नुकलातोंग की फर्जी मुठभेड़ : सुरक्षा बलों की भारी अडंगो के बाबजूद पत्रकारों की टीम रातभर पैदल चलकर गोमपाड़ पहुची . : लिंगा राम कोडोपी .

 

18.08.2018
सुकमा से लौट कर लिंगा राम कोडोपी की रिपोर्ट .

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सुकमा जिले के कोंटा ब्लाक,कोंटा से करीब 30 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत मेहता के नुलकातोग, गोमपाड़, किन्द्रेमपाड़, ऐटेगट्टा, इन गांवों के 15 आदिवासी ग्रामीणों को नक्सल के नाम पर नुलकातोग गाँव के खेत में मुठभेड़ के नाम पर D.R.G.( जिला सुरक्षा बल ) द्वारा 6 अगस्त को मार दिया गया था।

सुकमा पुलिस ने यह दावा किया हैं कि नक्सल के जनमिलिशिया को मारा हैं। आप सबको जानना जरूरी है कि जनमिलिशिया क्या हैं?

जन मिलिशिया क्या है 

जनमिलिशिया गाँव के ही ग्रामीण होते हैं। बस्तर संभाग के हर गाँव में आपको जनमिलिशिया मिलेगी। इनका काम होता हैं गाँव की देख रेख और गाँव की सुरक्षा। इन्हें नक्सल सगठन नहीं बनाता हैं बल्की गाँव के ग्रामीण बनाते हैं। गाँव के ग्रामीण इसलिए बनाते हैं क्योंकि जहाँ नक्सल का प्रभाव होता हैं वहाँ कोई सरपंच, सचिव, पटेल, कोटवार नहीं होता हैं। कोई भी गाँव, शहर, देश, बगैर लिडर के नहीं चलता, इसलिए ग्रामीण जनमिलिशिया बनाते हैं। बाहर से कोई व्यक्ति गांव में आये तो जनमिलिशिया ही रहने खाने की व्यवस्था करती है। गाँव में लड़ाई झगड़ों को निपटना भी इन्हीं का काम होता हैं।

जनमिलिशिया के पास हथियार के नाम पर तीर कमान, फरसा, टगिया,चाकू के अलावा कुछ नहीं होता। मेरा गांव जब नक्सल प्रभावित था तब गांव के ग्रामीण ही जनमिलिशिया बनाये थे तभी से मुझे जनमिलिशिया के बारे में जानकारी हैं। अब आप पूछेगें की उतने हथियार जो पुलिस ने मुठभेड़ में दिखाए हैं, पुलिस प्रशासन के पास हथियारों की कमी हैं क्या? एक हथियार को पुलिस प्रशासन दसबार भी दिखा सकती हैं पूछने वाला कौन हैं?

 

सर्वोच्च न्यायालय पहुचे 

इस घटना की जानकारी तेलगाना के C.L.C. सगठन (सिविल लिब्रेशन कमिटी) को लगीं। घटना की जानकारी लगते ही C.L.C. ने सर्वोच्च न्यायालय में इस घटना को लेकर एक जनहित याचिका छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के खिलाफ दायर किया। इस याचिका में पाँच मांगे रखी गई•

1. फर्जी मुठभेड़ के खिलाफ सैन्य बलों पर 302 आईपीसी की धारा के तहत F.I.R. दर्ज करी जाए।
2. उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच का गठन किया जाये।
3. मृत ग्रामीणों का दुबारा पोस्टमार्टम हो।
4. मुठभेड़ के नाम पर प्रोत्साहन राशि और पदोन्नति रोकी जाए।
5. सीबीआई द्वारा आपराधिक जांच या हत्याओं की जांच के लिए एसआईटी का गठन।

सर्वोच्च न्यायालय ने इस याचिका को 13 अगस्त को सुनवाई की और याचिकाकर्ता व छत्तीसगढ़ राज्य सरकार को घटना के तथ्यों को 29 अगस्त 2018 सर्वोच्च न्यायालय के अगली सुनवाई में पेश करने को कहाँ गया हैं।

पत्रकारों का दल को रास्ता रोक कर परेशान किया .

राष्ट्रीय राजमार्ग को ब्लाक किया .

