संघ को जेएनयू पर गुस्सा क्यों आता हैं . ःः जगदीश्वर चतुर्वेदी .

संघ को जेएनयू पर गुस्सा क्यों आता हैं . ःः जगदीश्वर  चतुर्वेदी .

संघ को जेएनयू पर गुस्सा क्यों आता हैं . ःः जगदीश्वर चतुर्वेदी .

04.08.2018

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JNU पर एकबार फिर से बमबटुकों के हमले शुरू हो गए हैं. फ़रवरी 2016 के बाद यह हमलों का दूसरा चरण है. JNU के VC ने RSS के नेतृत्व के आदेश के बाद ही टैंक लगाने का प्रस्ताव रखा था. VC के बयान के बाद RSS के साइबर टट्टू सोशलमीडिया में अहर्निश दौड़ रहे हैं और JNU को फिर से गरियाने में लगे हैं.

हम कहना चाहते हैं JNU सच में महान है, वरना बार -बार RSS हमले न करता. JNU महान, वाम की वजह से नहीं, बल्कि विवेकवादी उदार अकादमिक परंपरा के कारण महान है.
RSS अपनी नई टैंक मुहिम के बहाने, JNU के बारे में यह धारणा फैलाने की कोशिश कर रहा है कि JNU को ‘मानवता विरोधी और राष्ट्रविरोधी’ संस्थान के रूप में कलंकित किया जाय.

पहले हम यह जान लें कि JNU को ये लोग नापसंद क्यों करते हैं?

देश में और भी विश्वविद्यालय हैं, उनको बदनाम करने की कोई मुहिम नहीं चल रही, क्योंकि वे सब RSS और टैंक कल्चर के क़ब्ज़े में हैं !

RSS की JNU के प्रति घृणा का प्रधान कारण है JNU के अंदर उच्च अकादमिक माहौल, लोकतान्त्रिक संस्कृति और शिक्षक-छात्र संबंध. JNU में देश के अन्य विश्वविद्यालयों के जैसे शिक्षक -छात्र संबंध नहीं हैं. यहां अधिकांश शिक्षक अपने छात्रों को मित्रवत मानकर बातें करते हैं. ज़्यादातर शिक्षकों के अकादमिक आचरण में पितृसत्तात्मकता का नजरिया नहीं है. यहाँ, वे शिक्षक होते हैं गुरू नहीं.

यह वह प्रस्थान बिंदु है जहाँ से JNU अन्य विश्वविद्यालयों से अलग है.
दूसरी बडी चीज है सवाल खड़े करने की कला. यह कला यहां के समूचे माहौल में है. यहां छात्र सवाल करते हैं साथ ही “खोज” के नजरिए को जीवन का लक्ष्य बनाते हैं. कक्षा से लेकर राजनीतिक मंचों तक कैंपस में सवाल करने की कला का साम्राज्य है. यह दूसरा बडा कारण है जिसके कारण JNU को RSS नापसंद करता है. RSS को ऐसे कैंपस चाहिए, जहाँ छात्रों में सवाल करने की आदत न हो, खोज करने की मानसिकता न हो.

उल्लेखनीय है जिन कैंपस में सवाल उठ रहे हैं वहीं पर RSS के बमबटुकों के साथ, लोकतांत्रिक छात्रों और शिक्षकों का संघर्ष हो रहे है.
RSS ऐसे छात्र -शिक्षक पसंद करता है जो हमेशा “जी-जी” करता चले और सवाल न करें !

RSS वाले अच्छी तरह जानते हैं कि JNU के छात्र वामपंथी नहीं हैं. वे यह भी जानते हैं JNU के अंदर RSS की शिक्षकों में एक ताकतवर लॉबी है. इसके बावजूद वे JNU के बुनियादी लोकतांत्रिक चरित्र को बदल नहीं पा रहे हैं. यही वजह है वे बार -बार छात्रों और शिक्षकों पर हमले कर रहे हैं. इन हमलों के लिए नियोजित ढंग से मीडिया का दुरूपयोग कर रहे हैं. राष्ट्रवाद और हिंदुत्व तो बहाना है.

असल लक्ष्य तो JNU के लोकतांत्रिक ढाँचे और लोकतांत्रिक माहौल को नष्ट करना है. संघ को लोकतांत्रिक माहौल से नफरत है. उसे कैंपस में अनुशासित माहौल चाहिए जिससे कैंपस को भोंपुओं और भोंदुओं का केन्द्र बनाया जा सके.
JNU छात्रसंघ का संविधान, तीसरी सबसे महत्वपूर्ण चीज है जिसे RSS नष्ट करना चाहता है. JNU देश का अकेला विश्वविद्यालय है, जहाँ छात्रसंघ पूरी तरह स्वायत्त है. छात्रसंघ के चुनाव स्वयं छात्र संचालित करते हैं. छात्रसंघ के चुनाव में पैसे की ताकत की बजाय विचारों की ताकत का इस्तेमाल किया जाता है. छात्रों को अपने पदाधिकारियों को वापस बुलाने का भी अधिकार है. छात्रसंघ किसी नेता की मनमानी के आधार पर काम नहीं करता, बल्कि सामूहिक फैसले लेकर काम करता है.

छात्रसंघ की नियमित बैठकें होती हैं और उन बैठकों के फैसले, पर्चे के माध्यम से छात्रों को सम्प्रेषित किए जाते हैं. छात्रसंघ के सभी फैसले सभी छात्र मानते हैं और उनका सम्मान करते हैं.

विवादास्पद मसलों पर छात्रों की आमसभा में बहुमत के आधार पर बहस के बाद फैसले लिए जाते हैं.

ये सारी चीजें छात्रों ने बडे संघर्षों के बाद हासिल की हैं.

इनके निर्माण में वाम छात्र संगठनों की अग्रणी भूमिका रही है.

जाहिरा तौर पर RSS और बमबटुकों को इस तरह के जागृत छात्रसंघ से परेशानी है और यही वजह है बार बार छात्रसंघ पर हमले हो रहे हैं.

इसके विपरीत RSS संचालित छात्रसंघों को देखें और उनकी गतिविधियों को देखें तो अंतर साफ समझ में आ जाएगा.
JNU में टैंक कल्चर के प्रतिवाद की परंपरा रही है. टैंक कल्चर वस्तुत: युद्ध की संस्कृति को अभिव्यंजित करती है. JNU के छात्रों का युद्धके प्रतिवाद का शानदार इतिहास रहा है. इस्रायल के हमलावर रूख के खिलाफ प्रतिवाद से लेकर वियतनाम युद्ध के प्रतिवाद तक, अफ़ग़ानिस्तान में सोवियत सैन्य हस्तक्षेप के खिलाफ प्रतिवाद से लेकर तियेनमैन स्क्वेयर पर चीनी टैंक दमन के प्रतिवाद तक छात्रों के सामूहिक प्रतिवाद की JNU छात्रसंघ की परंपरा रही है. JNU के छात्रों को मानवतावादी नजरिए से सोचने-समझने और काम करने की प्रेरणा, वहाँ के पाठ्यक्रम और परिवेश से मिलती है, जिसे RSS पसंद नहीं करता.
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जगदीश्वर चतुर्वेदी 

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