मानव अधिकार कार्यकर्ता : 5 याचिकाकर्ताओं का प्रेस वक्तव्य :  रोमिला थापर व अन्य बनाम : भारत सरकार व अन्य.

 

28.09.2018

भारत का उच्चतम न्यायालय  (निर्णय 28 सितंबर 2018)

पांच मशहूर वकील, पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को देश में अलग- लोग से हिस्से UAPA के आतंकवादी कार्यवाही में मदद पहुंचाने के आरोप में अब 28 अगस्त को गिरफ्तार किया गया तो हम उच्चतम नयायालय तक गए।

हमारा इरादा अदालत का ध्यान इस बात की ओर खींचना था कि यह UAPA जैसे नृशंस कानून का खुला दूरपयोग है। हमारे गणतंत्र के इतिहास इस बात का गवाह है कि अगर चौकसी न कि गई तो भारतीयों के अधिकारों पर हमला होता रहेगा।

28 अगस्त की रात को जो लोग गिरफ्तार किए गए उन पर आतंकवादी कार्यवाही में लिप्त होने का आरोप लगाया गया है। इसके उलट हमारा विचार है कि दो तरह के आतंकवाद है दोनों ही हमारे जनतंत्र की बुनियाद को भय पैदा करके कमजोर करते हैं।

1. जिन्हें आतंकवादी कहा जाता है उनके द्वारा बम या दूसरे हिंसक कृत्य या दूसरों को हिंसा के लिए उकसाने व भय पैदा करके आतंक फैलाना।

2. राजकीय संस्थाओं और अधिकारियों के गैर कानूनी अनुचित कृत्य जो हिंसा में संलिप्त लोगों की पहचान करने की जगह अपनी शक्ति का दुरपयोग करके सरकार से असहमत लोगों को परेशान करते हैं।

राज्य जब बिना पर्याप्त सबूत के उन लोगों के खिलाफ आतंकविरोधी कानूनों का इस्तेमाल करता है, तब वह एक तरह का आतंक फैला रहा होता है। 28 अगस्त को जिस तरह गिरफ्तारियां हुई उससे हमें चिंता होती है। इसका मतलब यह है कि पुलिस कभी भी बिना वारंट या हमें समझ में ना आने वाली ज़वान में कागजात लेकर हमारे घर घुस सकती है और हमें गिरफ्तार कर सकती है और हम पर ऐसी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप लगा सकती इनके बारे में हमें कुछ मालूम नही हो।

वास्तविक जनतंत्र में सरकार से भिन्न मत रखने वालों के कानूनी अधिकारों का सम्मान किया जाता है चूंकि ये गिरफ्तारियां जून में इसी तरह की गिरफ्तारियों के बाद हुई हैं इनसे इन अधिकारों पर लगातार हमले का प्रमाण मिलता है।

हमारी याचिका उच्चतम न्यायालय यह अपील की गई थी कि अधिकारों के इस क्षरण को रोके और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा करे। आज के फैसले ने इन कार्यकर्ताओं ko 4 सप्ताह के लिए सुरक्षा दी है और उन्हें उपयुक्त अदालतों से राहत लेने का मौका दिया है। न्यायमूर्ति डॉ चंद्रचूड़ के अल्पमत निर्णय ने हमारे स्टैंड को सही ठहराया है। अंदाज़ अनुमान के आधार पर किसी की स्वतंत्रता seemit नही की जा सकती। पुलिस असत्य का सहारा ले रही है और मीडिया ट्रायल के जरिये कार्यकर्ताओं को बदनाम कर रहीं है
जैसा न्यायमूर्ति Chandrachood ने कहा है कि ऐसी स्थित में पुलिस की स्वतंत्र, सही और निष्पक्ष जांच में गहरा संदेश है।

हम याचिकाकर्ताओं को तसल्ली है कि कम से कम अभी के लिए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की स्वतंत्रता और सम्मान सुरक्षित है और उच्चतम न्यायालय ने उसकी हिफाजत की है।

हस्ताक्षर ,

दिल्ली 28 सितंबर 2018
1.रोमिला थापर
2. देवकी जैन
3. प्रभात पटनायक
4. सतीश देशपांडे
5.माया दारूवाला

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