एक एक कर पूरे भिलाईवासियों को लील ना ले भिलाई का इस्पात संयंत्र # उत्तम कुमार, सम्पादक दक्षिण कोसल

10.10.2018

छत्तीसगढ़ में स्थित एशिया के सबसे बड़े इस्पात संयंत्र के भिलाई स्टील प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस 8 से कोक ओवन बैटरी नंबर 11 के बीच ई एंड डी द्वारा गैस पाइप लाइप में मरम्मत के दौरान हुए भयानक विस्फोट में जुटे पहले 9 फिर 13 और अब फाइनली 12 लोगों की मौत बताई जा रही है तथा 12 कर्मी बुरी तरह झुलसने के कारण बर्न वार्ड में भर्ती हैं l बताया यह भी जा रहा है कि दुर्घटना के बाद मृत लोगों की संख्या बढ़ सकती हैै। सूत्रों की माने तो गैस पाइप लाइन में ब्लेंकिंग के दौरान पाइप में भरे गैस ज्वलनशील गैस को रोक कर नाइट्रोजन से ठंडा करते समय विस्फोटक गैसीय पाइप के फटने से मौके पर जुटे मजदूर झुलस गए और कईयों की बॉडी कोयले में बदल गई l कईयों की मृत बॉडी परिजनों द्वारा पहचानना मुश्किल हो गया है। अफरा तफरी में लोग मृत शरीर को मर्चुरी में तथा घायलों की बर्न वार्ड में स्वयंसहायता से पहुंचाने में जुटे दिखे l जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय, सेक्टर 9 अस्पताल में स्थिति मातम और गमगीन बना हुआ है।

#दुर्घटननाओं से हम सबक नहीं सीखे

 

यह कोई पहली दुर्घटना नहीं है लेकिन बड़ी घटना है l ‘भिलाई एक मिसाल’ किताब के लेखक और पत्रकार मो. जाकिर हुसैन बताते हैं कि 6 जनवरी 1986 को भिलाई स्टील प्लांट के कोक ओवन में ही ब्लास्ट हुआ था l इस ब्लास्ट में 9 कर्मियों की मौत हो गई थी l जबकि 20 अन्य घायल हुए थे । ये उस दौर का सबसे बड़ा हादसा था । इस हादसे में घायलों के लिए जरूरी दवाइयां रोजना आॅस्ट्रेलिया से मंगाई जाती थीं l इसके लिए आॅस्ट्रेलिया से नियमित विमान से दवा दिल्ली आती थी l फिर भिलाई स्टील प्लांट के प्लेन से दिल्ली से भिलाई लाई जाती थीं l इस हादसे के बाद प्लांट के सेक्टर-9 अस्पताल के बर्न यूनिट को अपग्रेड किया गया था l भिलाई स्टील प्लांट में दूसरा बड़ा औद्योगिक हादसा 12 जून 2014 को हुआ l संयंत्र के ब्लास्ट फर्नेस तीन और चार के सामने वाटर सप्लाई विभाग के पंप हाउस में मरम्मत के दौरान पंप फट गया था । पंप फटने से रिसी जहरीली गैस की चपेट में आने से छह लोगों की मौत हो गई l मरने वालों में दो डिप्टी जनरल मैनजर, एक फायर ब्रिगेड के जवान सहित चार कर्मचारी शामिल थे । 33 अन्य लोग हादसे से प्रभावित हुए थे । भिलाई स्टील प्लांट में तीसरा बड़ा औद्योगिक हादसा 19 अप्रैल 2017 को तब हुआ, जब प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस-4 में मेंटेनेंस के दौरान ब्लास्ट हो गया । इस हादसे में मौके पर ही 4 लोगों की मौत हो गई । जबकि एक अन्य घायल बीएसपी कर्मी की मौत इलाज के दौरान मुंबई में हादसे के दस दिन बाद हुई । औद्योगिक घटनाओं के अलावा भिलाई स्टील प्लांट के इतिहास में एक बड़ा कुदरती हादसा भी हुआ है । 29 मई 1993 को प्लांट के बोरिया गेट के पास कारखाने की दीवार की छांव में कुछ महिला मजदूर खाना खा रही थीं, उसी दौरान तेज आंधी आने से दीवार ढह गई । इस हादसे में 9 महिला मजदूरों की मौत हो गई थी l 12 अप्रैल 2017 को भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रशासनिक भवन (इस्पात) के ऊपरी मंजिल से गिरे अधिकारी डिप्टी मैनेजर रोहित कुमार परगनिहा की पं. जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र सेक्टर 9 में दोपहर बाद मौत हो गई।

