राजनांदगांव ,किसान संकल्प यात्रा ःः राज्य सरकार के प्रति किसानों का आक्रोश राजधानी में प्रदर्शित न हो सके इसलिए किसान संकल्प यात्रा का बार बार दमन . .

 

शांति पूर्वक विरोध प्रदर्शन के लोकतांत्रिक व संवैधानिक अधिकारों को कुचल रही हैं रमन सरकार .

15.09.2018 ,रायपुर 

जिला किसान संघ राजनांदगांव के द्वारा सभी गांवों में फसल बीमा का भुगतान करने, वर्ष 2014-16 तक का धान बोनस देने, किसानों को क़र्ज़मुक्त करने, चना की खरीदी न करने से किसानों को हुए नुकसान की 7000 रूपये प्रति एकड़ की दर से भुगतान करने और वनाधिकार कानून के तहत वन भूमि पर काबिज आदिवासियों को व्यक्तिगत व सामुदायिक वनाधिकार देने आदि मांगों को पूरा करने के लिए दिनांक 14 से 17 सितम्बर तक राजनांदगांव से रायपुर तक तक किसान संकल्प पदयात्रा आयोजित करने का फैसला किया गया था। इसका समापन 17 तारीख को रायपुर में किसान संकल्प सभा के रूप में होना था। परन्तु राज्य सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने एक बार पुनः पदयात्रा की अनुमति न देकर किसानों की गैरकानूनी गिरफ्तारियां की l

जिला किसान संघ के नेता सुदेश टीकम ने कहा कि यात्रा के एक दिन पूर्व देर रात तक किसान नेता कलेक्ट्रेट कार्यालय में बेठे रहे, परन्तु यात्रा की अनुमति के संवंध में कोई जानकारी नही दी l अगले दिन सुबह कानून व्यवस्था का हवाला देकर रायपुर तक पदयात्रा की अनुमति देनें से मना कर दिया गया l राजनांदगांव जिला प्रशासन पूर्ण रूप से तानाशाह तरीके से, भाजपा पार्टी के चाटुकार की तरह कार्य कर रहा हैं l प्रशासन नियमों का पालन करने के बजाये सी एम हाउस के निर्देशों पर भाजपा के राजनैतिक स्वार्थों की पूर्ति करने में लगा है। आखिर क्या कारण हैं कि राजनांदगांव के किसानो को शांतिपूर्वक पदयात्रा के रूप में राजधानी पहुचने नहीं दिया जा रहा हैं?

छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन के संयोजक आलोक शुक्ला और छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते ने कहा कि प्रदेश के तमाम जन आन्दोलन, किसान संगठन और राजनेतिक दल सरकार की इस कार्यवाही की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं l सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण ढंग से पदयात्रा सहित विभिन्न प्रकार के आंदोलन करना और अपनी मांगों के प्रति आम जनता का ध्यान आकर्षित करना उनका जनतांत्रिक अधिकार है l भाजपा सरकार आम जनता के इस अधिकार को ही कुचलने पर आमादा है और अपने तानाशाहीपूर्ण रूख का परिचय दे रही है l यह लगातार तीसरी बार है कि कानून-व्यवस्था के नाम पर राजनांदगांव के किसानों को पदयात्रा करने की अनुमति नहीं दी गई है l उन्होंने कहा कि रमन सरकार के खिलाफ प्रदेश के किसानो में भारी असंतोष हैं l सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण किसान लगातार कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा हैं l किसानो का आक्रोश खुलकर राजधानी में प्रदर्शित न हो पाए इसलिए भी बार बार किसानो की यात्राओ और आन्दोलनों का दमन किया जा रहा हैं l

किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा की रमन सरकार ने अपने चुनावी वादों को पूरा करने के बजाये किसानों के साथ छल ही किया है l प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ किसानों के बजाये बीमा कंपनियों को ही हुआ है l किसानों की कर्जमुक्ति के लिए इस सरकार के पास पैसे नहीं है, लेकिन कॉर्पोरेट कंपनियों के बैंकिंग क़र्ज़ के 4 लाख करोड़ रूपये बट्टे-खाते में डाल दिए गए हैं l किसानों से चना का उत्पादन तो कराया गया, लेकिन समर्थन मूल्य पर खरीदी की कोई व्यवस्था न होने से प्रदेश के किसानों को 1600 करोड़ रुपयों का नुकसान झेलना पड़ा है l वनाधिकार कानून लागू होने के बावजूद प्रदेश के आदिवासियों को जल-जंगल-जमीन से बेदखल किया जा रहा है और उनके वनाधिकारों को मान्यता नहीं दी जा रही है l

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सुदेश टीकम चंदू साहू संजय पराते रमाकांत बंजारे आलोक शुक्ला

जिला किसान संघ छत्तीसगढ़ किसान सभा छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन

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