माकपा ने भाजपा को जनविरोधी, सांप्रदायिक व फासीवादी पार्टी करार दिया है तथा उसे निर्णायक रूप से परस्त करने, विधानसभा में वामपंथ की उपस्थिति सुनिश्चित करने और संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक धर्मनिरपेक्ष सरकार के गठन की आम जनता से अपील. ःः. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी छतीसगढ

9.11.2018 रायपुर 

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण की पूर्व संध्या पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भाजपा की कथनी-करनी में भारी अंतर का उल्लेख करते हुए उसे जनविरोधी, सांप्रदायिक व फासीवादी पार्टी करार दिया है तथा उसे निर्णायक रूप से परस्त करने, विधानसभा में वामपंथ की उपस्थिति सुनिश्चित करने और संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक धर्मनिरपेक्ष सरकार के गठन की अपील आम जनता से की है.

पार्टी की इस अपील को मीडिया के लिए माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने जारी किया. अपील में माकपा ने कहा है कि भाजपा ने आम जनता से जो वादे किए थे, उसने उन वादों को पूरा नहीं किया और नव-उदारवादी नीतियों पर अमल के कारण आम जनता की दुश्वारियां बढ़ी हैं. इनकी नीतियों के खिलाफ मेहनतकशों ने जब भी आवाज उठाई हैं, सत्ता की पाशविक ताकत के बल पर उसे निर्ममता से कुचला ही गया है. आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं और नागरिक स्वाधीनता और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को ‘नक्सली और देशद्रोही’ कहकर प्रताड़ित किया जा रहा है.

अपनी अपील में माकपा ने भाजपा पर सांप्रदायिक मुद्दों को उछलने का आरोप लगाते हुए कहा है कि भाजपा का चौथी बार सत्ता में आना देश के संविधान, जनतंत्र, धर्मनिरपेक्षता व मानवाधिकारों के लिए खतरा साबित होगा. उसकी पराजय को सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि भाज्पविरोधी वोटों को विभाजित होने से रोका जाएं. इसी परिप्रेक्ष्य में माकपा का मानना है कि जोगी-बसपा गठबंधन भाज्पविरोधी वोटों को विभाजित कर रही है. इससे भाजपा को ही मदद मिलेगी.

माकपा ने विधानसभा में वामपंथ की उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए आम जनता से अपने वोट का उपयोग इस तरह करने की अपील की है कि एक धर्मनिरपेक्ष सरकार का गठन किया जा सके.

छत्तीसगढ़ माकपा की अपील :

जनविरोधी सांप्रदायिक-फासीवादी भाजपा की हार सुनिश्चित करो!! माकपा प्रत्याशियों को विजयी बनाओ!! संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक धर्मनिरपेक्ष सरकार का गठन करो!!!

छत्तीसगढ़ सहित पांच राज्यों में होने वाले चुनाव देश की भावी राजनीति की दशा-दिशा को निर्धारित करने वाले हैं. किसानों की क़र्ज़ से मुक्ति, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य, पेट्रोल-डीजल-गैस की बढ़ती कीमतों और आसमान छूती महंगाई पर लगाम, बेरोजगारों को काम, संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण और महिलाओं की सुरक्षा –– भाजपा के चुनावी वादे थे. लेकिन राज्य में पिछले 15 सालों से तथा देश में पिछले साढ़े चार सालों से भाजपा ने जिन पूंजीपतिपरस्त नीतियों को लागू किया है, उससे आम जनता का जीवन-स्तर नीचे ही गिरा है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी बर्बाद हुई है. प्रदेश में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) बढ़ने का फायदा चंद धनकुबेरों को ही मिला है. प्रदेश के विकास के भाजपाई दावे की पोल इसी तथ्य से खुल जाती है कि देश के सर्वाधिक पिछड़े 115 जिलों में से 10 जिले केवल छत्तीसगढ़ के ही है.

भाजपाई नीतियों के दुष्परिणाम :

1. पिछले एक दशक में प्रदेश में 14705 किसानों ने आत्महत्या की है. प्रदेश के आधे से ज्यादा किसान परिवार महाजनी और बैंकिंग क़र्ज़ में फंसे हुए हैं. फसल बीमा योजना का कोई फायदा प्रदेश के किसानों को नहीं मिला है. निजी बीमा कंपनियों ने प्रीमियम के रूप में 9041 करोड़ रूपये तो बटोरे हैं, लेकिन सूखापीड़ित 13 लाख किसानों को लौटाए हैं केवल 1200 करोड़ रूपये ही! प्रदेश में ग्रामीण आबादी 76% है, लेकिन बजट का मात्र 11% ही ग्रामीण विकास के नाम पर खर्च किया जाता है और 45% दलितों-आदिवासियों के लिए मात्र 2-3%.

