2 साल पुरानी इस पोस्ट की वजह से फेसबुक ने हिमांशु कुमार को 30 दिन के लिए ब्लॉक कर दिया है

2 साल पुरानी इस पोस्ट की वजह से फेसबुक ने हिमांशु कुमार को 30 दिन के लिए ब्लॉक कर दिया है

यही वह पोस्ट है दो साल पुरानी .

थानेदार दयानन्द बोला मै तो टाइट हो लिया भाई अब होर दारू ना गेरियो मेरे गिलास में .

अजी सब ते ज्याद्दा मेहनत तो तम करो अर पीवैं हम ? यो कहाँ का इन्साफ है ?

मोटे वाले गऊ सेवक नें कहा .

भाई घरम के काम में मेहनत तो करनी पड़ैगी , इस काम कू सरकारी डियूटी समझ के नी करता भाई , थानेदार भावुक हो गया था ,

दोनों हाथों के बीच डन्डे को मुट्ठियों में रगड़ते हुए , उन सब को बारी बारी देखते हुए वो बोल रहा था ,

साले कटुए , साले गांधी की गलती से यहाँ पड़े हुए हैं , हमारी मां है गाय , इसे काट्टेगें , सालों को मैं ई काट दूँगा .

अजी म्हारे रैहते आप क्यूँ तकलीफ करो हम ही नी पहुँचा देंगे क्या इन्हें कब्रिस्तान ?

इस बार लम्बा वाला गोरक्षक बोला , उसकी आंखे गांजे से लाल हो रही थीं .

चिलम का लम्बा कश खींच कर उसने अपने बराबर वाले पहलवान टाइप गऊसेवक को पकड़ा दी .

बम भोले , बोल कर उसने इतना लम्बा कश लगाया कि चिलम में से एक लम्बी लौ बाहर लपलपाने लगी .

तभी एक सिपाही ने थानेदार साहब के रूम में झांकते हुए थोड़ी परेशानी के साथ आकर बताया ,

अजी यो ट्रक वाला ना मान रा , बार बार कह रा है , पैसा ले लो मुझे जान दो ,

इसकी तो साले की भैन की , एक बार बोल दिया पच्चीस से कम की बात भी मत करियो , साला सुबह से दस हजार पे अटका हुआ है , पहलवान टाइप गोरक्षक गुस्से से चिल्लाया

एक काम करो बे तुम दोनों , चार सिपाही ले जाओ और इसकी सारी गाय नहर के पार उतार आओ , और ट्रक कबाड़ी को दे दियो , कमस कम लाख देगा लम्बे वाले ने अपने साथ बैठ कर झूम रहे दोनों गोरक्षकों को हुकुम दिया

हरियाणा में सरकार नें गोरक्षकों के नाम पर हज़ारो नौजवानों की एक फौज तैयार कर ली थी

जब मोदी जी ने इशारे में बताया कि नकली गोरक्षक एक समस्या हैं , तब अमित शाह की पहले से तैयार योजना के तहत अपनी पार्टी के लिये नौजवानों की फौज तैयार करने का कार्यक्रम लांच कर दिया था

इस कार्यक्रम में पूरे राज्य में अपनी पार्टी के वफादार युवकों को गोरक्षक के पद पर नियुक्त किया गया था

इन युवाओं को बाकायदा सरकारी पहचान पत्र जारी किये

यह सब एक तरह के प्राइवेट सैनिक थे , जिनकी पीठ पर सरकार का हाथ था
गोरक्षा तो कहने के ही लिये थी , क्योंकि हरियाणा में तो ज़्यादातर भैंसे ही पाली जाती थीं

गोरक्षकों का असली काम पार्टी की जीत सुनिश्चत करना था

गोरक्षक सीधे स्थानीय थानेदार के साथ काम करता था , इसलिये किसी की ठुकाई , पिटाई , मकान कब्ज़ा करना जैसे कामों में गोरक्षकों को कोई परेशानी नहीं होती थी

पूरे प्रदेश में गोरक्षकों के आतंक के कारण पार्टी तीन बार से लगातार चुनाव जीत रही थी

पार्टी के बड़े नेता मुस्कुराते हुए बताते थे कि यही गुजरात माडल है , मोदी जी कैसे बार बार गुजरात जीतते थे ?

