कोईलीबेडा : कर्नाटक में काम करने गये दो आदिवासी युवक का शव आया गाँव . एजेंट के चक्कर और ठेकेदार के जाल में फंसे थे दोनों नौजवान .

कोयलीबेड़ा : 2.08.2018

कोयलीबेड़ा से नियत श्रीवास

कोयलीबेड़ा क्षेत्र के केसेकोडी ग्रामपंचायत के संबलपुर के भट्टीपारा से काम की तलाश में निकले युवको की लाश आज घर पहुंची,युवक बोर गाड़ी में काम करने कर्नाटक राज्य गए हुए थे ,लाश देख परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है,घर के लोग यकीन ही नही कर पा रहे कि उनके लाडले अब उनके बीच नही रहे, दोनों युवक को परिजनों ने मुखाग्नि दी गई है,गांव में मातम छाया हुआ है। दोनों युवक एक ही बस्ती से हैं भट्टीपारा सम्बलपुर।

शमशान में जल रही इस दो लाश ,एक 16 वर्षीय नाबालिक श्रवण मंडावी की चिता है तो दूसरी 21 वर्षीय दिनेश मंडावी की, जो चंद पैसो के लालच में दलाल के चंगुल में फंस कर ये युवक बोर गाड़ी में काम करने कर्नाटक गए हुए थे,मैसूर के नज़दीक कोटे क्षेत्र में गाड़ी अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई जिसमें क्षेत्र के दो आदिवासी युवको की मौत मौके पर ही हो गई…घटना स्थल में मृतक के दोस्त सहदेव व अन्य ने भी काफ़ी बचाने का प्रयास किया गया पर उनकी मौत हो गई. अन्य तीन घायल भी हुए जो नारायणपुर क्षेत्र के बताए जा रहे हैं जिनका इलाज मैसूर के सरकारी अस्पताल में होने की बात कही गयी है उनके परिजनों को सूचना भी मिली कि नही यह किसी को खबर नही।

इतना ही नही उस बोर गाड़ी के मालिक के दूसरे गाड़ी में मृतक का भाई ……..भी काम कर रहा था जिसे बताया तक नही गया कि इस घटना से उसके भाई की मौत हो गई है…बोर गाड़ी के मालिक ने फोन कर परिजनों को सूचना की एक्सीडेंट में ये दोनों युवक घायल हो गए है जिनका इलाज़ मैसूर के सरकारी अस्पताल में चल रहा है,मृतक का भाई जब मैसूर पहुँचने ही वाला था तो करीब 30 km दूर उसे सच्चाई का पता चला की दोनों युवकों की मौत हो चुकी है जिन्हें फ्रीज़र में रखा गया है।

 

घटना 24 जुलाई को सुबह 9 बजे हुई ,तब से लेकर अब तक दोनों मृतकों के मैसूर के सरकारी अस्पताल में रखा गया था जिन्हें आज मैसूर से शव वाहन से गांव लाया गया।बेरहम सेठ ने इन मृतक युवको के परीजनो को एक रुपये तक नही दिया और जब परिजन अस्पताल पहुंचे तो सेठ मुर्गम मैसूर से नदारद था।

सरकार लाख दावे कर ले कि बीहड़ इलाको में शिक्षा, जागरूकता और रोजगार का स्तर बढ़ा है पर इस तरह की घटनाएं सरकार को आईना दिखा रही है कि रोजगार,शिक्षा और जागरूकता के क्षेत्र में अभी बहुत से काम करना बाकी है ताकि चंद पैसे के लिये  किसी एजेंट के चक्कर मे न पड़े और पलायन रुक सके और इस तरह की घटना दुबारा घटित न हो…

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कोयलीबेड़ा से नियत श्रीवास

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