#जिन मौतों को गिना नहीं जाता

4 सितम्बर 2017 को केम्प क्षेत्र के बीएसपी मकानों की सीवर सफाई में लगें कामगार बिशेसर मार्कण्डेय उम्र 38 की अचानक तबियत बिगड़ जाने से मौत हो गई । प्रबन्धन की लापरवाही से हुई ठेका श्रमिक की मौत । संयंत्र की दुर्घटना में महेश कुमार साहू, उम्र 36 साल, ग्राम पतौरा निवासी की रात्रि पाली ड्यूटी के दौरान ब्लास्ट फर्नेस 7 में एसजीपी में एम 21 के इलाइमेन्ट के दौरान लगभग 11: 20 को जर्जर टेलफर के उसके ऊपर गिरने से घटना स्थल पर ही मौत हो गयी, जिसे मेन मेडिकल ले जाने पर मौत की पुष्टि की गई | पूर्व में भी घटना घटने के बावजूद प्रबन्धन चेता नही था
ऐसी ही घटना डेढ़ वर्ष पूर्व भी रात्रि पाली में घटी थी जिसमे कोई हता हत नही हुआ था | उसके बावजूद सुरक्षा अदिकारियों की लापरवाही तथा प्रबन्धन की सुरक्षा के प्रति गैरजिम्मेदाराना रवैये से आज एक ठेका श्रमिक की मौत हो गयी | जर्जर टेलफर की लिखित शिकायत पूर्व में की जा चुकी थी उसके बावजूद प्रबन्धन ने इस ओर कोई ध्यान नही दिया |

#क्या है प्लांट का इतिहास 

इस संयंत्र की स्थापना सोवियत संघ की सहायता से 1955 में हुई थी।इस कारखाने की स्थापना दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61)के अंतर्गत की गई थी।दस बार देश का सर्वश्रेष्ठ एकीकृत इस्पात कारखाने के लिए प्रधानमंत्री ट्रॉफी प्राप्त यह कारखाना राष्ट्र में रेल की पटरियों और भारी इस्पात प्लेटों का एकमात्र निर्माता तथा संरचनाओं का प्रमुख उत्पादक है। देश में 260 मीटर की रेल की सबसे लम्बी पटरियों के एकमात्र सप्लायर, इस कारखाने की वार्षिक उत्पादन क्षमता 31 लाख 53 हजार टन विक्रेय इस्पात की है। यह कारखाना वायर रॉड तथा मर्चेन्ट उत्पाद जैसे विशेष सामान भी तैयार कर रहा है। भिलाई इस्पात कारखाना आईएसओ 9001:2000 गुणवत्ता प्रबन्धन प्रणाली से पंजीकृत है। अतः इसके सभी विक्रेय इस्पात आईएसओ की परिधि में आते हैं । भिलाई के कारखाने, इसकी बस्ती और दल्ली खानों को पर्यावरण प्रबन्धन प्रणाली से सम्बन्धित आईएसओ 14001 भी प्राप्त है। यह देश का ऐसा एकमात्र इस्पात कारखाना है जिसे इन सभी क्षेत्रों में प्रमाणपत्र मिला है। कारखाने को सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने के लिए एसए: 8000 प्रमाणपत्र और व्यावसायिक स्वास्थ्य तथा सुरक्षा के लिए ओएचएसएएस-18001 प्रमाणपत्र भी प्राप्त है। इन अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रमाणपत्रों के कारण भिलाई के उत्पादों का महत्व और भी बढ़ जाता है तथा इस्पात उद्योग में इसकी गणना सर्वश्रेष्ठ संगठनों में की जाती है। भिलाई को अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है तथा इसे लगातार तीन वर्ष सीआईआई-आईटीसी सस्टेनेबिलिटी पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

#प्रबंधन की कार्यवाही

सूत्रों के मुताबिक प्लांट के इतिहास में यह बड़ी दुर्घटना है । हालांकि अभी विस्फोट होने के कारणों के बारे में अधिकृत खुलासा नहीं हुआ है। हादसे की जानकारी मिलते ही प्लांट के आला अधिकारी सहित कलेक्टर उमेश अग्रवाल, आईजी जीपी सिंह, एसएसपी संजीव शुक्ला सेक्टर 9 अस्पताल जायजा लेने के लिए पहुंचे। गौरतलब है कि भिलाई स्टील प्लांट में कई वर्षों से मेंटेनेंस सहित उत्पादन संबंधित कार्यों को निजीकरण के तहत निजी हाथों में दिया जा रहा है जिसके परिणाम स्वरूप अक्सर सवाल उठते रहे हैं तथा दुर्घटनाओं को छुपाने का प्लांट प्रबंधन पर आरोप भी लगते रहे हैं l सूत्रों की माने तो पुराने प्लांट में ऐसी दुर्घटना नहीं दिखी लेकिन नये प्लांट, मशीनरी के साथ उसके निर्माण और स्थापना को लेकर उसके गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए । स्टैंडर्ड, मशीनरी, आपरेशन तथा फेब्रिकेशन पर किसी का ध्यान नहीं हैं दूसरी ओर सेल का निजीकरण,जनविरोधी ,मजदूर विरोधी ,राष्ट्र विरोधी नीति ऐसे दुर्घटनाओं को दावत दे रहे हैं ।

