भाजपाई प्रवक्ताओं प्रत्याशियों के लगभग विक्षिप्त प्रलाप ‘ :. नंद कश्यप

1.11.2018
भाजपाई प्रवक्ताओं प्रत्याशियों के लगभग विक्षिप्त प्रलाप यह बतला रहे कि आरएसएस और भाजपा को कभी समर्थन करने वाले लोग भी अब उससे किनारा करने लगे हैं ठीक “दूर के ढोल सुहावने लगते हैं” कहावत की तरह पहले भाजपा के ही वरिष्ठ नेता सांसद जिसमें अरुण शौरी यशवंत सिन्हा शत्रुघ्न सिन्हा कीर्ति आजाद आदि खुलकर विरोध में आ गए, फिर रामदेव ने कह दिया कि वह भाजपा के लिए प्रचार नहीं करेगा, राफेल विमान सौदे के सवाल पर पूरे देश में मोदी आरएसएस की छवि खराब हुई है और निचले स्तर के कार्यकर्ताओं में भी अब यह बात पैठते जा रही है कि मोदी पूंजीपतियों का है उनका नहीं ,
विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाने वाले सुब्रमण्यम स्वामी सीबीआई के प्रश्न पर खुलकर आलोक वर्मा के पक्ष में खड़े हैं तो अभी अनुपम खेर का फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान के निदेशक पद से इस्तीफा और उससे पहले यह बयान कि “मनमोहन सिंह जी आपको इतिहास कभी गलत नहीं समझेगा” , अनुपम खेर संजय बारु की किताब “एक्सीडेंटल प्राईम मिनिस्टर” पर बनी फिल्म में डाक्टर मनमोहन सिंह की भूमिका निभा रहे हैं, देश में ऐसे हजारों लोग हैं जो 2013 में ऐसा सोचते थे कि आरएसएस भारत को समझता है और वह कुछ अच्छा करेगा तथा मोदी व्यक्तिगत रूप से ईमानदार है और ईमानदारी से सरकार चलाएगा , परंतु इनके दिल्ली की सत्ता में आने के बाद सिर्फ दो साल में ही अधिकांश लोगों का नशा फटने लगा था और आज वो तमाम लोग यह सोचने लगें हैं कि किस तरह इस भ्रष गैरजिम्मेदार अराजक लोगों से छुटकारा मिले , लेकिन लुटेरे पूंजीपतियों ने आरएसएस भाजपा को धन तो बेपनाह दिया है और उस धन से इन्होंने मीडिया और मीडिया कर्मी खरीद रखें हैं लेकिन मोदी सरकार की करस्तानी ही ऐसी है कि डिबेट में उसके प्रवक्ता सरकार का तार्किक बचाव नहीं कर पाते हैं और उनके द्वारा खरीदे हुए मीडिया कर्मी भी उनकी सहायता नहीं कर पाते तो ये प्रवक्ता विक्षिप्त हो जाते हैं लेकिन यह यहीं नहीं रुकने वाला है जैसा कि लगभग सभी का जीवंत अनुभव होगा कि जब हम जिनसे साथ की उम्मीद रखते हैं वो छोड़ने लगते हैं तो हमारे भीतर चिड़चिड़ापन शुरू हो जाता है और यह और आगे बढ़ बात बेबात अपनों से झगड़ने लगते हैं तो भाजपाइयों का भी यही हश्र होने जा रहा है कल को इनके प्रवक्ता हाथों में पत्थर रख लोगों को पत्थर मारते मिल जाएं तो आश्चर्य न करें .
छत्तीसगढ़ के खरसिया से भाजपा प्रत्याशी जो कलेक्टरी छोड़ कर आया है वह लगभग विक्षिप्त हो चुका है और भरी सभा में लोगों को धमकी दे रहा है कि जो मेरा साथ नही देगा उसे मैं ठिकाने लगा दूंगा और यह पागलपन इसलिए कि प्रत्याशी बनने के साथ ही उसने करोड़ों रुपए के उपहार बांट डाले लेकिन उसे उस हिसाब से समर्थन नहीं मिला , आने वाले विधानसभा चुनाव के बाद लगता है देश में विक्षिप्त लोगों की संख्या में भारी वृद्धि होने वाली है

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