रायगढ ःः साहित्यकारों ने याद किया जन कवि लक्ष्मण मस्तूरिया को दी श्रधांजलि.

5.1.2018 रायगढ 

छत्तीसगढ़ माटी के लोक कवि लक्ष्मण मस्तुरिया के निधन के समाचार से रायगढ़ सांस्कृतिक जगत स्तब्ध रह गया।मोरसंग चलव रे—-। के अमर गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिया छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू, सांस्कृतिक चेतना ,और सामाजिक ताने बाने को बुनते ,सहेजते,संवारते,अपनी साहित्यिक विरासत को सौपते हुए “मोर संग चलव रे ——“जन जागृति के मधुर स्वर से वातावरण को मोहित करते हुए अचानक अनन्त यात्रा में अकेले ही चल पड़े।

छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक केंद्र रायगढ़ के संरक्षक संगीत शिरोमणि एवं प्रसिद्ध ग़ज़ल व गीतकार वेदमणि सिंह ठाकुर ने अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि”मस्तुरिया विलक्षण प्रतिभा के धनी थे।उनके गीतों में छत्तीसगढ़ माटी की सोंधी महक रची बसी होती थी।

लक्ष्मण मस्तुरिया के बाल सखा व मितान मनहरण सिंह ठाकुर ने बहुत दुख व्यक्त करते हुए अपने बाल सखा के साथ बिताए बचपन के अविस्मरणीय क्षणों को याद किया।उन्होंने बताया कि मस्तुरिया जी बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे छत्तीसगढ़ी गीतों के अतिरिक्त वे एक अच्छे चित्रकार ,मूर्तिकार,एवं उच्चकोटि के टेलर थे।बचपन संघर्षों में बिता।हमदोनो कुछ दिन पटवारी के सहायक के रूप में कार्य किया फिर वे अध्यायपकीय कार्य में चले गए और मै जीवन बीमा निगम की सेवा में आगया।
श्री मनहरण सिंह ने आगे बताया कि” मस्तुरिया के दिल में गरीबों, मज़दूरों, किसानों एवं शोषितों के प्रति काफी दर्द था।वे हमेशा शोषण के खिलाफ ,समाजिक चेतना और छत्तीसगढ़ की अस्मिता के लिये काफी चिंतित रहते थे वही दर्द उनके गीतों में होता था।उनकी कुछ रचनाओं को मैंने संगीत बद्ध भ किया है जिसमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित गीत हैं:-
*चल जवान कदम कदम चल——।*पछतावे रे दगाबाज़——।
*कौन धुन बजावों में धुन ही बंसुरिया——–।*व रे मोर पड़की मैना——आदि।
श्री मनहरण सिंह ठाकुर बहुत ही भाव विव्हल हो कहा कि मितान ने अपना पूरा फ़र्ज निभाया कुछ दिन पूर्व डॉ बलदेव साव के निधन एव दिगम्बर महंत की माताश्री के निधन पर शोक व्यक्त करने10 ऑक्टोबर 2018 को रायगढ़ आये और घर में रहे रात भर बहुत सारी बातचीत हुई पर यह नहीं बताए कि मितान ये आखरी मुलाकात है। मितान मैं अकेला हो गया। *मोर संग चलव रे——–अब इस गीत को कौन गायेगा।अपने मितान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आंखों में आँसू भर गए।

श्री जगदीश मेहर, गणेश कछवाहा, शिवकुमार पांडे, प्रो के के तिवारी, श्याम नरायण श्रीवास्तव, कमल बोहिदार, देवलाल देवांगन,हरे राम तिवारी,रामगोपाल शुक्ल,हुतेन्द ईश्वर शर्मा, तरुण बघेल,नंदलाल त्रिपाठी, अंजनी अंकुर आदि साहित्यकारों एवं संस्कृति कर्मियों ने छत्तीसगढ़ माटी के मधुर लोकगीतकर लक्ष्मण मस्तुरिया को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

गणेश कछवाहा की रिपोर्ट 

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