जहां सोनी सोरी ने तिरंगा यात्रा में राष्ट्रीय ध्वज फहराया था ,वहीं 15 आदिवासियों की हत्या की और महिलाओं के साथ बुरी तरह की मारपीट सुरक्षा बलों ने.:

 

16.08.2018 / 

लिगाराम कोडपी की रिपोर्ट .

सुकमा जिले में जो मुठभेड़ हुई हैं, उस मुठभेड़ के नाम से आदिवासी युवाओं की हत्या तो हुई हैं। साथ – साथ कई महिलाओं के साथ मार पीट भी हुई हैं। D.R.G. पुलिस ने प्रग्नेंट महिला तक को नहीं छोड़ा हैं। महिला को महिला पुलिस हाथ लगाती हैं, D.R.G. में महिला पुलिस कहाँ हैं?

आदिवासी पुलिस प्रशासन के खिलाफ मामला दर्ज भी कराए तो क्या होगा? न्यायालय जाएं तो न्याय व्यवस्था कहेगा, जांच शुरू करो, जाँच में पुलिस प्रशासन दोषी पायी भी गई तो भी कार्यवाही क्या होगा किसी की बर्खास्तगी तो नहीं होगी। किसी को कोई दण्ड नहीं। बस्तर संभाग के कई मामले राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में हुए हैं, उच्च न्यायालय में मामले लंबित हैं, नतिजा कुछ नहीं किसी को कोई दंड नहीं। जहाँ लोगों को न्याय मिलना चाहिए वहाँ पुलिस को अवॉर्ड राष्ट्रीय पुरस्कार, आउट ऑफ प्रमोशन दिया जाता हैं।

उदाहरण बस्तर की समाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी मौजूद हैं। सोनी सोरी के अलावा बस्तर की कई महिलाए हैं।

यह भारत देश किसी विशेष दल या राजनैतिक पार्टी का नहीं हैं बल्की हम सबका हैं। सभी लोग देश के राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करते हैं, देश में शान्ती बनाये रखने के लिए ही 24 तीलियों का चक्र ध्वज के बीचों बीच बना हुआ हैं। ध्वज के हर रंग का कोई अर्थ हैं। यह चक्र अशोक के साम्राज्य से लेकर अब तक हैं, जिसका पूरा भारत देश सम्मान करता हैं।


15 अगस्त 2016 देश का राष्ट्रीय ध्वज छत्तीसगढ़ राज्य के जिला सुकमा, ग्राम पंचायत मेहता के गोमपाड़ गाँव में सोनी सोरी के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के द्वारा फ़ैहराया गया था।

इस गाँव में राष्ट्रीय ध्वजारोहण इसलिये किया गया था कि आदिवासी ( मूलनिवासी) भारत देश के बुद्धिजीवियों, लोकतंत्रवादियो, भारत शासन, देश की कानून व्यवस्था को यह विश्वास दिला सके कि आदिवासी(मूलनिवासी) लोकतंत्र के साथ हैं, और शान्ती बनाये रखेगें व देश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। आज भी जिस तिरंगा को देश की शान माना जाता हैं, वह तिरंगा गोमपाड़ गाँव में आदिवासी ग्रामीण सभांल कर रखे हुए हैं।

10 अगस्त 2018 को जब सोनी सोरी आम आदमी पार्टी के जाँच टीम के साथ ग्राम नुलकातोग पहुँची तो लोगों ने कई सवाल जाँच दल के सामने खड़े कर दिये। और कहने लगें कि आपलोग 2016 को इसी महीने राष्ट्रीय ध्वज लेकर गोमपाड़ गाँव आये थे और ध्वजारोहण किये थे, ध्वजारोहण के उपरान्त सोनी सोरी AAP छत्तीसगढ़ राज्य के पदअधिकारी और देश के तमाम पत्रकार व कुछ संगठनों से आये हुए बुद्धिजीवियों ने यह आश्वासन दिया था कि गाँव में दुबारा सुकमा पुलिस प्रशासन किसी भी आदिवासी ग्रामीण की नक्सल के नाम पर हत्या नहीं करेंगी। लेकिन शर्मिंदगी की बात है, की जिस गाँव में राष्ट्र का मान को फहराया गया उसी गाँव में 6 अगस्त 2018 को 15 आदिवासी ग्रामीणों की नक्सल के नाम पर पुलिस द्वारा हत्या कर दिया गया। जब सोनी सोरी से इन हत्याओं के बारे में गाँव के ग्रामीणों ने पूछा तो सोनी सोरी के पास कोई जवाब नहीं था।

एक तरीके से बस्तर में लोकतंत्र और भारत के राष्ट्र में कई हत्या हैं। गाँव के ग्रामीणों ने सोनी सोरी से पूछा कि इस बार हम स्वतंत्रता दिवस के दिन काला ध्वज फहराएंगे क्या आप सब हमारा समर्थन करोगें? दूसरा सवाल था कि हम किस रास्ते पर चले भारत के लोकतंत्र, कानून व्यवस्था की ओर या नक्सल विचारधारा की ओर? इन सवालों में सोनी सोरी जा एक ही जवाब था, लोकतंत्र और कानून व्यवस्था की ओर। जब-जब बस्तर संभाग में शांति लाने कि कोशिश बुद्धिजीवियों द्वारा किया जाता हैं तब-तब पुलिस प्रशासन द्वारा आदिवासियों की नक्सल के नाम पर हत्या कर दिया जाता हैं।

सवाल खड़ा होता हैं कि D.R.G. जिला सुरक्षा बल में कौन हैं? इस सुरक्षा बल में कोई देश के बाहर से आये हुए जवान नहीं हैं, इस सुरक्षा बल में बस्तर के आदिवासी युवा और भारत देश के अलग-अलग राज्यों से आये हुए युवा हैं। D.R.G. के कई आदिवासी जवानों से मैं मिला जवानों का यहीं कहना था कि वे आदिवासी ग्रामीणों को नक्सल के नाम पर मजबूरी में मारते हैं। आप कहेंगे कि अपने ही समाज के लोगों को कोई कैसे मार सकता है? मारना ही पड़ेगा क्योंकि आदिवासी युवा पुलिस प्रशासन का हिस्सा बन चुके हैं। कुछ आदिवासी युवा तो नक्सलियों द्वारा प्रताड़ित व सताए हुए हैं, जो की D.R.G. में हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय राज्य के गृह मंत्रालय पर दबाव डालेगी की हमने इतना फंड दिया अभी तक कुछ रिजल्ट क्यो नहीं आया?

परिणाम के लिए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह जी छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के माननीय मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को कहेंगे रमन सिंह जी नक्सल आपरेशन D.G., D.M. अवस्थी को कहेंगे माननीय अवस्थी जी जिले के पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा को कहेंगे, अभिषेक मीणा D.R.G. को कहेंगे कि वेतन चाहिए तो परिणाम दिखाओ। D.R.G. क्या करेगी नक्सल मिले या न मिले आदिवासी ग्रामीण जंगल में तो जरूर मिलेंगे जिन्हें नक्सल के नाम पर मार कर केंद्र और राज्य सरकार को परिणाम दिखाया जा सकता हैं।

भारत के मूलनिवासियों की आबादी कम होने से बचाइए।

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