गुजरात ःः 14 माह की बच्ची का बलात्कार और प्रांत वाद : जिग्नेश मेवानी .

प्रेस नोट ःः 

 

8.10.2018

जिस गुजरात में भाजपा सरकार स्टेच्यू ऑफ यूनिटी खड़ा कर रही है वहीं हमारे देश की एकता और अखण्डितता तो तहसनहस करने की चाहत राखनेवाले कूछ प्रांत वादी लोग यूपी-एम.पी.-बिहार के भाई बहनों पर हमला बोल रहे है। गुजरात से निकली प्रांत वाद की आग आगे फैले उसके पहले ही उसे रोक देना चाहिए। पिछले दिन गुजरात के साबरकांठा जिले के हिम्मत नगर में 14 माह की एक बच्ची पर बलात्कार किया गया। स्वाभाविक है कि इस घटना के गहरे प्रत्याघात पड़े। बलात्कार का इल्जाम है बिहार के शख्स पर  14 माह की बच्ची पर कहर बरसानेवाले बलात्कारियों को निर्विवाद रुप से सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए, लेकिन नालियाकांड का रिपोर्ट दबा कर बैठी भाजपा सरकार के बजाय प्रांतवादी मानसिकता से पीडित कूछ लोग अपना गुस्सा यूपी, बिहार और मध्यप्रदेश के गरीब मज़दूरो पर निकाल रहे है जो बेहद शर्मनाक है। सुनकर की माथा घूम रहा है।

 

आज लगातार चौथे दिन यूपी और बिहार के मजदूरों पर हमला किया गया है और बिगड़ते हालात देखकर यह आंतरराज्य प्रवासी मजदूर अपने बोरियां बिस्तरा बांध कर अपने अपने वतन वापस लौट रहे है। गुजरात के लिए यह एक शर्म का विषय है। प्रांत वाद का बी बोनेवाले किसी को भी बख्शा नहीं जाना चाहिए। में आज ही इस मामलें में गुजरात के डीजीपी(डिरेकटर जनरल ऑफ पुलिस) , चीफ सेक्रेटरी और देश के होम मिनिस्टर राजनाथसिंह की ऑफिस में बात करके वह तुरंत मामले में हस्तक्षेप करें यह डिमांड करनेवाला हूं। यह भी मांग करनेवाला हूं कि पूरे मामले में बलात्कार के आरोपी के साथ साथ जिन प्रांत वादी गुंडों ने इन प्रवासी मजदूरों पे हमलें किए है उनके खिलाफ भी सख्त करवाई होनी चाहिए। बिहार , यूपी और मध्यप्रदेश की सरकारो को भी गुजरात के मुख्यमंत्री से इस मामले में रिपोर्ट मांगना चाहिए।

किसी भी जाति या धर्म की महिला या बच्ची के साथ यह हरकत नही होनी चाहिए, किसी कीमत पर नहीं। यदि इस प्रकार की कोई वारदात होती है तो उसके खिलाफ सख्त करवाई होनी चाहिए, लेकिन कसूरवार की जाती खोज निकालकर उसके समाज के लोगों को टार्गेट करना हरगिज़ नहीं चलेगा। जिन यूपी, बिहार और एम.पी. के मजूदरों पर गुस्सा निकाल कर उन्हें भगाया जा रहा है वह मजदूर गुजरात के और पूरे देश के अर्थतंत्र में बड़ा योगदान देते है। यह वही मजदूर है जो निर्माण मजदूर के तौर पे अहमदाबाद में फलाय ओवर खड़े करते है और तपती धूप में ईंटो के भट्ठों में पसीना बहाकर निर्माण के लिए ईंटें पैदा करते है। यह वही मजदूर है जिनके खून पसीने से गुजरात के कारखाने चलते है और जिन की महनत से गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय की दिवारों पर रंगरोगान होता है।

प्रांत वादी मानसिकता से चलते इस प्रकार इन प्रवासी मजदूरों को खदेड़ देना गुजरात की संस्कृति कभी नहीं रही। गुजरात के लाखों लोग आज काम धंधे के लिए मुम्बई में और USA में रहते है। वहां सालों से काम करते है, छोटे बड़े बिज़नेस करते है। कल को यदि हमारे इन गुजराती भाई बहनों को पर प्रांतिय या विदेशी बताकर अपने बच्चों और सामान के साथ वहां से खदेड़ दिया तो हम गुजरातवासियों को कैसा लगेगा? भारत माता की जय का नारा लगानेवाले यह लोग एक ही मा के संतानो में यह भेदभाव खड़ा करेंगे? क्या यह हमारी संस्कृति है ? जब हम जन गण मन अधिनायक जय है गाते है तब क्या हम यह नहीं गाते की ‘ पंजाब सिंधु गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंगला’ ?

हम और हमारा संगठन ‘राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच’ गुजरात में सालों से रहते और मजदूरी के लिए आए आंतर राज्य प्रवासी मजदूरों के हो रहे प्रांत वादी उत्पीडन के खिलाफ है और इन मजदूरों को आस्वस्थ करते है के आप पे हो रहे हर हमले के खिलाफ हम खड़े रहेंगें। यह भी कहना चाहते है कि लोकल एम्प्लॉयमेंट ( स्थानिक रोजगार ) के नाम पर आंतर राज्य प्रवासी मजदूरों को भगाने के बजाय गुजरात और बिहार दिनों के मजदूरों को ठेका प्रथा के खिलाफ मोर्चा खोलकर मालिक वर्ग और दमनकारी गुजरात की भाजपा सरकार के खिलाफ संघर्ष करना चाहिए।

यह मुल्क दलित का भी है, बिन दलित का भी है, हिंदू का भी है मुसलमान का भी है, गुजराती का भी है और बिहारी का भी है। प्रांत वाद मुर्दाबाद, भारत की विभिन्न संस्कृतियों का समन्वय जिंदाबाद।

जिग्नेश मेवानी, कन्वीनर , राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच और विधायक वडगाम, गुजरात।

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