7.11.2018

59 मिनट में एक करोड़ के ऋण देने के संबंध में एक खुलासा आया है
यह ऋण सैद्धांतिक रूप से एक ई-मेल द्वारा पारित किया जाएगा ,यह एक आटो जनरेटेड प्लेटफार्म होगा जिसमें आवेदक की अधिकांश जानकारी होगी उसके ऋण की गणना और ऋण प्रदाता बैंक भी यही पोर्टल तय करेगा यहां तक तो ठीक लेकिन आवेदक के पास 1- जो ई-मेल आएगा उसकी IDहै .Noreply@CapitalWorld.com
2-CapitalWorld कंपनी 30 मार्च 2015 में बनी और यह अहमदाबाद गुजरात में रजिस्टर्ड है
3-31 मार्च 2017 तक कंपनी ने कोई काम नहीं किया उस समय उसके पास 15हजार रुपए थे
4- कंपनी के लिए हस्ताक्षर करने वालों के नाम क्रमशः जिनंद शाह और विकास शाह हैं
5- कंपनी के एक निर्देशक हैं विनोद मेधा , इसके पहले ये निरमा और मुद्रा( इस कंपनी को अनिल अंबानी ने शुरू किया था) का रणनीतिक सलाहकार था
6-ऋण लेने वालों को आवेदन के साथ 1180रुपए और ऋण स्वीकृत होने पर उसका0 .35% प्रोसेसिंग फीस मतलब एक करोड़ पर 35 हजार रूपए
7- capital world आवेदक के लिए बैंकों से धन लेगा जिसकी पूरी देनदारी आवेदक पर होगी और जिम्मेदारी बैंक की
8-इस कंपनी के पास आवेदक के सारे संवेदनशील डाटा होंगे जिन्हें सूचना के अधिकार के तहत नहीं मांगा जा सकता.
9-मार्च 2018 के बाद कंपनी ने चार और निर्देशक नियुक्त किए हैं इनमें से एक अखिल हांडा है जो 2014 में मोदी के चुनाव प्रचार संचालकों में शामिल था.
प्रश्न है एक निजी कंपनी सभी लघु मध्यम उपक्रमों के ऋण स्वीकृत कर उन्हें बैंकों से जोड़ेगा।उसकी विश्वसनीयता क्या है ,यह देश के वित्तीय क्षेत्र में करता हैसियत रखती है , बैंकों से ऋण देने के मामले में यह लीड बैंक की भूमिका कैसे निभाएगी कंपनी का चयन कैसे हुआ,उसकी योग्यता क्या है और चयन के मापदंड क्या है और क्या यह पारदर्शी तरीके से अनेकों के बीच से चयनित हुई है? यह कंपनी न ही सक्रिय थी और न ही इसके पास इस तरह का अनुभव है.
शाह, अहमदाबाद, अनिल अंबानी क्या महज संयोग है
मोना, मुद्रा अनिल अंबानी? कैसे लाखों करोड़ रुपए के ऋण स्वीकृति के लिए बिना अनुभव वाली इस कंपनी का चयन किया गया इस पर विश्वास करने के आधार क्या है
Capital worldको किन शर्तों पर अनुबंधित किया गया है
Capital world जो 15000 रुपए की पूंजी से बनी है यदि सिर्फ दस लाख लघु मध्यम उपक्रमों के लिए (SME की संख्या कहीं बहुत ज्यादा है) के ऋण प्रोसेस करती है तो भी वह शीघ्र ही अरबों रुपए से खेलेगी
क्या कंपनी को डाटा सुरक्षित और गोपनीयता कानून के तहत बंधनकारी है ऐसे किसी शर्त से कंपनी बंधी है कि नहीं .
अभी 59 मिनट में एक करोड़ रुपए के ऋण तो मिलने शुरू नहीं हुए हैं लेकिन एक बड़े घपले की बदबू तेजी से फैलने लगी है देखना है कोई खोजी पत्रकार और क्या क्या लेकर आता है मोदी के इस पिटारे से.

वाटसेप से प्राप्त तथ्य 

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