छग पी.यू.सी.एल. की महासचिव सुधा भारद्वाज और देश भर के तमाम मानव अधिकार रक्षकों की गिरफ्तारी की निंदा :   • यू. एन. के मानव अधिकार रक्षकों पर सार्वभौमिक घोषणा का घोर उल्लंघन. : पीयूसीएल छतीसगढ

बिलासपुर / 28.08.2018

अभी-अभी खबर मिली कि छतीसगढ पीयूसीएल की महासचिव, वरिष्ठ वकील ,ट्रेड यूनियनिस्ट एडवोकेट सुधा भारद्वाज को दिल्ली मे अपने निवास से गिरफ्तार कर लिया गया हैं .

उनके अलावा, देश में कई जगहों से मानव अधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिए गया है, जैसे कि झारखंड की स्टेन स्वामी, हेदराबाद से वरावर राव, महाराष्ट्र से अरुण फेरेरा, वर्नन गोंसाल्वेस, दिल्ली से ही गौतम नौलखा आदि के निवास पर अलसुबह से ही छापा मार कर पुलिस ने हिरासत में लिया है. जानकारी के अनुसार इन सभी पर पुलिस ने उन पर 153A, 505, 117, 120B IPC धारा 13,16,17,18,18b, 20, 38,39,40 UAPA धारा लगाई है.

बताया जा रहा है कि इन सब को भीमा कोरेगांव प्रकरण से जोडा गया है .

सुधा भारद्वाज छतीसगढ में पिछले 30 सालों से ट्रेडयूनियन में मजदूरों ,किसानों के लिये समर्पित रहीं हैं . बस्तर में हो रही ज्यादतियों के खिलाफ छतीसगढ हाई कोर्ट में उन्हें सहायता करने के अलावा मजदूरों ,किसानों ,महिलाओं के पक्ष में हमेशा खडी रहने वाली सुधा छतीसगढ पीयूसीएल की महासचिव हैं. अभी वे नेशनश ला यूनिवर्सिटी दिल्ली में विजटिंग प्रोफेसर है .
वर्त्तमान में देश में बिगड़ते हालातों में लोकतंत्र एवं संविधान पर हमले जिस तरह से बढ़ते जा रहे है, उसमे अधिवक्ता पर, खास कर मानवाधिकार अधिवक्ताओं की भूमिका और भी अधिक कठिन होती जा रही है। इस माहौल में उन अधिवक्ताओ पर जो कि पीड़ित वर्ग को कानूनी सहायता दे रहे हैं उन पर लगातार हमले हो रहे हैं, और कानूनी सहायता देने वालों को गिरफ्तार किया जा रहा है .

भरद्वाज अधिवक्ता सन 2000 से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय में लगातार कानूनी प्रेक्टिस करती आई है, उनके काम और ज़ज्बे को सभी तबके के लोगों ने, अधिवाक्तागण और न्यायाधीशों ने सराहा है, उनको छत्तीसगढ़ विधिक सेवा संघ में भी नियुक्त किया गया था। उनके साथ इंटर्नशिप करने के लिए देश भर से विधिक छात्र छत्तीसगढ़ लगातार आते रहे है और उनके मार्गदर्शन से कई मानवाधिकार अधिवक्ता भी तैयार हुए है। ऐसी प्रतिष्ठित अधिवक्ता पर जब ऐसे बिना सिर पैर के झूठे इल्ज़ाम लगाए जा सकते हैं तो आज कोई भी अधिवक्ता अपने पेशे को ईमानदारी और संवेधानिक रूप से करने के बावजूद सुरक्षित नहीं है.
सुधा भारद्वाज देश की जानी मानी मानव अधिकार कार्यकर्ता हैं .
छतीसगढ पीयूसीएल ने केवल इन सभी गिरफ्तारियों की घोर निंदा करता है, वरन इस पूरी प्रक्रिया को वर्तमान सरकार की दमनात्मक नीतियों से जोड़ कर देखता है, जहां आम नागरिकों के जीने और जीवकौपर्जन के अधिकारों का तो हनन हो ही रहा है, वरन मानव अधिकार रक्षकों पर भी दमन का दौर शुरू हो गया है, जो न केवल भारत के संविधान के तहत मानव अधिकारों का घोर उल्लंघन है, वरन संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा मनाव अधिकार रक्षकों की सार्वभौमिक घोषणा का भी घोर उल्लंघन है.

पी.यू.सी.एल. सरकार से सभी झूठे मुकदमें वापस लेने की मांग करते है .छतीसगढ पीयूसीएल उनके साथ एकजुटता जाहिर करता है, और सभी प्रकार के कानूनी और लोकतांत्रिक संघर्ष के लिये तैयार है.

डॉ. लाखन सिंह           अधिवक्ता ए.पी. जोसी. 
अध्यक्ष                         सचिव  

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