छत्तीसगढ़ की सामाजिक कार्यकर्ता एवम वकील सुधा भारद्वाज सहित 10 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी बढ़ते फासीवाद का एक और उदाहरण: डॉ संकेत ठाकुर

 

29.08.2018/ रायपुर 

छत्तीसगढ़ की सामाजिक कार्यकर्ता एवम वकील सुधा भारद्वाज सहित 10 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी बढ़ते फासीवाद का एक और उदाहरण है । आज सुबह-सुबह देश के विविध स्थानों से एक साथ 10 मानव अधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि देश में अघोषित आपातकाल चल रहा है ।  जल-जंगल-जमीन तथा किसान मजदूर आदिवासियों के हित में संघर्ष करने वालों को वर्तमान सरकार हर तरफ से दबाना चाहती है । छत्तीसगढ़ में हार की आशंका को देख छत्तीसगढ़ की जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज की गिरफ्तारी भाजपा सरकार की बढ़ती हताशा का एक और प्रमाण है । सुधा जी लगातार मजदूरों आदिवासियों के हक में सरकार के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं और आज फर्जी प्रकरण दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी करना एक बड़े षड्यंत्र का इशारा करता है जिससे तहत आने वाले दिनों में तमाम मानव अधिकार कार्य कार्यकर्ताओं की आवाज को कुचलने के लिए यह सरकार किसी भी हद तक चली जाएगी । 

आगामी चुनावों में हार की आशंका से भयभीत भाजपा सरकार अपने विरोधियों को जेल में डालना चाहती है ताकि इनके विरोध में कोई खड़ा ना हो सके । 
सुकमा जिले  के नुलक़ातोंग में सुरक्षाबलों द्वारा निर्दोष आदिवासियों की हत्या का मामला सामने आने के पश्चात भाजपा सरकार की बुरी तरह किरकिरी पूरे देश और विदेश में निंदा  हो रही है । इस प्रकरण का पर्दाफाश आम आदमी पार्टी की नेता सोनी सोरी और अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया । साथ ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में केस दायर किया गया जिस पर 29 अगस्त को सुनवाई है । अपनी फजीहत से बचने सरकार नक्सल क्षेत्रों में सक्रिय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर दबाव डालना चाहती है और शायद इसीलिये आज गिरफ्तारियां की गई । भाजपा सरकार के इशारे पर की गई गिरफ्तारी की जितनी भर्त्सना की जाये कम है । सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की जाए  ।

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