पूरे प्रदेश में गोरक्षकों के आंतक का हाहाकार मचा हुआ था

पहले तो दलित लड़कियों को खेतों में खींच कर बलात्कार करने शुरू किये गये , लेकिन बाद में शाम के बाद सड़कों पर शराब और गांजे में डूबे गोरक्षकों का राज हो जाता था

“ये सब हमने छत्तीसगढ़ से सीखा,” एक दिन सीएम साहब ने गर्व से बताया

वहाँ हमने सलवा जुडुम चलाया , अपने लोगों को विशेष पुलिस अधिकारी बनाया ,

बिल्कुल वैसे ही जैसे अपने ये गोरक्षक है , ठीक वैसे ही , उसके बाद जो बोला पार्टी के हितों के खिलाफ उसे या तो ठोको या अन्दर करो

साले बड़े बड़े तुर्रम खां पत्रकार और मानवाधिकार वाले छत्तीसगढ़ छोड़ कर भागे

वही प्रयोग अध्यक्ष जी नें हरियाणा में करवाया

आज देखिये निष्कंट राज कर रहा हूँ , किसी माई के लाल में दम नहीं है जो चूँ भी कर सके

श्रोता पार्टी कार्यकर्ताओं ने जोश में भारत माता की जय बोली

यह पिछले साल राजधानी का वाकया था ၊

तभी थाने के बाहर दो मोटरसाइकलें रूकने की आवाज़ आई ,

चार गोरक्षक हड़बड़ाते हुए दीवार के साथ पड़ी बेंच पर बैठ गये

ये चारों बहुत गुस्से और उत्तेजना में थे

थानेदार ने अपने सामने बैठे लड़कों को खड़ा होने का इशारा किया

अभी अभी थाने में दाखिल हुए लड़कों ने थानेदार के पूछने का इन्तजार किये बिना बोलना शुरू कर दिया

तम यहाँ बैठ के मजे मारन लाग रे , अर वहाँ पाकिस्तानी आतंकवादी ट्रेनिंग दे रे ,

पन्द्रह अगस्त पै बम फेडोंगे ये मुल्ले , मुझे लग रा

पूरी बात बतावैगा या यूं ई बोलता रै गा

अरै वो मदरसा नी है क्या बड़े से गेट वाला हरे से रंग का ?

हां तो क्या हो गिया वहाँ ? थानेदार नें उस गुस्साए गोरक्षक से पूछा ?

हुब्बुल वतनी की बातें चल री है वहाँ मदरसे के अन्दर और क्या ?

अबे ये हुब्बुल वतनी क्या बला है ? थानेदार नें चिंतित होकर पूछा ?

मुझे तो लगै अल कायदा टाइप कुछ होगा

अबे और क्या देखा तुमने वहाँ ? थानेदार नें चिल्ला कर पूछा ?

देखा तो क्या साले मुल्ले अंदर से चिल्ला रहे थे , गेट भी बन्द कर रक्खा था भीतर से ?

हम्म , इनकी तो ? थानेदार का चेहरा गुस्से से लाल हो गया ,

और कुछ भी तो सुना होगा तुमने वहाँ ?

हाँ जी सुना क्यूँ ना ? पूरा याद है इसै , उसने नई उम्र के गोरक्षक को आगे किया

सुना दे बे पूरा आतंकवादी ट्रेनिंग वाला गाणा

नई उम्र वाले गोरक्षक नें अटक अटक कर याद करते हुए पूरा गीत सुनाया
लब पे आती हें दुआ बन के तमना मेरी ….

