हमारी धरोहर और पहचान ही पेड़ है अगर हम उसे ही उजाड़ देंगे तो फिर कुछ नही बचेगा हमारे पास… : पेड़ो को बचाने हेतु पदयात्रा. : नेहरू चौक से सेंदरी .बिलासपुर .

हमारी धरोहर और पहचान ही पेड़ है अगर हम उसे ही उजाड़ देंगे तो फिर कुछ नही बचेगा हमारे पास… : पेड़ो को बचाने हेतु पदयात्रा. : नेहरू चौक से सेंदरी .बिलासपुर .

 

2 सितम्बर 2018 रविवार को नेहरू चौक बिलासपुर से ग्राम सेंदरी तक रतनपुर मार्ग के लगभग 5000 पेड़ो को बचाने हेतु पदयात्रा किया गया, ग्राम सेंदरी वासियों द्वारा पदयात्रा का स्वागत टिका-चंदन लगाकर किया और फिर एक सभा के साथ पदयात्रा का समापन किया गया..

सुबह 8 बजे नेहरू चौक मे सभी आम नागरिक उपस्थित होने लगे थे, उनमे बुजुर्ग, बच्चे, महिला, युवा सभी ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया, हाथो में पेड़ बचाओ नारो के तख्ते और नारो से गूंजता रतनपुर रोड, जोश और जज्बा ऐसा की लोगो को घरों से निकलने पर मजबूर कर दिया, सड़क किनारे कुछ लोगो ने पदयात्रा में शामिल हो कर, कुछ दूर चल कर अपना समर्थन भी दिया.. जोश और पेड़ो को बचाने की चाह में कोई कमी नही दिखी नेहरू चौक बिलासपुर से ग्राम सेंदरी की दुरी भी कम लगने लगी..

सब को समझना होगा कि हम सड़क का विरोध नही कर रहे और न ही विकाश का, लेकिन हम चाहते है की सड़क भी बने और पेड़ भी बचें, प्रशासन के पास बड़े-बड़े इंजीनियर, आर्किटेक्ट, ठेकेदार और प्लानर है जिनको लाखो करोडो रुपये सरकार उनके काम के लिए देती है, क्या वो पेड़ बचाते हुए सड़क निर्माण की रूप-रेखा तैयार नही कर सकते..? जब पूरी दुनिया में और हमारे राज्य में ही कई ऐसी सड़क बनाई गई और जा रही है जिसमें पेड़ो को बिना काटे सड़क निर्माण हो रहा है और जबकि वो पूरी तरह सफल भी है तो फिर हम सिर्फ पेड़ो को काटने के पीछे ही क्यों भाग रहे है।

जो लोग कहते है न कि हम बिलासपुर को लंदन, अरपा को टेम्स नदी बनाएंगे असल में उन्होंने बिलासपुर की पहचान और उसकी संस्कृति को समझा ही नही और न ही समझने का प्रयास किया, हमारी धरोहर और पहचान ही पेड़ है अगर हम उसे ही उजाड़ देंगे तो फिर कुछ नही बचेगा हमारे पास…

 

बिलासपुर के नजदीक से ही कर्क रेखा (ट्रोपिक ऑफ़ कैंसर) गुजरती है, प्रकृति ने हमे पहाड़, जंगल और हरा-भरा वातावरण के रूप में वरदान दिया है, ये हरा-भरा वातावरण ही है जिसके कारण हमें कर्क रेखा के करीब होने का अहसास नही होने देता, जरा सोचिए आगे जब ये पेड़ पौधे ही नही बचेंगे तो फिर क्या होगा हमारा और हमारे शहर का, आप क्या अनुमान लगा सकते है शहर के उस वक्त का तापमान, वातावरण जिसमे आने वाला भविष्य सास ले सकेगा..??? अचानकमार जैसा जंगल करीब होने के बावजूद हमारे शहर का तापमान 49℃ पार था तो जरा सोचिए सच में शहर की वर्तमान की स्थिति क्या है और हम-आप इसे और कहा और किस ओर ले जा रहे है..

 

अभी भी वक्त है हम अपने शहर को पूरी दुनिया में बिलासपुर के नाम से ही प्रसिद्ध कर सकते है और शायद ऐसा हो की दूसरे शहर और देश खुद को बिलासपुर बनाने का सपना देखे, न की प्रशासन और नेता हमारे शहर बिलासपुर को लंदन और अरपा को टेम्स बनाने का.. अब आप तय करे आप क्या चाहते है…

 

#आओ_बचायें_पेड़ो_को
#SupportGreenBilaspur

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