मनुष्यता_का_निर्णायक_दीपोत्सव. ःः  रामपुर बघेलान के गांवों में घूमते हुये रौशनी का पुनर्स्मरण, ःः बादल सरोज 

धीरे धीरे बिखर रहा है जर्रा जर्रा जाने कौन फोटो -होसैन

7.11.2018

● इतिहास के साथ और भले कितनी दुविधाएं हों एक बड़ी सुविधा है ; इसे सूक्ष्म विवरणों से परे जाकर एकसाथ विहंगम रूप में निहारा जा सकता है – और मजेदार बात यह है कि ऐसा करना हमेशा आश्वस्तिदायक होता है ।

● मनुष्यता – समाज – संस्कृति – ज्ञान और विज्ञान हमेशा आगे की ओर बढ़ते – हमेशा पहले से तेज गति से कुंचाल मारते बढ़ते हैं ।
और इस तरह इतिहास उत्तरोत्तर गति पकड़ने का वर्तमान हो जाता है जिससे, यदि सही से निबट-सुलझ लिया जाये तो, एक निरापद भविष्य का उपादान बनता है ।

● पृथ्वी के जीवन मे ऐसे क्रिटिकल क्षण करोड़ों साल के अंतरालों में नजर आते हैं मगर साफ दिखाई देते हैं । पृथ्वी का सूरज से अलग होना, उसका ठंडा होना, गोंडवाना की वृहद शिला का आकार लेना, टूटना, महाद्वीपों में बंटना, शीत युग, समंदर में जीव की उत्पत्ति और फिर जन्तुओं से होते हुए मनुष्य तक पहुंचना ।

● मगर मोटामोटी यह इतिहास नही है । यह प्रकृति है जो चिरन्तन है । प्रकृति होती है , अपने नियमों में सजी-संवरी-बंधी, होती रहती है । वह इतिहास नही होती । जैसे रोटी खाना इतिहास नही, रोटी पाना इतिहास है । किसी की रोटी चुरा कर कोठी बनाना इतिहास का सबसे बड़ा धतकरम ।

● इस लिहाज से इतिहास मनुष्य समाज का होता है । इतिहास वह होता जो मनुष्य रचता है ।

● मनुष्य और मानव समाज के इतिहास का विहंगावलोकन बड़ा रोचक है । उसके मनुष्य रूप में विकसित होकर आरंभिक खेती करने से अब तक का समय यदि 24 घंटा मान लिया जाये तो ताम्रयुग फ़क़त 10 मिनट पहले की बात है , वैदिक सभ्यता को कुल 5 मिनट हुए हैं । इस हिसाब से अनुमान लगा लीजिये कि “ईश्वर” के अवतारों – राजा महाराजाओं – के युग सामन्तवाद और “अजर अमर” पूंजीवाद कितने दीर्घायु होंगे !! बेचारे ईश्वर-ख़ुदा और गॉड कितने अधुनातन होंगे ।

● इस इतिहास का सबसे युगांतरकारी क्षण था – 7 नवम्बर 1917 – अक्टूबर क्रांति । इस दिन राज करने की तब तक की सारी धारणाओं की खाट खड़ी कर दी गई थी । शासनप्रणाली का टाट उलट दिया गया था । यह साबित कर दिया था कि मजदूर और उसका पसीना सिर्फ सृजन और निर्माण करने की ही नही, राज करने की भी सबसे बेहतर योग्यता रखता है । यह खुद मजदूर ने पहले जार और उसके बाद केरेन्स्की की पूंजीवादी सरकार को उलट कर कर प्रमाणित किया । पहली बार समाजवादी शासन प्रणाली कायम करके मानवता के सपने को साकार किया ।
● उसके बाद जैसा कहते है द रैस्ट इज हिस्ट्री – दुनिया जैसी थी वैसी नही रही ।

● यह मनुष्यता की आलीशान दीवाली थी – मानव समाज का अभूतपूर्व दीपोत्सव ; एक ऐसे दीये का प्रज्वलित किया जाना जिसने युगों युगों के अंधेरे को हमेशा के लिए तिरोहित कर दिया ।
● इस दीवाली पर उस दीवाली की शुभकामनाये ।

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