कल 18 अगस्त 2018 देश के अलग – अलग जगहों से आये हुए पत्रकारों का दल घटना की मुआयना व जाँच करने के लिये जैसे ही सुकमा के कोंटा ब्लाक ग्राम गोमपाड़ के लिए टीम रवाना हुआँ, जिला सुकमा पुलिस को पता चल गया, जिले की पुलिस प्रशासन को पता लगते ही दोरनापाल के पुलिस ने पत्रकारों की टीम को कुछ समय तक रोक लिया और नाम, मोबाईल नंम्बर, पता, व वाहन के कागजात पूछे सबने अपना पता पुलिस को दे दिया। इस दल में सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी, सुकमा जिले के AAP प्रत्याशी रामदेव बगेल, आकाश पोयाम, तामेश्वर सिन्हा, कृतिका, सौम्या, न्यूयॉर्क टाईम्स से एक पत्रकार व मैं भी शामिल था। हम जैसे ही दौरनापाल से 10 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बड़े आगे रोड़ जाम मिला एक दसचक्का गाड़ी रोड में खड़ी मिली जिसका चालक फरार था। आसपास जिला सुरक्षा बल (D.R.G.) घूम रहे थे लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग खुलवाने में कोई मदद नहीं कर रहे थे, पत्रकारों के दल के साथ – साथ बस के यात्री और आम नागरिक जाम से परेशान हो गए थे। D.R.G. लोगों के परेशानी को देखकर मजा और हंस रहे थे। दो घण्टे बाद बड़ी दिक्कतों का सामना कर दल आगे बढ़ा, हमें बढ़ता देख D.R.G. के कुछ जवान सिविल कपड़ों में बाइक से सवार पाँच किलोमीटर की दूरी पर जाकर JCB से राष्ट्रीय राजमार्ग में एक गड्डा खोदवा दिया गया। उस गड्डे में एक 18 चक्के की लोरी आकर फस गयी।

सभी पत्रकार उस जगह पहुँचे जहाँ लोरी फंसी हुई थीं। पत्रकारों को लगा कि हमारी वजह से आमनागरिको को परेशानि हो रही हैं, पुलिस प्रशासन हमे गोमपाड़ पहुँचने नहीं देना चाहती हैं। इस वजह से दल वहाँ से वापस जिला सुकमा लौटा। जब दल वापस लौट रहा था तब जिस वाहन से राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध किया गया था वह वाहन पुलिस केम्फ में खड़ा किया गया था। D.R.G.हमे लौटता देख पुलिस केम्फ में वापस लौट रहे थे। दल का सुकमा पुलिस पीछा कर रही थीं। दल जैसे ही सुकमा पहुँचा पुलिस ने फिर पकड़ा और पूछताछ शुरू किया, दल ने जवाब दिया कि वे गीदम वापस लौट रहे हैं तो पुलिस ने छोड़ दिया। शाम हो गई सुकमा के एक होटल में चाय पीने बैठे थे तभी उस होटल में पुलिस इंटेलिएजेंसी के कुछ लोग पहुंचे होटल के मेनेजर को बोल रहे थे कि इस दल को रुकने की जगह होटल में मत देना।

रातभर पैदल चलकर पत्रकार पहूंचे गोमपाड़ .

पत्रकारों की दल हारने वाली थोड़ी न थीं सुकमा में जगह मिले या न मिले दल रातो रात दूसरा रास्ता लेकर गोमपाड़ के लिए निकल गई। मैं सुकमा से वापस लौट आया हूँ। दल रात भर पैदल चला होगा और आज गोमपाड़ पहुँच कर घटना की जाँच पड़ताल कर रहा होगा।

सुकमा पुलिस द्वारा अगर सही नक्सल और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुआँ हैं तो पुलिस अधिकारी डर क्यों रहे हैं? लोग जहाँ घटना हुआँ हैं उस जगह पहुँचने की कोशिश करते हैं तो पुलिस प्रशासन पूरी ताकत लगाती हैं लोंगो को रोकने में।

वैसे भी तेलगाना से C.L.C. सगठन के याचिकाकर्ता के साथ 30 व्यक्तियों की टीम नुलकातोग पहुँचने वाली थीं पहुँची या नहीं पता नहीं।

यह याचिका बस्तर संभाग के सर्व आदिवासी समाज को डालना चाहिए था लेकिन C.L.C. सगठन ने भी डाला तो क्या हुआँ। बस्तर संभाग के सर्व आदिवासी समाज को भी इस घटना पर ठोस कदम उठाना चाहिए। C.L.C. ने जो भी किया हैं आदिवासी समुदाय के हित में किया हैं। और याचिका में जिन चीजों की मांग हुई हैं आदिवासियों के हित में हैं।

भारत सरकार देश में बहुत जल्द नागरिक युद्ध करने वाला हैं। पहले तो देश के नागरिकों को धर्म के नाम पर बाटे। अब लोग आपस में लड़-लड़ कर मरेंगे। भारत का सविंधान जल रहा हैं, देश के लोकतंत्रवादि तमाशा देख रहे हैं। आज आदिवासी नक्सल के नाम पर मर रहे हैं। कल धर्म के नाम पर सविधान के नाम पर मरेंगे।
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लिंगा राम कोडोपी  बस्तर के युवा पत्रकार है जो सधन क्षेत्रों में पहुंच कर  रिपोर्ट करते है.

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