#दुर्घटना के पीछे का कारण

दरअसल मोदी सरकार श्रम कानूनों में बदलाव करने जा रही है । जिसमें नया श्रम कानून तीन पुराने श्रम कानूनों, इंडस्टिरियल एक्ट 1947, ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 और इंडिस्टियल एक्ट 1946 की जगह लेगा । अब सवाल है कि यदि ये कानून बन गया तो क्या होगा? वर्तमान में राज्य सरकार के वेतन बढोत्तरी को बीएसपी के ठेकेदार और औद्योगिक क्षेत्र के पूंजीपति कोई नही मान रहे हैं आज भी एसीसी को छोड़ कोई भी कंपनी मे मजदूरों को 180 से 200 रुपया तक मिलता है 8 घंटे का 12 घंटे का 250 रुपया 350 रुपया कोई ठेकेदार पूंजीपति देने को तैयार नहीं है काम करो 350 रुपया मंगोगे तो काम बंद धमकी चल रहा है । भिलाई इस्पात संयंत्र और औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 1लाख 50 हजार के आस पास मजदूर काम करते हैं बाकी और जगह काम करने वाले मजदूरों का तो कोई माई बाप नहीं है अब उद्योगपति का दबाव चल रहा है 350 रुपया नहीं दे सकते । वेज को पक्का राज्य सरकार फेरबदल करेगा क्योंकि पूंजीपति आने वाले चुनाव मे चंदा नहीं देंगे मशीनीकरण कि धमकी चल रही है और वैसे भी मशीनीकरण को ही प्राथमिकता दी जा रही है, नियोगी की बात याद आता है जो दल्लीराजहरा मे किया था अर्धमशीनीकरण हो, मजदूरों के हाथ को काम मिलता रहे, आज मजदूरों के उपर भयंकर खतरा मंडरा रहा है क्योंकि पूरी तरह से छटनी के आग में मजदूरों को धकेलने वाले हैं ।

#क्या हैं ये नए कानून

(1) मोटर ट्रांसपोर्ट वर्क्स एक्ट 1961 (2) पेमेंट ऑफ़ बोनस एक्ट 1965, (3) इंटर स्टेट वर्कमेंन एक्ट 1979, (4) बिल्डिंग्स एंड कंस्ट्रक्टशन एक्ट 1996 इससे कर्मचारियों को नौकरी से निकालना आसान हो जाएगा। (2) यूनियन बनाना मुश्किल हो जाएगा, न्यूनतम 10 फीसदी या 100 कर्मचारी की जरुरत होगी । जहां पहले 7 कर्मचारी मिलकर यूनियन बना लेते थे वहां अब 30 कर्मचारियों की जरुरत होगी (3) एक माह में ओवर टाइम की सीमा 50 से बढ़ाकर 100 घंटे करना गलत है क्योकि इसका भुगतान डबल रेट में ना होकर अब सिंगल रेट में होगा । जब कानून में ही 100 घंटे का प्रवधान हो जाएगा तो मजदूरों को 8 घंटे के जगह 12 घंटे की नियमित ड्यूटी हो जाएगी (4) फेक्टरी के मालिकों को अब ज्यादा अधिकार मिल जाएंगे कोर्ट जाने का अधिकार खत्म हो जाएगा (5) मौजूदा 44 श्रम कानूनों को ख़त्म करके 4 कर दिया जाएगा (6) यूनियन में बाहरी लोगो पर रोक लगा दी जाएगी (7) अप्रेंटिश एक्ट में एक तरफ़ा बदलाव कर 2 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया जाएगा ।

#कानून कितना खतरनाक

यह कानून इतना खतरनाक है यदि इसका विरोध नहीं किया गया और ये बन गया तो बहुत ही बुरे हाल हो जायेंगे । मजदूरों, कर्मचारियों क लिए ये सब इसलिए किया जा रहा है क्योंकि देश में विदेशी निवेश होगा और विदेशी कंपनिया कहती हैं कि भारत के 44 श्रम कानून बहुत ही जटिल और मजदूर हितैषी है । पहले आप इनको खत्म करो फिर हम भारत आएंगे । इसलिए मोदी सरकार ये कदम उठा रही है और एक बार फिर भारत को गुलाम बनाने की पहल की गई है । और वह दिन दूर नहीं जब एक एक कर पूरा भिलाई ऐसे किसी बड़े भोपाल गैस त्रासदी की तरह मौत के मुंह समा ना जाए । होशियार रहे!

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उत्तम कुमार ,वरिष्ठ पत्रकार और दक्षिण कोसल के संपादक

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