एसईसीएल बलगी- सुराकछार परियोजना   :  भू-धसान क्षेत्र में फिर से हुआ हादसा – एसईसीएल के खिलाफ ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश .: 10 साल पहले अवैधानिक तरीके से किये गए डी-पिलरिंग खेतो को निगल रहा : माकपा कोरबा

एसईसीएल बलगी- सुराकछार परियोजना   :  भू-धसान क्षेत्र में फिर से हुआ हादसा – एसईसीएल के खिलाफ ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश .: 10 साल पहले अवैधानिक तरीके से किये गए डी-पिलरिंग खेतो को निगल रहा : माकपा कोरबा

बलगी सुराकछार  / 26.07.2018 

सपूरन कुलदीप की रिपोर्ट 

कोयला उत्खनन के बाद फेस को बंद करने के लिए असुरक्षित डी पिलरिंग करने के कारण एसईसीएल बलगी- सुराकछार परियोजना के अंतर्गत सुराकछार बस्ती के किसानों की मुसीबतें बढ़ती ही जा रही है । कल फिर से धसान क्षेत्र में लगभग 100 मीटर लंबी और 10 मीटर चौड़ी क्षेत्र में 2 मीटर गहरी कटाव बढ़ने से रामसिंह नामक किसान का खेत बर्बाद हो गया ।

माकपा नेता सपुरन कुलदीप ने घटना स्थल का दौरा कर जायजा लेने के बाद बयान जारी कर बताया कि वर्ष 2007-08 में बलगी 3-4 न0 खदान में कोयला उत्खनन पश्चात फेस को बंद करने के लिए डी पिलरिंग विधि का उपयोग किया गया था जिसके बाद लगभग 60 एकड़ खेतो में धसान और दरार आ गयी थी जिससे 52 किसानों को भारी नुकसान हुआ था । 10 फिट जमीन बैठ जाने से पूरे क्षेत्र का बरसात की पानी की दिशा बदल गयी थी और खेतों में कृषि कार्य नहीं हो पा रहा है इसको लेकर कई बार आंदोलन किया जा चूका है तथा 2012 में त्रिपक्षीय समझौते में हर साल फसल क्षतिपूर्ति मुआवजा और प्रभावित खेतो का मरम्मत कराने पर सहमति बनी थी किन्तु एसईसीएल की आनाकानी नीति से आज तक मरम्मत नहीं किया जा सका है । डेढ़ माह पूर्व एसईसीएल हेडक्वाटर से केंद्रीय टीम ने मौके का निरीक्षण किया था और लंबित मुआवजा सहित खेतो का मरम्मत कराने का आश्वाशन दिया था किन्तु मुआवजा वितरण में भी नया नया फार्मूला लगाकर देरी किया जा रहा है ।

बलगी कार्यालय में आज इसी बात को लेकर माकपा नेता ने उपस्थित सारे अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए किसानों के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया और गाँव पहुंचकर मुआवजा वितरण करने की मांग किया ।

*एसईसीएल पर अपराधिक मामला दर्ज कराएंगे*

प्रभावित ग्रामीणों के साथ माकपा नेता सपूरन कुलदीप ने बैठक कर पूरी परिस्थिति का उल्लेख करते हुए जानकारी दिया कि आधिकारिक सुचना के आधार पर आगामी दो सालों में बलगी परियोजना बन्द हो जायेगी और किसानों की समस्या का समाधान नहीं हो पायेगा । उन्होंने बताया कि जिस तेजी से धसान के कारण स्खलन बढ़ रहा है उससे 10 सालो के अंदर प्रभावित एरिया से मात्र 200 मीटर में बसा गाँव उसके चपेट में आ जायेगा इसलिए समय रहते इस मामले पर कानूनी कार्यवाही शुरू करनी होगी । पुरे ग्रामीणों ने इसमें अपनी सहमति जताते हुए निर्णय लिया है कि सबंधित अधिकारियो पर असुरक्षित तरीके से डी पिलरिंग करने और जानमाल को खतरा में डालने तथा कृषि भूमि को बर्बाद करने के लिए केस दर्ज करवाई जाएगी तथा जमीन का अधिग्रहण कर रोजगार और मुआवजा की मांग को लेकर हाईकोर्ट में अपील की जायेगी ।

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