छत्तीसगढ़ में भाजपा की हालत पतली. अधिकांश सर्वे का लब्बो- लुआब यही है कि इस बार भाजपा 20 सीट पर सिमट सकती है.

19.09 .2018

विक्रम वरदराजन @ रायपुर

कोई इसे माने या न माने… लेकिन यह एक सच्चाई है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की हालत बेहद पतली हो गई है। छत्तीसगढ़ में भाजपा किस पोजीशन में रहेगी इसे लेकर कई सर्वे हो चुके हैं और ज्यादातर सर्वे में यहीं तथ्य सामने आया है कि छत्तीसगढ़ से भाजपा का बुरी तरह से सफाया होने जा रहा है। अधिकांश सर्वे का लब्बो- लुआब यही है कि इस बार भाजपा 20 सीट पर सिमट सकती है।

प्रदेश में विधानसभा की 90 सीटें है। अभी तो बहुमत भाजपा का ही है, लेकिन पिछले चुनाव कांग्रेस के कुछ प्रत्याशी प्रत्याशी बेहद कम सीटों पर हारे थे। पूरे चुनाव में भाजपा कांग्रेस से केवल 70-80 हजार वोट से ही आगे थीं। राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि अगर कांग्रेस के एक बड़े नेता ने भाजपा के साथ मिलकर 10 सीटों पर एक समाज विशेष के प्रमुख के लोगों उम्मीदवार नहीं बनाया होता तो बाजी पलट चुकी थीं। इस बार भी भाजपा गुणा- भाग से चुनाव जीतना चाहती है लेकिन जनता का जो मूड दिखाई दे रहा है वह भाजपा के खिलाफ ही है। भाजपा नेताओं को सम्मेलन में भीड़ जुटाने के लिए अफसरों का सहारा लेना पड़ रहा है। सरकार की जितनी भी चमकदार योजनाएं थीं उनको पलीता लग चुका है।

यह सही है कि पैकेज से अटे पडे़ छत्तीसगढ़ के के अधिकांश अखबार और चैनल के लोग जमीनी हकीकत नहीं दिखाएंगे…. मगर सच्चाई यही है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की लुटिया डूबने जा रही है। सत्ताधारी दल से जुड़े अनेक कद्दावर लोग यह मानकर चल रहे हैं कि सरकार में बैठे लोगों के घमंड, छत्तीसगढ़ को चूस- चूस कर घर भरने की प्रवृत्ति और दिन-प्रतिदिन आवाम के ऊपर बढ़ रहे दमन और अत्याचार ने भाजपा को जनता से दूर कर दिया है। माना जा रहा है कि अब सरकार लोगों को कितना भी चावल, दाल चप्पल-जूता बांट लें उसका असर नहीं होने वाला है। अपनी सीटों को बचाने के लिए भाजपा छत्तीसगढ़ फिल्म के हीरो- हिरोइन, कवि, भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अफसरों को चुनाव में उतारना चाहती है। सूत्रों का दावा है कि इस बार पार्टी लगभग 30 सीटों पर एकदम नए प्रत्याशी को उतारकर बेड़ा पार लगना चाहती है, लेकिन ऐसा लगता नहीं है कि जनता बेड़ा पार होने देगी।

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