पत्थलगांव : पांचवी अनुसूची पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित .

 


पत्थलगांव: 21 सितंबर 2018

आशादीप के सभागार में पांचवी अनुसूची पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया था। जीवन विकास मंत्री के 25 वर्षीय वंचितों की सेवा को रेखांकित करने के लिए इस सेमिनार का आयोजन किया गया था। इसमें क्षेत्र के ढाई सौ से ज्यादा ग्रामीणों ने सक्रिय भाग लिया। संस्था के अध्यक्ष कल्यानुस मिंज ने दीप प्रज्वलित कर सेमिनार का शुभारंभ किया ।अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने संस्था द्वारा वंचितों की सेवा का जिक्र किया। उन्होंने संस्था के प्रारंभिक कार्यकर्ताओं को बधाई दी जिन के अथक प्रयास से इस संस्था की स्थापना हो सकी ।

इस संस्था का उद्देश्य वंचितों की सेवा करना उन्होंने प्रथम उद्देश्य बतलाया। उन सभी कार्यकर्ताओं को उन्होंने बधाई दी जिन्होंने संस्था के विकास और लोगों की सेवा के लिए काम किया । उन्होंने पांचवी अनुसूची की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा के आदिवासियों की रक्षा के लिए पांचवी अनुसूची एक कारगर उपाय है जिसका उपयोग करते हुए आदिवासी अपने आदिवासियत, जल जंगल, जमीन की रक्षा कर सकते हैं इस्टानिस्लास तिर्की ने अपने की नोट ऐड्रेस में प्रदेश की वर्तमान स्थिति को प्रस्तुत किया और प्रदेश की प्रमुख समस्याओं को श्रोताओं के सामने रखा । जैसे विस्थापन पलायन एवं मानव तस्करी सिमटता आदिवासी क्षेत्र एवं जनसंख्या को आदिवासी चुनौतियों के रूप में प्रस्तुत किया और उनके समाधान के उपाय भी उन्होंने सुझाया।

 

सेमिनार के प्रमुख वक्ता विजय भाई ने पांचवी अनुसूची की पृष्ठभूमि एवं इतिहास पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने पांचवी अनुसूची से संबंधित संविधान के पूर्व के कानूनों की चर्चा की और उनका संदर्भ संविधान की धाराओं से जोड़ करके दर्शकों को संदर्भ प्रस्तुत किया। विजय भाई ने भी कई आदिवासी समस्याओं का जिक्र किया एवं कानूनी पहलुओं के द्वारा किस प्रकार उनका समाधान किया जा सकता है की जानकारी दी। बछरांव सिहरडाँड़, भुटुंगा के कुछ प्रतिनिधियों ने पांचवी अनुसूची के बारे अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया कि किस प्रकार उन्हें पत्थरगढ़ी के नाम से कानूनी व सामाजिक यातनाएं सहनी पड़ी। एक महिला ने अपनी आप बीती बातों को दर्शकों को साझा किया कि किस प्रकार अपने पति की अनुपस्थिति में उन्हें पारिवारिक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। आशीष बेक ने पांचवी अनुसूची और संबंधित कानूनों की जानकारी दर्शकों को दी। सेमिनार के अंत में ग्राम सभा के माध्यम से पेसा और वन अधिकार कानूनो तहत आदिवासी अधिकारों को पाने के लिए काम करने की एक सामूहिक कार्य योजना बनी।
धन्यवाद ज्ञापन हेनरी लकड़ा ने किया। याकूब। कुजूर ने सेमिनार का संयोजन किया.

**

Leave a Reply

You may have missed