6-9 अगस्त : हिरोशिमा दिवस के अवसर पर परमाणु ऊर्जा की असलियत व पर्यावरणीय क्षति पर चर्चा एवं युद्ध के विरूद्ध शांति का आह्वान दिया गया. : विमर्श एवं पीस.

6-9 अगस्त : हिरोशिमा दिवस के अवसर पर परमाणु ऊर्जा की असलियत व पर्यावरणीय क्षति पर चर्चा एवं युद्ध के विरूद्ध शांति का आह्वान दिया गया. : विमर्श एवं पीस.


रायपुर, 7 अगस्त 2018.

विमर्श एवं पीस रायपुर द्वारा 6 अगस्त को हिरोशिमा दिवस के अवसर पर परमाणु ऊर्जा की असलियत, पर्यावरणीय क्षति पर चर्चा एवं युद्ध के विरूद्ध शांति का आह्वान दिया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रज्ञा विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विधालय उरला, रायपुर में किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता तुहिन देब, संयोजक विमर्श थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रज्ञा विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विधालय उरला के संचालक शांतनु सेन ने की। इस अवसर पर माँ वीणा वाणी सेवा समिति उरला की अध्यक्षा नीता विश्वकर्मा, स्कूल के प्राचार्य श्री चंदेल व रविन्द्र यादव, पीस, छत्तीसगढ़ की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम में स्कूल के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित 200 छात्र-छात्राओं ने भागीदारी की। हिरोशिमा दिवस के कार्यक्रम में परमाणु बम तथा विनाशक हथियारों की विभिषिका पर प्रदर्शनी भी लगाई गई थी।


कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध के अंत में पहले से पराजित जापान के दो बड़े शहरों हिरोशिमा (6 अगस्त) तथा नागासाकी (9 अगस्त) पर नए उभरते हुए महाशक्ति अमरीका द्वारा, गिराए गए परमाणु बमों की याद विश्व की जनता के दिलो दिमाग में अमिट रूप से समा गई है। वह परमाणु हथियारों की अथाह दुष्परिणामों को आज भी नहीं भुला पा रही है। तभी से परमाणु ऊर्जा के उपयोग के खिलाफ दुनिया भर में प्रतिरोध विकसित हो रहा है। उन्होने बताया कि सुरक्षित परमाणु ऊर्जा एक मिथक है। परमाणु ऊर्जा संयत्रों की दुर्घटनाओं के इतिहास की तीन सबसे भीषण दुर्घटनायें सोवियत संघ (रूस) के चेरनोबिल, अमेरिका के हेरिसबर्ग, जापान के फुकुशिमा इन तीनों जगह पर हुई। जिसके कारण विश्वव्यापी पर्यावरण विनाश से मानवजाति के अस्तित्व पर एवं मनुष्य की आजीविका पर मंडरा रहे खतरे के विरूद्ध पूरी दुनिया में संघर्षरत जनता की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसलिए हमें परमाणु उर्जा की जगह वैकल्पिक उर्जा साधनों की खोज कर मानव जीवन को तबाही से बचाने हेतु मुहिम चलाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में परमाणु बम, विनाशक हथियार एवं युद्ध की जगह शांति, इंसानियत, सामाजिक न्याय तथा जनता के सामाजिक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने हेतु नीति बनाने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि हमारे देश में मौजूद परमाणु संयत्र जैसे कलपक्कम, जैतापुर व कुडनकलम सहित नए बनने वाले सभी परमाणु संयत्रों पर तुरंत रोक लगनी चाहिए क्योंकि सभी परमाणु संयत्र, टाईम बम की तरह हैं।

कार्यक्रम के दौरान प्रेरणा गीत ’’ज्योत है ज्ञान की’’ प्रस्तुत कर विद्यार्थियों में वैज्ञानिक चेतना की सोच से समृद्ध होने का आवाह्न किया गया।

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