हो मेरे दम से यु ही मेरे वतन की ज़ीनत जिस तरह फूल
से होती हें चमन की ज़ीनत

…हो मेरा काम गरीबो की हिमायत करना ….

दर्द मंदों से ज़ैफ़ो से महोबत करना …

मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको

..नेक राह हो जो उस पर चलाना मुझको . . .

बस करो ये आतंकवादी गाणा , थानेदार ज़ोर से दहाड़ा

फोर्स तैयार करो थानेदार नें कमरे से बाहर आकर ललकार लगाई

पन्द्रह अगस्त के लिये दो ट्रक फोर्स थोड़ी देर पहले ही थाने पहुँची थी ,

आनन फानन में पूरे काफिले ने कूच कर दिया ,

थानेदार की जीप के आगे दोनों मोटरसाइकलों पर चार गोरक्षक रास्ता दिखा रहे थे

मदरसे से कुछ दूर सारी गाड़ियां रोक दी गई ,

थानेदार नें फोर्स को फैलने का इशारा किया ,

थानेदार मदरसे के गेट के पास पहुंच कर अन्दर झांक कर जायज़ा लेने की कोशिश करने लगा था ,

तभी मदरसे के भीतर से जोर की आवाज़ आई यौमे आज़ादी ज़िंदाबाद ,

भीतर से सैकड़ों लोगों नें जोरदार नारा लगाया – जिंदाबाद जिंदाबाद ,

मारो सालों को कह कर एक गोरक्षक नें अपनी कमर से कट्टा निकाल कर मदरसे की दिशा में फायर कर दिया

दरोगा हड़बड़ा कर एक तरफ भागता चला गया और पूरी जोर से चिल्लाया फायर

स्पेशल फोर्स नें मदरसे के गेट पर फायरिंग शुरू कर दी ,

करीब एक मिनट तक गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका दहल गया

मदरसे के फाटक के पीछे पहले तो कुछ देर खामोशी रही फिर यकायक कोहराम सा मच गया

थानेदार नें सिपाहियों को गेट तोड़ने का हुकुम दिया

गेट तोड़ने के बाद अन्दर देखा तीन छात्र मारे जा चुके थे , करीब अस्सी दूसरे लोगों, जिसमें शिक्षक और स्टाफ के मेंबर शामिल थे को गोलियां लगी थीं ၊

थानेदार नें रात को ही प्रेस को बुला लिया

एस पी साहब ने मीडिया को एक वक्तव्य दिया जिसमें लिखा था कि पुलिस को प्राप्त खुफिया जानकारी के मुताबिक आज आतंकवादियों के विरूद्ध एक साहसिक अभियान में हमारे जांबाज़ आफीसर दयानन्द सिंह ने अपनी जान पर खेल कर आतंकवादियों की नापाक साजिश को विफल कर दिया गया ၊

पुलिस को जानकारी मिली थी कि जेएनयू और छत्तीसगढ़ से प्रशिक्षण प्राप्त कुछ आतंकवादी यौमे आज़ादी नामक एक आतंकी अभियान शुरू करने की फिराक में थे၊ इस अभियान के लिये इन तत्वों नें हुब्बुल वतनी नामक एक आतंकी संगठन का गठन किया था ၊ जिसे विफल कर दिया गया ၊ “

दिल्ली में मानवाधिकार संगठनों नें इस कांड को सरकारी आतंकवाद कहा और जंतर मंतर पर इसके विरूद्ध एक प्रदर्शन आयोजित किया ၊

लेकिन अमित शाह के इशारे पर बजरंग दल , शिव सेना और आखिल भारतीय गोरक्षा समिति के कार्यकर्ताओं नें मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जम कर तुड़ाई की ၊

लोकतन्त्र का रथ चलता रहा

(हुब्बुल वतनी=देशभक्ति
यौमे आज़ादी = स्वतन्त्रता दिवस ,
गीत – अल्लामा इकबाल

– हिमांशु कुमार

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