7 अगस्त 2018 को ट्रांसपोर्ट कर्मियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल .प्रदेश के परिवहन कर्मियों के दर्दनाक हालात.

7.08.2018

● केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लाया जा रहा मोटर व्हीकल अधिनियम संशोधन विधेयकछोटे-छोटे ट्रांसपोर्ट व्यवसायी, मिस्त्री, स्पेयर पार्ट विक्रेताओं और ड्रायवर्स, कन्डक्टर्स के लिए फांसी का फंदा
● केन्द्र की मोदी सरकार रोड ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में लगे करोड़ों करोड़ श्रमिकों और छोटे व्यवसायियों को बर्बाद कर इस व्यवसाय को बड़ी-बड़ी कंपनियों के हवाले करने पर तुली हैं।
● पहले सरकार ने ”सड़क सुरक्षा कानून 2014″ के नाम पर यह कोशिश की। लेकिन ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन ने तमाम संगठनों को साथ ले इसके विरोध में लगातार संघर्ष करते हुए तीन बार राष्ट्रव्यापी हड़तालें की।
● सरकार पीछे तो हटी, लेकिन *अब उसने मोटर व्हीकल एक्ट 1988 में संशोधन के नाम पर एक विधेयक लाकर पिछले दरवाजे से हमला बोल दिया है।मोटर व्हीकल एक्ट संशोधन विधेयक को केन्द्र की भाजपा सरकार ने अपने संख्या बल के आधार पर 10 अप्रैल 2017 को लोक सभा में पारित कर लिया। उसने इसे राज्य सभा में भी प्रस्तुत किया, लेकिन देश भर में हुए विरोध व राज्य सभा में बहुमत न होने के चलते वह इसे पारित नहीं करा पाई।
● अब उसने संसद के वर्तमान वर्षा कालीन सत्र (18 जुलाई से 30 अगस्त 2018 तक) में राज्य सभा की कार्यसूची में शामिल कर उसे पारित कराने की योजना बनाई है। यदि राज्य सभा में यह कानून पारित हो गया तो समूचे रोड ट्रांसपोर्ट उद्योग व उसमें लगे करोड़ों करोड़ लोगों को बर्बाद कर देगा।*
— *इस कानून के बनने के बाद कंडक्टर श्रेणी समाप्त हो जावेगी। इसका मतलब ड्रायवर से ही दोनों काम कराये जावेंगे।*
— *जितने भी ड्रायवर्स के पास लायसेंस है वे सरकार वापस ले लेगी फिर उन्हें एक कम्प्यूटर टेस्ट देना होगा। जो भी कम्प्यूटर टेस्ट में पास होंगे उन्हें ही फिर लायसेंस मिलेंगे। यह काम भी प्रायवेट एजेंसी से करवाया जावेगा। खुद सोचिये कि वर्तमान ड्रायवर्स में से कितने ड्रायवर यह टेस्ट पास कर पायेंगे। साफ है कि बड़ी संख्या में ड्रायवर्स रोजगार खों देंगे।*
— *इस नये ड्रायविंग लायसेंस में एक चिप लगी होगी। जिसमें रांग साइड, सिंग्नल तोडऩे, ओवर स्पीड जैसी मामूली चूक या गलती भी अंकित हो जावेगी। इसी के आधार पर आपका ड्रायविंग लायसेंस समाप्त कर दिया जावेगा।*
— *छोटी-छोटी गलतियों के लिए भी 500 से 25000 रुपये तक के जुर्माने के साथ 6 माह तक की सजा के प्रावधान इस कानून में हैं। जैसे यदि किसी वाहन से एक्सीडेंट होता है और ड्रायवर वहीं गाड़ी नहीं रोकता या पूरी जानकारी नहीं देता तो उस पर 5 से 10 हजार का जुर्माना और 6 माह की सजा का प्रावधान है। सोचिये इन हालातों में कौन ड्रायवरी कर पायेगा।*
— *देश भर के कुल ट्रक , बस, टेक्सी, ऑटो, मिनी लोडिंग का 80 प्रतिशत ऐसा है जिनके आपरेटर के पास एक या दो वाहन हैं। इनमें से अधिकांश तो ऐसे हैं जो सवयं मालिक भी हैं और ड्रायवर या कंडक्टर भी हें। अब इस नये कानून में एग्रीग्रेटर नामक प्रावधान कर देश और विदेश के खरबपतियों को इस क्षेत्र में घुसाने का खेल खेला गया है। जैसे टैक्सी, ऑटो में उबेर और ओला आ गये ऐसे ही बस और ट्रक के क्षेत्रों में भी ऐसी कंपनियां आ जावेंगी। मतलब साफ है कि नये कानून के प्रावधानों के चलते एक-दो गाडिय़ों के मालिक बाहर और हजारों-हजार गाडिय़ों को रख सकने वाली बड़ी-बड़ी खरबपति कंपनियों का रोड ट्रांसपोर्ट पर कब्जा और करोड़ों ट्रांसपोर्ट कर्मी बेरोजगार।*
— *नये कानून के तहत किसी भी गाड़ी की रिपेयरिंग में ब्रांडेड स्पेयर पाटर््स ही इस्तेमाल कर अधिकृत वर्कशाप में ही रिपेयरिंग कराई जा सकेगी। इसके उल्लंघन पर भारी जुर्माना देना होगा। इसका मतलब साफ है कि लोकल स्पेयर पाटर््स विक्रेता व मिस्त्री भी बेरोजगार हो जायेंगे।*
