पत्थल गांव ,जशपुर : जल जंगल जमीन पर जो संवैधानिक अधिकार प्राप्त है उसे अभियान के रूप में प्रारम्भ किया जायेगा .

याकूब कुजूर की रिपोर्ट

जशपुर/ पत्थलगांव , 16.08.2018

पत्थल गाव के फुलेता चैक के राकछार पंचायत में विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस को जंल जंगल जमीन पर अधिकार अभियान दिवस के रूप में विभिन्न संगठनों और संस्थाओं ;उराव.कुड़ुख़ समाज लोकमंच जीवन विकास मैत्री आशादीप जनसंघर्ष समिति महिला संघ आदि के संयुक्त तत्व धान में मनाया गया।

वर्ष भर जल जंगल जमीन पर जो संवैधानिक और कानूनी अधिकार आदिवासियों को प्रदत हैं उसे हासिल करने के लिए एक अभियान की तहर काम किया जाएगा।आदिवासियों को वन अधिकार मान्यता कानून , पेसा कानून और अन्य कानूनों द्वारा प्रदत अधिकारों को प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास करना है। अपने अधिकारों को जानकर एवं संगठित होकर उन्हें प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना है।क्योंकि कागजों में अधिकार देने मात्र से अधिकार प्राप्त नहीं होते हैं।इस मामले में सिद्धांत और व्यवहार में गहरी खाई है। दूसरी ओर आदिवासियों को यह जानना जरूरी है कि कोई उन्हें अधिकार देने के लिए तैयार नहीं है उन्हें संघर्ष करके हासिल करना है। उक्त बात याकूब कुजूर ने कही.

 

समारोह का आरम्भ शोभा यात्रा से हुआ। फुलेताचैक के चारों ओर नाच गान व नारे के साथ शोभ यात्रा की गई और यह जनसभा के रूप में तबदील हुई। जय जय आदिवासी जागो गाने के द्वारा समारोह का आरंभ किया गया। आदिवासी झंडे का उत्तोलन मुख्य अतिथि मनोहर साय द्वारा किया गया। झंडे के नीचे धूप हवन हुआ।

जरहापारा.नरवाटिकरा के नृत्य दलने आदिवासी नाच द्वारा सबका स्वागत किया।मुख्य अतिथि मनोहर साय अति विशिष्ठ अतिथि ;समाजिक अगुवेद्ध पुरन साय ;गोड़ समाजद्ध एतवाराम ;नगेसिया , जलंधर , कवंर ,प्रमोद पयलेट ;मांझी समाजद्ध श्री शोभन ;कुड़ुख़ एवं विशिष्ट अतिथि क्षेत्र के सरपंचगण ,महेश टोप्पो चेररूराम ,जोर साय, पटेल टोप्पो ,सुरेन्द्रकु तिर्की ,प्रकाश मिंज , मोहन राम भगत तथा बीण्डीण्सीण् गण श्रीमती धनमती प्रधान ,टिकेश्वर एक्का , धरनी धरसिदार एवं फाण् ज्ञानप्रकाश कुजूर सिण् ख्रीस्टीना फाण् फुनजेंस मिंज फाण् हेनरी लकड़ा फाण् राजेश ख़लख़ो फाण् अलेकजैंडर एक्का फाण् देवभूषण टोप्पो ,धनी ख़लख़ो श्रीमती सरोज बड़ा ,रंजीत बड़ा , बख़ला , एमण्एसण् पैकरा ,मुन्ना टोप्पो ,अलफोंस , जेरो मलकड़ा ,विनोद श्री ज्वाकिम टोप्पो सहित गणमान्य ग्रामीणों कर्मचारियों और अधिकारियों का बैच लगाकर स्वागत किया गया। उपस्थितजनों को फिलिसिता व साथियों के द्वारा आम की पत्ती सेपानी छिड़काकर स्वागत किया गया। बारिस के बावजूद लगभग एक हजार ग्रामीण जन समारोह मनाने के लिए आए थे।

उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए याकूब कुजूर ने कहा कि आदिवासियों को सम्मान देने और उनके जीवन को विकसित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन् 1993 को अंतराष्ट्रीय आदिवासी वर्ष घोषित किया और पहली बार वर्ष 1995.2004 को अदिवासी वर्ष घोषित करके 9 अगस्त को अंतराष्ट्रीय आदिवासी दिवस की घोषणा कर 2005 -2015 को दूसरा दशक घोषित किया। 13 सितंबर 2007 संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने संयुक्त राष्ट्र संघ आदिवासी अधिकार घोषणा पत्र को पारित किया। इसमें आदिवासियों के अधिकारों को 46 अनुच्छेदों में रखा गया है जो दुनिया भर के आदिवासियों के अस्तित्त्व गरिमा और खुशहाली के लिए न्यूनतम् मान कहै इसलिए राष्ट्रों का दायित्व है कि आदिवासियों से मिल कर इस घोषणा पत्र में निहित अधिकारों को लागू करे एवं हमारी सुरक्षा करे।

