रायगढ : फ्लाई एस की मनमानी डम्पिंग को नहीं रोका गया तो भयंकर तबाही होगी : सम्पूर्ण जनजीवन ही खतरे में पड़ जायेगा.

रायगढ : फ्लाई एस की मनमानी डम्पिंग को नहीं रोका गया तो भयंकर तबाही होगी : सम्पूर्ण जनजीवन ही खतरे में पड़ जायेगा.

गणेश कछवाहा 

4.09.2018  /. रायगढ 

फ्लाई एस की मनमानी डम्पिंग को नहीं रोका गया तो भयंकर तबाही होगी। सम्पूर्ण जनजीवन ही खतरे में पड़ जायेगा।जिस तरह पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की अवहेलना करते हुए, पर्यावरण सुरक्षा के मापदंड का पालन न करते हुए उद्योगों से निकलने वाली फ्लाई एस को मनमानें ढंग से यत्रतत्र फेंका जा रहा है उससे खेत खलिहान, पर्यावरण तथा नदी नाले तालाब व जलस्त्रोतों के प्रदूषित होने के साथ साथ जनजीवन व समूचे प्राणिजगत के जीवन के लिए भी गम्भीर ख़तरा बढ़ते जा रहा है।

हाल ही में पर्यावरण एवं मंत्रालय के एक विशेषज्ञ पैनल (तालिका) ने फ्लाई ऐश का उपयोग करके खदानों को भरने पर चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञ पैनल के अनुसार इसके निम्नलिखित पर्यावरणीय परिणाम हो सकते हैं:-

 

o फ्लाई ऐश में पायी जाने वाली भारी धातुओं की लीचिंग के कारण भू-जल के प्रदूषित होने का खतरा।

o फ्लाई ऐश खदानों के छिद्रो को भर देगी इसके परिणामस्वरूप भूजल के पुनर्भरण में कमी आएगी।

o फ्लाई ऐश से भरे गए स्थान पेड़-पौधों के लिए उपयुक्त नहीं होंगे क्योंकि फ्लाई ऐश के कारण वृक्षों की जड़ें सही से विकसित नहीं हो पाएंगी। इससे ऐसे स्थान पर उगने वाले वृक्ष मंद गति से चलने वाली पवनों को भी नहीं झेल पाएगें और जल्द ही जड़ सहित उखड़ जायेंगे।

 

फ्लाई ऐश में सिलिका (अग्नि प्रस्तर), एल्यूमीनियम (एक प्रकार की हल्की धातु) और कैल्शियम (चुना) के आक्साइड्‌स की पर्याप्त मात्रा शामिल होती है। आर्सेनिक (हरताल/संखिया नामक तीव्र विष), बोरान (एक अलोह मूलवस्तु दवा के निर्माण में उपयुक्त), क्रोमियम (वर्ण धातु), सीसा आदि जैसे तत्व भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते है। इस प्रकार यह पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरा है।

बरसात में तो अभी तक बहुत मात्रा में फ्लाई एस केलो व महानदी में बह चुके होंगे । फ्लाई एस की मनमानी डंपिंग से केवल खेत खलिहान, पर्यावरण,जलस्त्रोत, जनजीवन ही प्रभावित नही हो रहे हैं वरन केलो,मांड व महानदी भी खतरे में है।अगर अतिशीघ्र इस पर नियंत्रण नही किया जाता है तो केलो बांध और महानदी हीराकुंड डैम भी खतरे में पड़ जाएंगे।सरकार की जल आवर्धन योजना भी फ्लाई एस प्रदूषित जल संकट के खतरे में पड़ सकती है ।इस पर जिला कलेक्टर एवं पर्यावरण संरक्षण अधिकारी की भूमिका समझ से परे है।

*पर्यावरण एवं वन मंत्रालय दव्ारा फ्लाई ऐश के उपयोग हेतु 2009 में जारी की गयी अधिसूचना-*
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पर्यावरण की सुरक्षा के लिए थर्मल पावर प्लांटों से निकलने वाले फ्लाई एस (छाई) के उपयोग को ईंट निर्माण में अनिवार्य कर दिया गया है। भारत सरकार ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है। प्रदूषण बोर्ड के वैज्ञानिक डॉ.नवीन कुमार ने बताया कि ईंट निर्माण में फ्लाई एस का इस्तेमाल हो इसके लिए राज्य सरकार ने टास्क फोर्स का गठन किया है। थर्मल पावर प्लांट के 300 किलोमीटर के दायरे में ईंट निर्माण में फ्लाई एस का उपयोग बाध्यकारी है।
• फ्लाई ऐश के नए और अभिनव उपयोग भी किये जा रहे हैं। इस प्रकार के उपयोग विशेष रूप से विद्युत कंपनियों (संघों) जैसे एनटीपीसी इत्यादि ने आईआईटी-दिल्ली और आईआईटी- कानपुर जैसे संस्थानों के सहयोग से प्रारंभ किये हैं, ऐसे नए उपयोगों में रेलवे के लिए प्री-स्ट्रेस्ड (बेचैन) कंक्रीट रेलवे स्लीपरों (सोने वाला) का निर्माण आदि सम्मिलित है।

• परिवहन लागत: उड़ीसा जैसे कुछ राज्यों ने विभिन्न प्लांटो (औद्योगिक संयत्र) को फ्लाई ऐश की परिवहन लागत में सब्सिडी (सरकारी आर्थिक सहायता ) देने का आदेश दिया है।

• हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने सिंगापुर और दुबई जैसे स्थानों पर फ्लाई ऐश की बढ़ती मांग को देखते हुए इसके निर्यात के लिए एक निर्यात नीति की घोषणा की है।

पर्यावरण विदों, जनसंगठनों, समाजिक कार्यकर्ताओं, मीडिया एवं अखबारों के माध्यम से बारबार अवगत कराये जाने के बावजूद जिला प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्यवाही न किया जाना जनता में काफी आक्रोश एवं चिन्ता उतपन्न कर रही है कि आखिर प्रशासन इतनी गंभीर समस्या पर गम्भीर क्यों नहीं है?वर्तमान विधायक ने भी इस संदर्भ में शासन से पत्राचार किया है पर कोई ठोस कार्य नहीं किया गया।सरकार द्वारा कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं की गई? जनप्रतिनिधियों ने भी कोई सराहनीय कार्य नहीं किया है।

 

सवाल यह उठता है कि आखिर सरकार की प्राथमिकता क्या है।लोगों का जीवन बचाना जरूरी है या उद्योग?पर्यावरण सुरक्षित नहीं होगा, जलस्रोत सुरक्षित नहीं होंगे तो जनजीवन कैसे बचेगा और जनजीवन सुरक्षित नहीं होगा तो उस विकास और उद्योग का क्या करेंगे?यह गम्भीर सवाल प्रमुख चिंता के साथ मुखर हो रहें हैं। सरकार को प्राथमिकता के आधार पर इन सवालों का हल ढूंढना होगा।अन्यथा यही जनाक्रोश जन आंदोलन का रूप अख्तियार कर सकता है।रायगढ़ जिले की जनता तो इन सवालों का करारा जवाब आने वाले चुनाव में बहुत मुखर होकर दे सकती है।

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जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा एवं
ट्रेड यूनियन कौंसिल ,रायगढ़ छत्तीसगढ़

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