भूपेश ने मारा …….गिरफ्तारी के बाद सरकार के रणनीतिकार अपना सिर धुन रहे हैं.

 

25.09.2018/ रायपुर 

किसान हो। चाहे मजदूर हो। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हो। शिक्षाकर्मी हो या फिर सरकारी कर्मचारी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उनकी तबाही की पटकथा लिखने वाले अफसरों को शायद यह भ्रम था कि लाठी-गोली-डंडे-पुलिस और कोर्ट-कचहरी के दम पर वे भूपेश बघेल को डरा लेंगे, लेकिन सरकार को यह दांव उल्टा पड़ गया। सोमवार को जब बघेल कोर्ट में पेश हुए तब उनसे कहा गया कि वे जमानत लें ले… लेकिन उन्होंने कहा- जमानत किस बात की? जब वे निर्दोष है तो जमानत क्यों लेंगे?

वे चाहते तो जमानत लेकर अपना दौरा करते रहते… लेकिन उन्होंने जेल जाना तय किया। उनके इस फैसले को भाजपा के नेता ड्रामेबाजी कह रहे हैं, लेकिन भाजपा नेताओं को इस बात के लिए भी सांप सूंघ गया है कि मंत्री की कथित सीडी कांड मुख्य आरोपी तो भाजपा का एक नेता मुरारका ही है। समंस मिलने के बाद कांग्रेस के नेता तो बकायदा कोर्ट में गए…. लेकिन भाजपा नेता फरार हो गया।

बहरहाल बघेल की गिरफ्तारी के बाद सरकार के रणनीतिकार अपना सिर धुन रहे हैं। खबर है कि इस गिरफ्तारी को लेकर रणनीतिकारों की एक बैठक भी आनन-फानन में हुई है। चर्चा है कि मुखिया ने एक अफसर को उलझा देने वाला सुझाव देने के लिए बुरी तरह लताड़ा भी है। बिलासपुर की लाठी चार्ज की घटना के बाद भूपेश की गिरफ्तारी सरकार के लिए परेशानी का सबब बन गई है। भूपेश के डटकर अडे रहने और जेल जाने के फैसले से लोगों के बीच यह संदेश भी चला गया है कि दमन का मुकाबला करने के लिए ठोस इरादे की जरूरत होती है। जो भी हो भूपेश ने सरकार के गाल जोरदार तमाचा तो रसीद कर ही दिया है।

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