पूणे पुलिस द्वारा प्रस्तुत तथ्य पूरी तरह फर्जी, फेब्रीकेटेड है. यह सामाजिक संगठनों ,कार्यकर्ताओं को बदनाम करने और सामाजिक संगठनों को खतम करने की साज़िश हैं .: पीयूसीएल छतीसगढ.

पूणे पुलिस द्वारा प्रस्तुत तथ्य पूरी तरह फर्जी, फेब्रीकेटेड है. यह सामाजिक संगठनों ,कार्यकर्ताओं को बदनाम करने और सामाजिक संगठनों को खतम करने की साज़िश हैं .: पीयूसीएल छतीसगढ.

पूणे पुलिस द्वारा प्रस्तुत तथ्य पूरी तरह फर्जी, फेब्रीकेटेड है. यह सामाजिक संगठनों ,कार्यकर्ताओं को बदनाम करने और सामाजिक संगठनों को खतम करने की साज़िश हैं .: पीयूसीएल छतीसगढ.

 

बिलासपुर / 01.09.2018

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ब्राह्मणवाद और कारपोरेट लूट केखिलाफ काम करने वाले कार्यकर्ताओं को बदनाम करने और जल जंगल जमीन की लडाई को कमजोर करने की साजिश का पीयूसीएल छतीसगढ पूरी तरह खंडन करता हैं .

जो पत्र महाराष्ट्र पुलिस ने जारी किया है वह पूरी तरह फर्जी और फेब्रीकेटेड तथाहीन हैं, उसमे देश तथा छतीसगढ के कई मानव अधिकार कार्रकर्ता के नाम जोडे गये है ,लेकिन किसी भी आरोप के तथ्य नहीँ हैं . जो कागजात कोर्ट में पेश करना चाहिये था उसे दो महीने पहले रिपब्लिक टीवी और अब प्रेस को जारी किया जा रहा हैं जो न केवल अनियमित बल्कि दुष्टता पूर्वक  भी हैं .

एडवोकेट सुधा भारद्वाज ने भी इसका खंडन जारी किया है जो संलग्न हैं . जिसमे उन्होंने लिखा है कि यह पत्र उनके द्वारा नहीं लिखा गया हैं और न ही उनके घर से बरामद हुआ हैं .उन्होंने यह भी कहा कि उनमें से कई कार्यकर्ता के साथ और संगठनों के साथ उन्होंने न्याय ओर लोकतांत्रिक लडाईयों में हिस्सेदार रही हैं .वे उन्हें जानती भी हैं .लेकिन इसमे लिखे गये तथ्य गलत हैं .

इसी पत्र में जगदलपुर लीगल एड ग्रुप का भी जिक्र किया है जिसमे उन्होंने यह कहा है कि उनका काम न्यायिक और संवैधानिक हैं .

इसी पत्र में पीयूसीएल छतीसगढ के उपाध्यक्ष डिग्री प्रसाद चौहान के नाम का भी जिक्र किया गया हैं .डिग्री प्रसाद चौहान पिछले दो दशकों से दलित मुद्दो और कारपोरेट के खिलाफ सक्रिय है ,सामाजिक न्याय के लिये संघर्षरत चौहान पिछले कई साल से आदिवासियों की जमीनों का गैर आदिवासियों द्वारा कंपनियों के लिये फर्जी खरीद फरोख्त 170 ख के मामलों को उजागर किया है .यह मामले एसडीएम कोर्ट ,जिला न्यायालय और उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं .
गौर तलब हैं कि 2013 में रायगढ कलेक्टर और 2016 में राष्ट्रीय जनजाती आयोग ने संज्ञान में लेते हुये इस कार्रवाही की अनुशंसा की हैं .
इन्हीं लडाईयों को कमजोर करने के लिये इन नामों को बिना किसी पुख्ता सबूतों के.

पीयूसीएल छतीसगढ सुधा भारद्वाज ,जगदल पुर लीगल एड ग्रुप एवं अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं और उनके संघर्ष के प्रति एकजुटता जाहिर करता हैं .

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सुधा भारद्वाज द्वारा जारी किये पत्र का हिन्दी अनुवाद .

