अगर सरकार नहीं बदली तो… अगली बार घर में घुसकर मारेंगे वो…… विक्रम वरदराजन की खास टिप्पणी

19.09.2018

ये वो कौन है? वो मतलब भगवा कलर की पार्टी वाले. .. उनसे जुड़े लोग… पुलिस के नाकारा अफसर, बच्चों औरतों पर हमला करके खुद को बहादुर समझने वाले टुच्चे लोग।

ये वो है जो अंध भक्त है। ये वो है जो पेट्रोल का दाम बढ़ जाने बाद भी कहते फिर रहे है कि राष्ट्र तरक्की कर रहा है।

लोकतंत्र में विरोध का अधिकार हर किसी को है, लेकिन भाजपा विरोध करने वालों को दुश्मन समझती है। बिलासपुर में कांग्रेसियों पर लाठीचार्ज का जो वीडियो वायरल हो रहा है उसने समाज के एक बड़े वर्ग को विचलित कर दिया है। इस घटना के बाद लोग यह कहने को मजबूर हो गए है कि अगर सरकार नहीं बदली गई तो अगली बार ये लोग कान में मू………गें और विरोधियों को घर में घुस-घुसकर मारेंगे।

कांग्रेस के लोगों ने क्या गलत किया? लोगों को गूडाखू बेचकर कैंसर बांटने वाले मंत्री के घर के बाहर कचरा ही तो फेका था। लोकतंत्र में ऐसा विरोध कई बार देखा गया है। कई बार ऐसा हुआ है, लेकिन नहीं साहब….. शहर को जगह- जगह गड्ढे में बदल देने वाले मंत्री को यह बात बुरी लग गई और पुलिस ने कांग्रेस कार्यलय के भीतर घुसकर कांग्रेसियों को पीट दिया।

कांग्रेसियों की पिटाई का वीडियो जारी हुआ तो चौतरफा किरकिरी होने लगी…. लेकिन बिलासपुर और रायपुर के कुछ चड्डीधारी पत्रकार लग गए अपनी ड्यूटी बजाने में ( ऐसे ड्यूटी बजाने वाले पत्रकारों को हर महीने खास तरह का पैकेज मिलता है। चक्कर यह है कि ऐसे पत्रकारों और उनके पैकेज को पत्रकारिता जगत का बच्चा-बच्चा जानता है। )

अब वहीं पुराना राग अलापा जा रहा है कि जोगी ने नंदकुमार साय के साथ क्या किया था? पिछले 15 सालों से भाई लोग अपनी करतूतों पर पर्दा डालने के लिए जोगी का नाम लेते रहे है।

अरे…. जोगी ने जो किया सो किया
तुम क्या कर रहे हो ये बताओ?

बस्तर में निर्दोष आदिवासियों को माओवादी बोलकर मार रहे हो? अपनी मांगों को लेकर अगर किसान सड़क पर उतर रहा है तो उस पर लाठीचार्ज कर रहे हो? कोई मुख्यमंत्री निवास के सामने पेट्रोल छिड़ककर मर रहा है तो कोई थाने में मारा जा रहा है।

कोई अत्याचार कब करता है?
अत्याचार और दमन तब बढ़ता है जब सत्ता घमंड से भर जाती है। सरकार के मुखिया और उनके आसपास रहने वाले अफसर प्रदेश की किस तरह से वाट लगा रहे हैं यह किसी से छिपा नहीं है।

दरअसल इस लाठीचार्ज की एक खास वजह है। वजह यह है कि सरकार ऐसा करके विपक्ष के लोगों का हौसला तोड़ना चाहती है।

सरकार सबको डराना चाहती है।
जो डर गया वो मर गया उक्ति को चरितार्थ होते देखना चाहती है। लेकिन वास्तविकता यह है कि सरकार अपने खुद इंटरनल सर्वे से घबराई हुई है। सरकार ने जो सर्वे करवाया है उस हिसाब से उसे महज 20 सीटें ही मिल रही है। चड्डीधारी राजनीतिक विश्लेषक इस आकंडे पर हंस सकते हैं कि ये क्या मजाक है, लेकिन यह हकीकत है। चड्डीधारी अगर चार से पांच मंत्रियों से ही बात कर लेंगे तो पिक्चर साफ हो जाएगी।

बहरहाल
जनता के मन में यह बात घर
कर गई है कि अब भगवा को
नमस्कार करके स्टेशन तक छोड़कर आना है।

उस स्टेशन पर जहां एक फेंकू
चाय बेचता था।

Leave a Reply

You may have missed