अब_गुजरात_में_प्रवासी_हुआ_हिन्दुस्तान !! ःः  यह एक्ट करने का समय है ; खामोशी महंगी पड़ जाएगी. -बादल सरोज 

07.10.2018

न जाने किन किन ने कहा था कि मत बाँटो। मत बांटो हिन्दुस्तान को। खतरनाक खेल है, जिसने भी खेला है वह साबुत नहीं बचा है। एक बार विभाजन की भट्टी सुलग गयी, “हम” और “वो” की भाषा वर्तनी में आना शुरू हो गयी तो बात फिर हिन्दू मुसलमान तक नहीं रुकेगी। भट्टी धधकेगी, ज्वाला भड़केगी और धू धू करके आग वहां से भी उठेगी जहां कभी सपने में भी नहीं सोचा गया था।

● मगर चिता की अग्नि में वोट के खीर-मालपुये सेंकने वाले अम्बानी के भाँड़ों और हिन्दुत्व के सांड़ों को सत्ता की तरावट – भले वह तरावट कौमी एकता की क्षत-विक्षत होती धमनियों से रिसते लहू की क्यों न हो – के सिवा कुछ दिख ही नहीं रहा था/है।

● हिन्दू-मुस्लिम से अगड़े-पिछड़े फिर सवर्ण-अवर्ण और महिला-पुरुष होते हुए अब आग मुम्बई से गुजरात पहुँच गयी है। गुजराती “हम” हो गए हैं – एमपी-यूपी-बिहारी सारे हिन्दीभाषी हिन्दू “वे” हो गए हैं। खदेड़े जा रहे हैं – पीटे जा रहे हैं !!

● टीवी चैनलो में गुजरात में हिंसा के शिकार हिंदी-भाषियों को “प्रवासी” बताया जा रहा है। वो जो अटक से कटक – कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक हुआ करता था – “हम” और “वो”की वर्तनी उसे नित नए नाम पर चीरकर अलहदा कर रही है।

● क्या गुजरात में भी बात यही तक रुकेगी ? क्या गारंटी है कि बाद में यह “हम” कच्छ, और “वो” सौराष्ट्र, काठियावाड़ तक नहीं जायेगी ? पटेल-क्षत्रिय-वैष्णव-शैव-सिन्धी तक नहीं पहुंचेगी ?
ये कहाँ लाकर खड़ा कर दिया हिन्दुस्तान ?

● उन्हें माल्याओं-चौकशियों-छोटे, मंझले, संझले मोदियों की तिजोरियां भरने से फुरसत नहीं है। उनके अजेंडे पर भारत नहीं है। आप ही इस हिन्दुस्तान को बचाइए !! इसके लिए भी- फिलहाल- वे ही चार ऑप्शंस हैं : (1) वाम+ की ताकत बढाना (2) भाजपा को हराना, (3) भाजपा को हराना, (4) भाजपा को हराना

● यह एक्ट करने का समय है ; खामोशी महंगी पड़ जाएगी ।

बादल सरोज ,माकपा के वरिष्ठ नेता 

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