⚫ दिल्ली के एक व्यस्त बाजार वाली बस्ती मालवीय नगर के एक मदरसे के अबोध छात्र अज़ीम की भीड़ द्वारा हत्या की गई है कल, और जानकारों के मुताबिक काफ़ी समय से उस मदरसे के अंदर असामाजिक तत्वो द्वारा साम्प्रदायिक हिंसा कराए जाने का प्रयास जारी था .

26.10.2018 दिल्ली 

साढ़े चार साल से कुछ महिने ज़्यादा गुज़र चुके हैं, लव जिहाद से शुरू हुई कहानी में अचानक मुसलमानो को पाकिस्तान पैक करने का शोर मचने लगा था और असहिष्णुता की परिभाषा को भक्ति ने पुनर्परिभाषित किया और और अवार्ड वापसी गैंग नाम देते हुए कई बुद्धिजीवियों को नृशंष हत्या की गई, जिसके अभियुक्तों ने न विधान, संविधान न विधीय प्रक्रियाओं की अवहेलना की बल्कि न्यायपालिका का उपहास भी किया जैसे कि गत वर्ष माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों का मज़ाक उड़ाते हुए दीवाली को पटाखों और प्रदूषण से दिल्ली को भर डाला क्योंकि धर्म की अफ़ीम मिली आइसक्रीम बिकनी शुरू हुई थी।

अभी दो वर्ष भी नही हुए थे पिंक रिवोल्यूशन के अगुवा वाले देश ने बीफ़ मांस के निर्यातकों वाले देश मे प्रथम स्थान अर्जित किया था कि एक भावना आहत होने वाले समाज नें मुस्लमान होने के नाम पर जगह जगह पूरे देश मे जहां जैसे भी दिल हुआ पीट पीट कर मार डाला और साथ ही मुसलमानो के मारने हत्या करने की घटनाओं को बीडीओ बना कर सोशल मीडिया के ज़रिए राष्ट्रवाद को हर हिन्दू तक पहुंचाया और इंतेहा यह कि न्यायालय के प्रांगण से तिरंगा उखाड़ कर भगवा ध्वज फहराया गया और शम्भू रैगर को भुलै तो नही होंगे ,उसे हिन्दू अस्मिता का नायक बताते हुए उसके बैंक खाते में कहते हैं 25 लाख से अधिक राशि जमा कराई गई। इन सब बदलते परिवेश को न कोई शासन न प्रशासन न क़ानून व्यस्था ने रोकने का प्रयास किया बल्कि और न ही दंडित करने का प्रयास किया। और राजनीतिक महात्माओं की चुप्पी ने जे एन यू में कंडोम ढूंढना शुरू किया था। नए शब्दकोष एक राजनैतिक पतन की मोटी किताब में दर्ज होते गए । सत्ता ,शक्ति और प्रशासन का साथ मिलने के बाद भी हमारे महामानव ह्रदय सम्राट पूजनीय प्रधानमंत्री जी को खान्ग्रेसी नेताओ ने न सिर्फ़ मारने का षड्यंत्र पाकिस्तान के साथ मिलके रचा बल्कि यह भी एहसास दिलाया कि क़ब्रस्तान अगर गांव में है तो श्मशान भी बन सकता है क्योंकि तुष्टिकरण के इंजेकशन के कारण ईद में बिजली मिलती रही लेकिन दीवाली में अंधेरा अब बर्दाश्त नही होगा और उप्र शासन ने संज्ञान लिया और 25 घण्टा बिजली आने लगी थी तभी क्या हुआ कि देश के अलग अलग हिस्सों में जुनैद, पहलू, अख़लाक़, गौ माता की बलि देने की अफवाह के कारण मार दिए गए और सितम तो यह है कि कोई अभियुक्त नही मिल सका, वैसे ही जैसे नजीब का ग़ायब होना जे एन यू से अब सी बी आई के लिए मुअम्मा बन गया कि वो क्लोज़र रिपोर्ट देने को विवश दिखी वही जिसके दो निदेशक लम्बी छुट्टी पर भेज दिए गए हैं।

देश की राजधानी में अभी कुछ दिन गुज़रे हैं जब म्युनिस्पल कॉर्पोरेशन दिल्ली के इस्कूल में हिन्दू और मुस्लिम बच्चों को अलग अलग सेक्शन में बांट कर राष्ट्रवाद की चुस्की देने का शुभारम्भ किया ही गया था कि दिल्ली के एक व्यस्त बाजार वाली बस्ती मालवीय नगर के एक मदरसे के अबोध छात्र अज़ीम की भीड़ द्वारा हत्या की गई है कल, और जानकारों के मुताबिक काफ़ी समय से उस मदरसे के अंदर असामाजिक तत्वो द्वारा साम्प्रदायिक हिंसा कराए जाने का प्रयास जारी था लेकिन पुलिस द्वारा प्राथमिक रिपोर्ट के बावजूद भी कोई उचित कार्यवाही नही की गई।

हम मानते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है लेकिन वर्तमान में इस धर्म जात का या उस धर्म जाति के भेद ने समाज और जानवर को अलग कर डाला है, जिसे अब ग़लत को गलत कहने से भय लगता है या स्वीकारता है वो या फिर हमे अच्छे को भी ग़लत मानने की पूर्वाग्रह ग्रस्त मानसिकता ने जकड़ डाला है।

सभ्यताओं के टकराव ” से आगे हटिंगटन की दूसरी किताब आ चुकी है पढ़िए गा जो नव राष्ट्रवाद की कल्पना को फिर से परिभाषित करने की तरफ इशारा करती हुई महसूस होती है।

अज़ीम अफ़सोस है तुम्हारे क़त्ल पर हम सब की चुप्पी ने हम सबसे जीवित होने का हर लक्षण छीन लिया है, हम सोचते थे हम नागरिक बनने का प्रयास करेंगे जो गणतंत्र में सर्व प्रथम आता है पर हम तो मतदाता बन गए , और अंततः

**

Leave a Reply

You may have missed