2. जल-जंगल-जमीन-खनिज व अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर समाज का अधिकार ख़त्म हुआ है. इन प्राकृतिक संसाधनों पर कार्पोरेटों के कब्जों को सुनिश्चित किया गया है. भू-राजस्व संहिता में आदिवासीविरोधी संशोधनों के कारण बड़े पैमाने पर आदिवासियों व दलितों को अपनी भूमि से विस्थापित होना पड़ा है. पिछले एक दशक में 1.3 लाख एकड़ से ज्यादा खेत ख़त्म हुए हैं.

3. प्रदेश में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या बढ़कर 25 लाख से ज्यादा हो गई है. नोटबंदी व जीएसटी के कारण रोजगार और व्यापार-धंधा भी चौपट हो गया है. निजी क्षेत्र में रोजगार वृद्धि दर शून्य है. बहुप्रचारित ‘पद्दू’ योजना के अंतर्गत केवल 12000 लोगों को ही पकौड़ा-रोजगार मिला है.

4. दो लाख राशन कार्डों के आधार से लिंक न होने के कारण ये परिवार राशन से वंचित हैं और सार्वजनिक वितरण प्रणाली ध्वस्त हो गई है.

5. स्वास्थ्य सूचकांकों के आधार पर छत्तीसगढ़ देश में 12वें स्थान पर है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुई है. प्रदेश में 96% लोग आज भी अस्पतालों में अपने ईलाज के लिए जेब से पैसे खर्च करते हैं. डेंगू और मलेरिया के बढ़ते प्रकोप ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है.

6. कैग ने पिछले 15 सालों में इस सरकार के लगभग एक लाख करोड़ रुपयों के घपलों-घोटालों/अनियमितताओं को उजागर किया है. सत्ता में आने के बाद से अब तक तेंदूपत्ता संग्रहण में ही 3000 करोड़ रुपयों का घोटाला उजागर हुआ है. इससे प्रति संग्राहक परिवार 27000 रुपयों का नुकसान हुआ है.

7. मनरेगा भुगतान के मामले में छत्तीसगढ़ का स्थान 26वां है और पिछले वर्ष का 300 करोड़ रुपयों का मजदूरी भुगतान बकाया है. मनरेगा में पंजीकृत एक तिहाई परिवारों और मजदूरों को एक भी दिन का काम नहीं मिला है. 55 लाख पंजीकृत परिवारों में से केवल 4.75 लाख परिवारों को ही औसतन 30 दिनों का ही काम मिला है. गांवों में रोजगार के अभाव के कारण हजारों लोगों को हर साल पलायन करना पड़ता है.

8. प्रदेश में चिटफंड कंपनियों द्वारा 50000 करोड़ रुपयों से ज्यादा की लूट की गई है. 21 लाख परिवार इस लूट का शिकार हुए हैं, लेकिन किसी भी कंपनी के खिलाफ कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई है. इस लूट के कारण कई लोगों ने आत्महत्या की है.

9. युक्तियुक्तकरण के नाम पर प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में 3000 स्कूल बंद कर दिए गए हैं. इससे लाखों आदिवासी बच्चे शिक्षा क्षेत्र से बाहर हो गए हैं. पिछले दो सालों से 75000 दलित छात्र-छात्राओं की 40 करोड़ रुपयों की छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं किया गया है. निजीकरण के कारण पूरी शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई है और निजी शिक्षा संस्थाएं लूट का अड्डा बन गई है.

10. बहुप्रचारित उज्जवला योजना पूरी तरह से फ्लॉप है और प्रदेश की 75% जनता आज भी कोयला या जलाऊ लकड़ी पर ही निर्भर है. जिन 18 लाख लोगों को गैस सिलिंडर बांटे गए हैं, उनमें से 8 लाख लोगों ने अभी तक दूसरा सिलिंडर नहीं लिया है.

आम जनता के अधिकारों पर निर्मम हमला :

