रायपुर : मनरेगा के तहत राज्य में नही मिल रहा 150 दिनों का रोजगार, मजदूरी भुगतान भी सालों से लंबित । जनजातीय अधिकार मंच ने दिया धरना.

26.09.2018: रायपुर 

जनजातीय अधिकार मंच के बैनर तले आज दिनांक 26 सितंबर 2018 को रायपुर के बूढा तालाब स्थित धरना स्थल में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन आयोजित कर
महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा ) के तहत 150 दिनों के रोजगार और समय पर भुगतान की मांगों को उठाया।

राजनांदगाँव, रायगढ़ , जांजगीर और कांकेर जिले से आये ग्रामीणों ने बताया कि राज्य में 150 दिनों के रोजगार देने का वादा राज्य सरकार सरकार द्वारा किया गया परंतु सच्चाई यह हैं कि आज भी गांव में 20 से 30 दिनों का ही काम मिल पा रहा हैं । इसमे भी सबसे बड़ी परेशानी हैं कि काम का भुगतान समय पर नही होने से लोग स्वयं ही काम पर जाने से इनकार करने लगे हैं।

राजनादगांव के मानपुर विकासखंड के पंचायत माण्डरी के दुर्योधन ,और गजरु ने बताया कि 85 परिवारों का 2017 के रोजगार का भुगतान आज तक लंबित हैं। प्रमिला बाई ने कहां की सरकार गरीबों का भुगतान करें। अधिकारियों के पास कई बार गुहार लगाने के बाद भी काम का भुगतान नही किया गया।

जनजातीय अधिकार मंच के केशव शोरी ने कहा कि कानून के नियमानुसार कार्यस्थल पर ही मस्टर रोल भरने की अनिवार्यता हैं परंतु कांकेर जिले के कई ऐसे गांव हैं जहां मस्टर रोल कार्य स्थल पर नही भरा जा रहा हैं। इससे मनरेगा में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा हैं।

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुकला ने आरोप लगाते हुए कहा कि कल्याणकारी विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी भ्रष्टचार हैं। पूरे प्रदेश में मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण कानून का क्रियान्वयन ठप्प पड़ा हुआ हैं जिसका नतीजा है की काम के तलाश में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रो के परिवार विशेष रूप से युवा पलायन के लिए मजबूर हैं। राज्य सरकार ने विकास यात्रा के लिए जिस प्रकार से पूरे प्रशासन को झोंक दिया हैं ठीक इसी प्रकार योजनाओं के क्रियान्यवयन में प्रशानिक दवाब होता तो विकास यात्रा निकालने की जरूरत नही पड़ती।

रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के कापू क्षेत्र से आये शैलेश टोप्पो ने कहा कि मनरेगा के कार्यो की जानकारी की लिखित सूचना गांव में चस्पा नही की जाती जिससे ग्रामीण जानकारी के अभाव में भी काम से वंचित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि, सिचाई, भूमि विकास जैसे प्राथमिकता के विपरीत मिट्टी, मुरुम रोड जैसे कार्यो को प्रतिवर्ष कराया जा रहा हैं जो हर वारिश में क्षति ग्रस्त हो रहा हैं और गांव में कोई संसाधन भी तैयार नही हो पा रहा हैं। कार्यस्थल पर मस्टररोल समय पर नही भरी जा रही है लोगों के जॉब कार्ड खाली पड़े हुए है जरूरत के आधार पर कार्यो की योजना और भुगतान नही होने के कारण लोगों का रुझान भी इसके प्रति कम होता जा रहा है .

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