⭕ बात निकली है तो अब दूर तलक जाएगी – एक और कविता अनुज श्रीवास्तव

अनुज श्रीवास्तव के जन्मदिन पर हमारे आग्रह पर प्रस्तुत .

बात निकली है तो अब दूर तलक जाएगी
लोग बेवजह की मौतों का सबब पूछेंगे
ये भी पूछेंगे के तुम इतने डरे से क्यूं हो
उँगलियाँ उट्ठेगीं सूखे हुए तालों की तरफ़
उँगलियाँ उट्ठेगीं नदियों में बहते नालों की तरफ़
उँगलियाँ उट्ठेगीं हर बात के बहानों की तरफ़

एक नज़र देखेंगे
मक्कार उन सालों की तरफ़
एक नज़र देखेंगे
वर्दी बेवर्दी पुलिस वालों की तरफ़
एक नज़र देखेंगे
सियासत में घोटालों की तरफ़

नीतियों पर भी कई तंज़ कसे जाएंगे
जब खांसते बच्चे
बिन हवा के मर जाएंगे
जब काम के कच्चे नेता
रंगे हाथ पकड़े जाएंगे
जब ख़ून सने हाथ
गंगाजल से धोए जाएंगे
तब
हम जाहिल भी हर एक बात पे गाना देंगे
छोड़ेंगे नहीं
हर माननीय को ताना देंगे
बातों बातों में
उनको औक़ात में ले आएंगे

वो भी चालाक हैं
जी भर तुम्हें लालचाएंगे
न ललचो तो कई तरह से डराएंगे

उनकी बातों का ज़रा सा भी असर मत लेना
अपनी ललत्तई के चलते
जीभ को तल्ले में मत रख देना
डरना नहीं
जीतेंगे हम इस बात का भरोसा करना

चाहे कुछ भी हो
सवालात करना उनसे
वो तरेरेंगे आँख
आँखों आँखों मे लड़ना उनसे
उनकी हर चुप्पी पे
खुल के बात करना उनसे
चाहे कुछ भी हो
सवालात करना उनसे

वो जब आएं घर
मांगने वोट
बैठक में थोड़ा इंतज़ार करो कहना उनसे
एक नज़र देखना फिर
बीते हुए सालों की तरफ़
हर एक ज़ख़्म का हिसाब तो कहना उनसे
हर मज़लूम के सीने की आह फिर निकल आएगी
बात निकली है तो अब दूर तलक जाएगी
बात निकली है तो अब दूर तलक जाएगी

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