गलत-सही न्याय-अन्याय से परे रहेंगे, अवैधानिक अत्याचार और दमन पर सदैव खामोश रहेंगें और सत्ता की जय जयकारा ही करेंगे,
कुशासन को सुशासन बताएगें, जबरिया भूमि कब्ज़े को सही ठहराएगें, निजीकरण को जायज़ ठहराएगें, आदिवासी समाज पर किए जा रहे दमन को वैध ठहराएगें, फर्जी मुठभेड़ों को नैतिक बताएगें। हरे भरे वनों की कटाई को विकास बताएगें।

जो भी चाटुकार या चापलूस नहीं बनेंगे वे सभी द्वितीय श्रेणी के तहत विरोधी होंगे। जो भी सरकार से सवाल करेगा, न्याय की बात करेगा, वैध व अधिकारों की बात करेगा, सरकारी नीति की खामियों को उजागर करेगा, सरकारी योजनाओं की कमियों को गिनवाएगा, आदिवासी समाज के लिए बात करेगा, समानता की बात करेगा।

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सलाम छतीसगढ से जावेद अख्तर 

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