ये तथ्य भाजपा राज के 15 सालों के कुशासन की कहानी कहते हैं. इसके कारण प्रदेश के सभी तबके अपने बेहतर जीवन और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलित हैं. पेसा कानून, 5वीं अनुसूची व वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन और अपनी आदिवासी-अस्मिता की रक्षा के आदिवासी समाज लिए लड़ रहा हैं. इस संघर्ष में जो लोग शामिल है, उन्हें नक्सली कहकर प्रताड़ित किया जा रहा है. निर्दोष आदिवासी राज्य-प्रायोजित आतंकवाद के शिकार हैं और उनके मानवाधिकारों का दमन किया जा रहा है. प्रदेश में दलित आज भी जातिवादी अत्याचार का शिकार हैं और मंदिर प्रवेश से लेकर सार्वजनिक स्थानों से पेयजल लेने और सामाजिक समारोहों में समान रूप से शिरकत करने पर प्रतिबंध हैं. आदिवासी-दलितों को संवैधानिक आरक्षण के प्रावधानों से वंचित करने की कोशिशें जारी हैं. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, रसोईया मजदूर, मितानिन, शिक्षाकर्मी, पुलिस, नर्स आदि – कर्मचारियों के सभी तबके अपने बेहतर वेतन और नियमितीकरण के लिए लड़ रहे हैं. लेकिन इनके संगठित होने और आंदोलन करने के लोकतांत्रिक अधिकार को स्वीकार करने के बजाये भाजपा सरकार ने सत्ता की पाशविक ताकत के बल पर इनके आंदोलनों को निर्ममता से कुचला है. इन आंदोलनकारियों को देशद्रोह के आरोप में जन सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है.

सांप्रदायिकता ही सहारा :

आम जनता के असंतोष को दबाने के लिए भाजपा और संघी गिरोह सांप्रदायिक मुद्दों को उछालने में लगा है. इसके लिए भाजपा-आरएसएस ने गौ-रक्षा, लव जेहाद, पाकिस्तान, राष्ट्रवाद जैसे मुद्दे उठाये हैं, ताकि एक हिन्दू-सांप्रदायिक मानसिकता का निर्माण करके चुनावी लाभ बटोरा जा सके. प्रदेश में बड़े पैमाने पर चर्चों पर धर्मांतरण के नाम पर हमले किए गए हैं. दलितों और अल्पसंख्यकों की रोजी-रोटी को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया है.

स्पष्ट है कि भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियां प्रदेश को बर्बाद करने वाली तो हैं ही, उसकी आस्था धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय, समानता और भाईचारा जैसे संवैधानिक मूल्यों में भी नहीं है. इसलिए इस सरकार का चौथी बार सत्ता में आना हमारे देश के संविधान, जनतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और मानवाधिकारों के लिए भी खतरा साबित होगा.

भाजपा और उसको मदद पहुंचाने वाली पार्टियों को हराओ :

इसीलिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी आम जनता से अपील करती है कि भाजपा और उसको मदद पहुंचाने वाली पार्टियों/गठजोड़ की हर हालत में पराजय सुनिश्चित करे. भाजपा विरोधी मतों के विभाजन से भाजपा को ही मदद मिलेगी. जोगी-बसपा गठबंधन और अन्य पार्टियां ‘वोट कटाऊ’ की भूमिका में ही है, जो भाजपा के लिए मददगार साबित होगी. वे भाजपा की सांप्रदायिक-फासीवादी नीतियों के खिलाफ भी चुप्पी साधे हुए हैं. अतः जरूरी है कि भाजपाविरोधी वोट उस पार्टी या प्रत्याशी के पक्ष में जाए, जो भाजपा को हरा सके, ताकि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एक धर्मनिरपेक्ष सरकार का गठन किया जा सके.

माकपा प्रत्याशियों को विजयी बनाओ :

भाजपा की पराजय को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ही माकपा ने 3 सीटों – लुंड्रा, भटगांव व कटघोरा – पर लड़ने का फैसला किया है. ये वे सीटें हैं, जहां माकपा पिछले एक दशक से आम जनता को लामबंद कर उसके वास्तविक मुद्दों पर मैदानी लड़ाई लड़ रही है और कांग्रेस-भाजपा के राजनैतिक-वैचारिक विकल्प के रूप में उभरकर सामने आई है. लगातार जनसंघर्षों को संगठित करने के जरिये ही माकपा ने यह प्रतिष्ठा अर्जित की है.

आईये, लुंड्रा विधानसभा क्षेत्र से श्रीमती मीना सिंह को, भटगांव से सुरेन्द्रलाल सिंह को और कटघोरा क्षेत्र से सपूरन कुलदीप को विजयी बनाएं, ताकि प्रदेश में नेता बदलने की लड़ाई को नीति बदलने के संघर्ष से भी जोड़ा जा सके. विधानसभा में माकपा की उपस्थिति आम जनता की समस्याओं और मांगों पर सड़कों पर चल रहे संघर्षों को और मजबूत करेगी.

आईये,

भाजपा की पराजय सुनिश्चित करें. आईये, इस लोकतंत्र, संविधान, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय और भाईचारे की रक्षा के संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए अपने वोट का इस तरह प्रयोग करें कि एक धर्मनिरपेक्ष सरकार का गठन किया जा सके.

संजय पराते 

राज्य सचिव 

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, छत्तीसगढ़ राज्य समिति

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