15.09.2018 , रायपुर 

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने राजनांदगांव के किसानों को रायपुर तक पदयात्रा की अनुमति देने से इंकार करने और पदयात्रा निकाल रहे सैकड़ों किसानों की गिरफ़्तारी की कड़ी निंदा की है.

आज यहां जारी एक वक्तव्य में सीबीए के संयोजक आलोक शुक्ला, छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते , छ्मुमो मजदूर कार्यकर्ता समिति के रमाकांत बंजारे, किसान नेता आनंद मिश्रा आदि ने कहा है कि
राजनैतिक दलों व अन्य संगठनों द्वारा सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण ढंग से पदयात्रा सहित विभिन्न प्रकार के आंदोलन करना और अपनी मांगों के प्रति आम जनता का ध्यान आकर्षित करना उनका जनतांत्रिक अधिकार है. भाजपा सरकार आम जनता के इस अधिकार को ही कुचलने पर आमादा है और अपने तानाशाहीपूर्ण रूख का परिचय दे रही है. यह लगातार तीसरी बार है कि कानून-व्यवस्था के नाम पर राजनांदगांव के किसानों को पदयात्रा करने की अनुमति नहीं दी गई है. रमन सरकार के खिलाफ प्रदेश के किसानो में भारी असंतोष हैं l सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण किसान लगातार कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा हैं l किसानो का आक्रोश खुलकर राजधानी में प्रदर्शित न हो पाए इसलिए भी बार बार किसानो की यात्राओ और आन्दोलनों का दमन किया जा रहा हैं l

सीबीए नेताओं ने कहा है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य, किसानों की कर्जमुक्ति, वादे के अनुसार पिछले सालों का बोनस भुगतान, चना उत्पादक किसानों को हुए नुकसानकी भरपाई तथा आदिवासियों को वन भूमि पर व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वामित्व की मांगें जायज हैं और किसी आंदोलन को रोककर इन मांगों को दबाया नहीं जा सकता. आने वाले दिनों में अब सभी किसान संगठन मिलकर इन मांगों पर संयुक्त रूप से जुझारू आंदोलन की योजना बनाने जा रहे हैं. सीबीए ने राजनांदगांव के किसानों के हौसले को सराहा है और हर क्षण उनकी मांगों के साथ खड़े रहने का वादा किया है

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