औरतोँ_के_मार्चिंगसोंग_और_अमरीकी_अवाम_की_सिम्फनी

9.11.2018

(लोकजतन अंतर्राष्ट्रीय डैस्क)

प्रस्तुति बादल सरोज 

● इसमे दो राय नही हो सकतीं कि अमरीकी कांग्रेस के चुनावों में औरतों की बढ़ी-चढ़ी जीतों के पीछे अक्टूबर 2017 में तराना बुरके और एलीसा मिलानो द्वारा छेड़ा गया #मी_टू_मूवमेंट एक तात्कालिक मनोवैज्ञानिक या मनोगत – सब्जेक्टिव – वजह रहा होगा/ है । किन्तु इसकी कई वस्तुगत – ऑब्जेक्टिव – वजहें भी हैं ।

● प्रभुत्वकारी स्थिति का दुरुपयोग करके किया जाने वाला लैंगिक शोषण भी अपने अंतिम निष्कर्ष में वर्गीय शोषण का ही रूप है लिहाजा इसके खिलाफ आवाज उठाना एक सशक्त विरोध कार्यवाही है । वर्गसंघर्ष का एक रूप है । ( उम्मीद है इस सूत्रीकरण के लिए “धुर क्रान्तिकारी” जान बख्शने की मेहरबानी अता फरमायेंगे !!)

● आक्रोश – अगर क्रांतिकारी विकल्प उपस्थित न हो तो – अनेक जरियों, रूपों, तरीकों से मुखर होता है, अभिव्यक्त होता है । कभी कभार तो यह प्रतिक्रान्तिकारी उन्मादी लामबंदियों में भी दिखता है।
(किसी उदाहरण की आवश्यकता है क्या ??

● हमारे प्रिय साथी और मध्यप्रदेश के हमारे सबसे पसंदीदा वक्ता रामविलास गोस्वामी Ramvilash Goswami अक्सर अपने भाषणों में उस क्रुध्द और क्षुब्ध मजदूर की कथा सुनाते हैं जो दिन भर के इंतजार के बाद भी काम न मिलने या मालिक-ठेकेदार से अपमानित होकर भूखा प्यासा खाली हाथ घर लौटता है और सारी खीज और गुस्सा अपनी बीबी और बच्चों पर निकालता है । यह आक्रोश की हताश और नकारात्मक अभिव्यक्ति है । प्रतिरोधी संगठनों की कमजोरी या अनुपस्थिति ऐसे ही हिंसक निर्गम तलाशती है ।

● अमरीकी जनता इन दिनों अपने बेइंतहा तकलीफदेह दौर से गुजर रही है । एक शुध्द पागल, सैक्स मैनियैक, युध्दोन्मादी उनका राष्ट्रपति बना बैठा है जो दिन में 24 से 36 के हिसाब से विभाजनकारी और भद्दे ट्वीट करके जख्मो को हरा करता रहता है । खुद अमरीकी कॉर्पोरेट पूंजीवाद के जघन्य स्टैण्डर्ड से भी यह बन्दा कुछ ज्यादा ही नाकाबिले बर्दाश्त होता जा रहा है ।

● इसी के साथ अमरीका – यहां अमरीका का मतलब है संयुक्त राज्य अमेरिका यानि यूएसए – में

¶ पिछली 10 वर्षों में 50 से 70 लाख लोगों की नौकरियां छीन ली गई हैं ।

¶¶ रोजगार पिछली 40 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर हैं ।
¶¶¶ जिन्हें रोजगार मिला है उनमें भी 2 करोड़ 20 लाख अंडर-एम्प्लॉयड हैं ।

¶¶¶¶ 6 करोड़ श्रमिक कर्मचारी 15 डॉलर रोज और इनमें भी 4 करोड़ 12 डॉलर रोज से कम की पगार पर खट रहे हैं ।

¶¶¶¶¶ट्रंपोमेनिया के चलते नस्लीय हिंसा, बच्चों के साथ किये जाने वाले अपराध और पुलिस बलों की यंत्रणाओ का ग्राफ फ्रेम के बाहर निकल गया है ।
(दुःखों की गाथा लम्बी है मगर फ़िलवक्त इतना ही )

● यही संचित आक्रोश था जो इन चुनावों में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की हार और डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत में दिखा, महिलाओ की – उसमे भी वंचित समूहों की महिलाओ – की जीत में दिखा ।

● किसी सचमुच के राजनीतिक विकल्प के अभाव में , आखिर में यह महिलाये ही निकली जिन पर शोषण के शिकार अमरीकियों ने एतमाद किया है , भरोसा जताया है । अपनी सिम्फनी की सारी धुनें उन्हें सौंप दी है इस उम्मीद के साथ कि वे अपने सुरों को उसमें बांधेंगी ।

● बाकी सब ठीक-अठीक-बेठीक बाद में, फिलहाल तो ये औरतें सलाम और अभिनंदन की हकदार हैं ।

अंं

******

CG Basket

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

उम्मीदवारों की मुद्दे व विषय की पृष्ठभूमि पर अच्छी तरह से आंकलन और मूल्यांकन कर अपना मतदान करें और योग्य प्रत्याशी का चयन करें.ः 23 से ज्यादा जनसंगठनों के साझा मंच जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा   रायगढ़

Sat Nov 10 , 2018
10.11.2018 ः रायगढ 23 से ज्यादा जनसंगठनों के साझा मंच जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा   रायगढ़  ने विधानसभा चुनाव  में  उम्मीदवारों […]

You May Like