भारत में पाचवीं अनुसूची के तहत पेसा कानून वन अधिकार कानून और अन्य कानूनों के द्वारा आदिवासियों को कुछ अधिकार प्रदान किया गया है। लेकिन फिर भी आदिवासियों की दशा में विशेष सुधार नहीं हुआ है।आदिवासियों को विकास का दुश्मन कहा जाता है क्योंकि आदिवासी तथा कथित विकास के लिए जमीन नहीं देना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने आदिवासी झंडे के बारे में बतलाया। प्रशासन को धन्यवाद दिया स्थानीय अवकाश घोषित करने के लिए। आज के दिवस को नाच गान व समस्याओं पर चिंतनमनन के रूप में मानने के लिए सभी का अहवान किया ।

आदिवासी संस्कृति पर -एम एस एस पैकरा ने अपना विचार विचार व्यक्त किया और संस्कृति को बचाए रखनी की सलाह देते हुए शासकीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। श्रीमती धनमती प्रधान ने बताया कि रीति रिवाज और आधुनिकाता में बड़ा द्वंद चल रहा है। अलेकजैंडर एक्का ने वर्तमान आदिवासी समस्याओं के बारे अवगत कराया और उनके समाधान का उपय सुझाया। दोरोथी एक्का ने आदिवासी भाषाओं को बचाए रखने पर जोर दिया। सुधीर किण्डो ने युवाओं को स्वरोजगार की विभिन्न संभावनों की जान करी दी। श्रीमुन्ना टोप्पो जी ने संविधान में आदिवासी के लिए प्रदत प्रवधानों की जानकारी दी। श्री केण्डीण् कुर्रेजी ने आदिवासियों के इतिहास की संक्षिप्त जानकरी देते हुए आदिवासियत को बचाए रखने की सलाहदी। देवभूष्ण टोप्पो ने व्यवस्थापकों मंचासीन गणमान्य ग्रामीणों जन प्रतिनिधियों स्वयं सेवकों वक्ताओं पुलिस प्रशासन नृत्य दलों ;कटंगतराई जरहापाराद्ध और सभी उपास्थितजनों को आभार व्यक्त किया।

मंच संचालन टिकेश्वर एक्का और श्रीमती सेलेस्टीना एक्का ने किया। सभा के अंत में सामुहिक नाच का सभी ने आनन्द लिया।
समारोह के प्रतिफल के रूप में निम्नलिखित माॅग के लिए राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार पत्थलगाॅव को ज्ञापन सौंपा गया.

1 .  9 अगस्त को राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा करें।
2. क्षेत्र से मानव तस्करी की राक थाम के लिए तत्काल कदम उठायंे।
3.आदिवासियों का विस्थापन बंद करें।
4.हाथी समसया का तत्काल समाधान करें।
5.समस्त कृषि उपज व लघु वन उपज का समर्थन मूल्य निर्धारित करें।
6.पेसा कानून एवं वन अधिकार मान्यता कानून के प्रावधानों को तत्काल लागू करें और महा महिम राष्ट्रपति महोदय एवं महा महिम राज्य पाल पाॅचवीं अनुसूचित क्षेत्रों के विकास के प्रतिविशेष ध्यानदें।
7.आदिवासी युवाओं को बिना भेद भाव रोजगार दें।
8. स्वरोजगार के अवसरों में आदिवासी युवाओं को प्राथमिकता दें।
9.जाति प्रमाण पत्र की प्रकिया को सरल बनायें ताकि समय पर मिल सके।
10.जशपुर और सरगुजा जिलों में निवासरत असुर जन जाति को जैसे पड़ोसी राज्य झाारखण्ड में उसे अति आदिम जनजाति का दर्जाप्राप्त है यहाॅ की असुर जन जाति को भी अदिम जनजाति का दर्जा प्राप्त हो.
11.लोकतंत्र पंथ निर्पेक्षता और आरक्षण को बनाए रखने के लिए संविधान में हो रहे मनमानी संशेधन पर रोक लगाएं.

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