छतीसगढ़ सरकार ने केन्द्रीय कानून और हाईकोर्ट के निर्देश के बाबजूद संविदाकर्मी महिलाओं को 6 माह का मातृत्व अवकाश आदेश जारी नहीं किया .: छतीसगढ बचाओ आंदोलन ने की मांग ,एक अप्रेल 2017 से लागू करे आदेश .

31.07.2018

संविदाकर्मी महिलाओं को 6 माह का मातृत्व अवकाश देने बनाये गए केंद्रीय कानून को डेढ़ साल तक लागू न करना रमन सरकार का महिलाओं के प्रति असंवेदनशील रवैया दर्शाता हैं।

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन का मानना हैं कि राज्य सरकार महिला अधिकारों के प्रति संवेदनशील नही हैं अन्यथा इतने महत्वपूर्ण कानून को लागू करने में डेढ़ वर्ष का समय नही लगाती। देश की संसद ने मार्च 2017 को विधेयक पारित कर संविदाकर्मी, संगठित, असंगठित क्षेत्र की महिला कर्मियों को 6 माह के मातृत्व अवकाश का प्रावधान किया गया। दिनांक 1 अप्रेल 2017 से “मातृत्व अवकाश संशोधन अधिनियम” जम्मू कश्मीर को छोड़कर पूरे देश मे लागू हुआ। लगभग डेढ़ साल पूर्व बने इस कानून को छत्तीसगढ़ में केबिनेट निर्णय के द्वारा आज से लागू किया गया जबकि नियमतः इसे 1 अप्रेल से ही लागू हो जाना था।

लगभग डेढ़ वर्ष तक कानून को लागू नही करना अपने आप मे कई सवालों को पैदा करता हैं ? राज्य सरकार को बताना चाहिए कि ऐसे क्या कारण थे जिसके कारण इतने महत्वपूर्ण केंद्रीय कानून को लागू नही किया गया। इस समयाविधि में प्रदेश की हजारों महिला कर्मचारी कानूनी प्रावधान होने के बाबजूद भी इसके लाभ से वंचित रही। यहां तक कि कुछ महिला कर्मचारियो द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में केश दर्ज करवाया गया था जिस पर न्यायालय ने महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश का लाभ देते हुए राज्य सरकार को इस सम्वन्ध में आदेश जारी करने कहा था, लेकिन उसके वाबजूद भी सामान्य प्रशासन विभाग इस मामले पर चुप्पी साधे रहा।
एसा लगता है कि चुनावी लाभ के लिये विधानसभा चुनाव के पहले इसको लागू करके लाम लेने की कोशिश की जा सकती हैं .

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन मांग करता हैं कि राज्य सरकार कानून को 1 अप्रेल 2017 से पूर्ववर्ती लागू करे और उस समयावधि में जो
महिला कर्मी इस लाभ से वंचित रही हैं उन्हें कानूनी अवधि के तहत 180 दिन का अवकाश या नगदी भुगतान किया जाए। इसके साथ ही 10 या उससे अधिक संख्या वाले संगठित, असंगठित कार्यस्थलों पर भी इसे लागू करने शीघ्र दिशानिर्देश जारी करे।

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