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पुणे पुलिस द्वारा प्रेस को जारी किया गया पत्र के जबाब में सुधा भरद्वाज का पत्र और जारी बयान .
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1. यह पत्र पूरी तरह से फर्जी एवं फेब्रिकेट की गई हैं यह मुझे और दूसरे मानव अधिकार वकीलों ,कार्यकर्ताओ और संघठनो को अपराधी साबित करने के लिये बनाया गया हैं.
2 इसमें कई सार्वजानिक तथ्यों को तोड़मरोड़ कर झूठ में गुंथा गया है, कई लीगल एवं डेमोक्रेटिक गतिविधियों जैसे की मीटिंग सेमिनार ,विरोध प्रदर्शन को अपराधिक बनाने के लिये यह आरोप लगाया जा रहा है की उन्हें माओवादियों द्वारा फंड किया गया है, जब की यह सरासर झूठ हैं.
3 . इस पत्र में कई मानवधिकार कार्यकर्ताओ वकीलों एवं संस्थाओ के नाम लिये गए है यह उनके ऊपर संदेह व्यक्त करने ,काम को रोकने और उनके खिलाफ नफरत पैदा करने के लिये किया गया हैं.
4 IAPL जो को एक वकीलों की एसोसियेशन है जिसके प्रेसिडेंट रिटायर्ड जज सुरेश है और जो वकीलों पर हो रहे हमलो के खिलाफ आवाज़ उठा रही है. यह उसके कामो को भी आपराधिक साबित करके अमान्य करने की कोशिश हैं.
5 में स्पष्ट रूप से कहती हूँ की मेने कभी भी मोगा के किसी भी कार्यक्रम को करने के लिये 50 हज़ार रुपये नहीं दिये , न ही में “ महाराष्ट्र के किसी अंकित “ को जानती हूँ और न ही किसी “ कोमरेड अंकित जो की कश्मीरी अलगाववादी के अम्पर्क मे हैं’ को में जानती हूँ .
6 में गौतम नवलखा जो की एक माने हुए और वरिष्ठ मानव अधिकार कार्यकर्त्ता है को जानती हूँ ,पर पर इस पत्र में उनके नाम को इस तरह लाया गया है जो की उनको अपराधी की तरह प्रस्तुत करने और उनके खिलाफ नफरत पैदा करने के लिये किया गया हैं.
7 में जगदलपुर लीगल एड ग्रुप को बहुत अच्छी तरह से जानती हूँ ,पर मेने उनके लिये कभी फंड जुटाने का काम नहीं किया हैं खासकर के किसी प्रतिबंधित संस्था से तो कभी नहीं किया हैं . मे स्पष्ट रूप से कहना चाहती हूँ की उनका काम पूरी तरह से न्यायिक और संवेधानिक हैं,
8 डिग्री प्रसाद चौहान जो की एक दलित मानवाधिकार कार्यकर्त्ता है और पीयूसीएल में सक्रीय हैं . में उन्हें अच्छी तरह से जानती हूँ .वो ह्यूमन राईट ला नेट वर्क के साथ काम करते हैं , उनके खिलाफ पूरी तरह से बेबुनियाद आरोप लगाये गए हैं.
9. इस पत्र में उल्लेखित संघठनों ,वकीलों एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता ने मानवाधिकार के हनन को उजागर करने का काम किया हैं . यह पत्र उनको अपराधिक रूप में पेश करने एवं उनके प्रति नफरत भड़काने का प्रयास हैं .
में एक बार फिर यह बात स्पष्ट करना चाहती हूँ की यह पत्र पूरी तरह से फर्जी है जिसको मेने तब भी नकारा था जब यह 4 जुलाई 2018 को रिपब्लिक टीवी में फ्लेश की जा रहा था और इस पत्र को न तो पुणे कोर्ट में और न ही सीजीएम फरीदाबाद के सामनें पेश किया गया जब वो मुझे पुणे लेजाने की कोशिश कर रही थी .

सुधा भारद्वाज

दिनांक 31.08 .2018 मेरे वाकी व्रन्दा ग्रोवर के माध्यम से जारी किया गया .

* Original english letter

Regarding the letter issued to the Press by Pune Police
1. It is a totally concocted letter fabricated to criminalize me and other human rights lawyers, activists and organisations.
2. It is a mixture of innocuous and publicly available facts and baseless fabrication. Various legal and democratic activities such as meetings, seminars, protests have been sought to be delegitimised by alleging that they are funded by Maoists.
3. A number of human rights lawyers, activists and organisations have been deliberately named to cast a stigma over them, to obstruct their work and incite hatred against them.
4. There is an effort to delegitimise IAPL an association of lawyers whose president is Retd J. Hospet Suresh and which has been active in speaking up against attacks on lawyers.
5. I categorically state that I have never given Rs. 50, 000/- to hold any programme in Moga. Nor do I know any “Ankit from Maharashtra” or “Com Ankit who is in touch with Kashmiri Separatists.
6. I know Gautam Navlakha, a senior and respected human rights activist whose name has been mentioned in a manner to criminalize and incite hatred against him.
7. I know Jagdalpur Legal Aid Group well and have never solicited any funds for them least of all from any banned organisation. I categorically state that their work has been absolutely legitimate and legal.
8. I know Advocate Degree Prasad Chouhan a dalit human rights activist who is active in PUCL and works with the Human Rights Law Network. Totally baseless allegation has been made against him.
9. There has been an effort to criminalize and incite hatred against various lawyers activists and organisations who have exposed HR violations in Bastar, Chhattisgarh.
I once again declare that this is a fabricated letter, which I had refuted when it was flashed on Republic TV on 4th July, and which has not even been brought before either the Pune Court nor the CJM Faridabad while seeking to whisk me away to Pune.

Sudha Bharadwaj
Dated 31.08.2018
Through my lawyer Adv. Vrinda Grover

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डा. लाखन सिंह       एपी जोसी
अध्यक्ष                       सचिव

छतीसगढ पीयूसीएल .

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