● *पिछले चार सालों में पेट्रोल की कीमत में प्रति लीटर 20 रुपये तथा डीजल की कीमत प्रति लीटर 12 रुपये बढ़ गई है। चूंकि इस अवधि में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी कमी आई है इसलिए पेट्रोल-डीजल तो सस्ता होना चाहिए था, लेकिन हो गया महंगा। इसका कारण है कि केन्द्र व राज्य सरकारों ने टैक्स बढ़ा दिये। आज पेट्रोल पर 52 प्रतिशत तथा डीजल पर 41 प्रतिशत टैक्स है। यदि सरकारें टैक्स कम कर देती तो ट्रांसपोर्ट उद्योग और आम जनता बच जाती। लेकिन केन्द्र व राज्य सरकार ने ऐसा न कर ट्रांसपोर्ट उद्योग का गला घोंट दिया।*
● *इन्हीं चार वर्षों में हर वर्ष वाहनों की बीमा प्रीमियम में बेतहाशा वृद्धि करने के साथ लायसेंस नवीनीकरण, फिटनेंस की दरें बढ़ाकर ट्रांसपोर्ट उद्योग व उसमें लगे लोगों पर एक और बड़ा हमला इस सरकार ने कर दिया। बीमा की राशि तो बढ़ा दी लेकिन एक्सीडेंट के शिकार लोगों को इसमें से कितना मिला सरकार बताने के लिए तैयार नहीं है। इससे साफ है कि बीमा कम्पनियों की तिजोरी भरने और ट्रांसपोर्ट उद्योग को बर्बाद करने के लिए बीमा प्रीमियम बढ़ाई जा रही है।*
★ प्रदेश के परिवहन कर्मियों के दर्दनाक हालात*
● चाहे किसी भी श्रेणी के वाहन हों (ट्रक, बस्र ऑटो, टैक्सी, मिनी लोडिंग वाहन) उन पर काम करने वाले ड्रायवर्स, कंडक्टर्स, क्लीनर्स के हालात बहुत दर्दनाक हैं। उनका न तो कोई वेतन तय है और न ही काम के घंटे व सवैतनिक साप्ताहिक अवकाश तय है। जब चाहे तब उन्हें काम से हटा देना आम बात है। उन्हें पेंशन, फंड, ग्रेच्युटी, इलाज की सुविधा, दुर्घटना मुआवजा, बच्चों की पढ़ाई व दवाई के लिए कुछ भी नहीं मिलता। वे अपनी जान हथेली पर लेकर काम करते हैं लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं। कहने के लिए तो मोटर वर्कर्स एक्ट 1961 प्रभावशील है लेकिन न तो उसकी जानकारी दी जाती है और न ही मध्यप्रदेश सरकार उसे लागू करती है। हालात यह हैं कि लंबी-लंबी दूरी तक वाहन चलाने के बाद ड्रायवर्स, कंडक्टर्स को प्रतिदिन मात्र 150 से 400 रुपये के बीच ही मजदूरी मिल पाती है। क्लीनर्स के हालात तो और भी खराब हैं। जरा सोचिये इतनी छोटी कमाई में कैसे वे स्वयं व परिवार की परवरिस कर सकते हैं?*
● तुरंत समाज कल्याण कानून बनाओ*
● *ऑल इण्डिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन ने केन्द्र सरकार से यह मांग की कि ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों के लिए भी निर्माण, बीड़ी, खदान मजदूरों की तरह समाज कल्याण योजनाओं के लिए अलग से कानून बनाकर उसे लागू किया जाये। इसके लिए जरूरी फंड हेतु प्रत्येक वाहन के रजिस्ट्रेशन के समय एक उपकर लगाये जाने का भी सुझाव हमने दिया। हमारी उपरोक्त मांग पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने व्ही व्ही गिरी नेशनल लेवर इंस्टीट्यूट को इस संबंध में अध्ययन कर अनुशंसा करने का निर्देश दिया। इस संबंध में व्ही व्ही गिरी नेशनल लेवर इंस्टीट्यूट ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है लेकिन केन्द्र सरकार इस पर अमल करने के लिए तैयार नहीं है। हमारी मांग है कि रोड ट्रांसपोर्ट कर्मियों के लिए समाज कल्याण योजनाओं संबंधी यह कानून यथाशीघ्र बनाया जाये।*
हड़ताल की मांगें
01. प्रस्तावित मोटर वहीकल एक्ट संशोधन विधेयक वापस लो।
02. मोटर वक्र्स एक्ट 1961 का सख्ती से पालन कराओ।
03. ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में लगे कर्मचारियों को 18,000 रुपये न्यूनतम वेतन दो।
04. सभी ड्राइवर्स, कंडक्टर्स, क्लीनर्स को नियुक्ति पत्र व पहचान पत्र दो। इनकी सेवा सुरक्षा की गारंटी करो।
05. फंड, ग्रेच्युटी, पेंशन सहित तमाम कल्याण योजनाओं का लाभ सभी ट्रांसपोर्ट कर्मियों को दो।
06. बड़ी-बड़ी देशी व विदेशी खरबपति कंपनियों को ट्रांसपोर्ट उद्योग से रोको तथा छोटे-मझौले ट्रांसपोर्ट व्यवसाईयों को संरक्षण दो।
07. पेट्रोल-डीजल पर केन्द्र व राज्य सरकारें टैक्स कम करे तथा इन्हें सस्ती दरों पर उपलब्ध कराये।
08. बीमा, लायसेंस, नवीनीकरण, फिटनेस की बढ़ी हुई दरें वापस लो।

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(मण्डीदीप में हड़ताल की छवि और text वाया Drag Chandra Prajapati)

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