||  देवी प्रसाद मिश्र की कविताएँ || ” दस्तक़ ” के लिए प्रस्तुति : अनिल करमेले

||  देवी प्रसाद मिश्र की कविताएँ || ” दस्तक़ ” के लिए प्रस्तुति : अनिल करमेले

|| अस्वीकार की अनन्य ||

इन्द्र, आप यहाँ से जाएँ
तो पानी बरसे

मारुत, आप यहाँ से कूच करें
तो हवा चले

बृहस्पति, आप यहाँ से हटें 
तो बुद्धि कुछ काम करना शुरू करे

अदिति, आप यहाँ से चलें
तो कुछ ढंग की संततियाँ जन्म लें

रूद्र, आप यहाँ से दफ़ा हों
तो कुछ क्रोध आना शुरू हो

देवियों-देवताओ! हम आपसे
जो कुछ कह रहे हैं
प्रार्थना के शिल्प में नहीं.

|| कविताएँ लिखनी चाहिए ||

जैसा कि एक कवि कहता है कि मातृभाषा में ही लिखी जा सकती है कविता 
तो मातृभाषा को याद रखने के लिए लिखी जानी चाहिए कविता
और इसलिए भी कि यह समझ धुंधली न हो 
कि पिता पहला तानाशाह होते हैं 
और जैसा कि मैं कह गया हूं मांएं पहला कम्युनिस्ट
पड़ोसियों ने फ़ासिस्ट न होने की गारंटी कभी नहीं दी

इलाहाबाद से दिल्ली के सफर के शुरू में
एक आदमी ने सीट को एक्सचेंज करने का प्रस्ताव रखा
फिर उसने कहा कि और क्या एक्सचेंज किया जा सकता है 
मैंने कहा कि मैं किसी को अपना कोहराम नहीं देने वाला 
जाते-जाते वह कह गया कि झूठ पर फ़िल्म बनाने के बहुत पैसे मिलते हैं
मैंने गायब होने के पहले कहा
कि जो संरक्षण संविधान में कवि को मिलना चाहिए था वह गाय को मिल गया
पान खाते हुए वह हँस पड़ा और उसका सारा थूक मेरे मुँह पर पड़ गया 

कविताएं लिखनी चाहिए ताकि कवि नैतिक अल्पसंख्यक न रह जाएं

कविताएं लिखी जानी चाहिए ताकि मुक्केबाज के तौर पर मुहम्मद अली की याद रहे 
और देश के तौर पर वियतनाम की 
और बसने के लिए फिलिस्तीन से बेहतर कोई देश न लगे
और वेमुला होना सबसे ज्यादा मनुष्य होना लगे

कविताएं लिखनी चाहिए क्योंकि ऋतुओं और बहनों के बगल से गुजरने को 
कविताएं ही रजिस्टर करती हैं और पत्तों और आदमी के गिरने को

कविताएं लिखी जानी चाहिए क्योंकि कवि ही करते हैं वापस पुरस्कार 
और उन्हें ही आती है अखलाक पर कविताएं लिखते हुए रो पड़ने की अप्रतिम कला।

|| सत्य को पाने में मुझे अपनी दुर्गति चाहिए ||

औरों की मैं नहीं जानता 
लेकिन मेरा काम अर्णव गोस्वामी के बिना चल जाता है 
सत्य को पाने में मुझे अपनी दुर्गति चाहिए —
आइंस्टीन का बिखराव जिसमें बाल भी शामिल हों तो क्या हर्ज
चे का चेहरा और स्टीफन हाकिंग का शरीर
फासबिंडर की आत्मा और ऋत्विक घटक का काला-सफेद

मैं अपने प्रतिभावान होने का सर्वेक्षण कुछ दिनों के लिए टाल रहा हूं— 

बचे समय में मैं अपने दुस्साहस से काम चला लूंगा और असहमति से

मैं अपने काव्य-पाठ में खाली हॉल से आश्वस्त हुआ 

इस्मत-चुगताई की अंत्येष्टि में तीन लोग थे 
रघुवीर सहाय के दाह-संस्कार में कुछ ज्यादा थे
मैं भी था लेकिन मुझे लोग नहीं जानते थे अब भी नहीं जानते 
तब फेसबुक नहीं था और अब है तो मुझे उस पर होना नहीं आया

मेरे पास अजीब झुंझलाया चेहरा था
कि जैसे किसी सतत असहमत का आधा अमूर्त चेहरा चारकोल से बनाकर 
कलाकार अपनी प्रेमिका के साथ भाग गया हो 

जिस समाज में
सनी लियोनी, मोदी और अमिताभ बच्चन के ट्विटर पर सबसे ज्यादा लाइक-फॉलोवर हों 
उसमें रात एक बजे खुद के साथ खुद का होना 
और इस बात पर नींद का न आना
कि सिंगापुर में रहने वाला आपका भांजा मोदी समर्थक है काफी अजीब और बियाबान विपक्ष है

मैं अंदर-अंदर ही फटती नस से मरूंगा — 
यह केवल संकेत है कि कौन किससे मरेगा
मतलब कि संस्कृति मंत्री अपने भीतर के जहर से मरेगा 
आइए अब चलते हुए पूछ ही लेते हैं कि लोग शाहरुख खान की फिल्में क्यों देखते हैं 
और आईपीएल के बीसियों मैच और उनमें फंसा राजीव शुक्ला का बहुत खाया चेहरा

अगर आपको याद हो तो मैंने कई बार कहा है कि कोई भी प्रेम अवैध नहीं होता 
और अत्याचारी से घृणा सबसे रोमांटिक कार्यभार है 

पृथ्वी छोड़ने में मुझे देर हो रही है
लेकिन प्रेमिका का बिस्तर छोड़ने में भी मैं कई तरह के बहाने करता रहा हूं 

चलिए इस कविता को यहीं खत्म मान लें
और मेरे लिए दिल्ली छोड़ने के टिकट का चंदा इकट्ठा करें

मैं पता नहीं कब से यही सोचे जा रहा हूं
कि एक फासिस्ट का नाम रमाकांत पांडे कैसे हो सकता है।

|| फ़ासिस्ट ||

मैंने कहा कि आप फ़ासिस्ट हैं
तो उसने कहा कि वह मनुष्य है

मैंने कहा कि आप फ़ासिस्ट हैं
तो उसने कहा कि वह जनप्रतिनिधि है

मैंने कहा कि आप फ़ासिस्ट हैं
तो उसने कहा कि उसके पास आधार-कार्ड है

मैंने कहा कि आप फ़ासिस्ट हैं
तो उसने कहा कि वह शाकाहारी है

मैंने कहा कि आप फ़ासिस्ट हैं
तो उसने कहा कि मुद्दा विकास है

(मैंने बिनास सुना)

मैंने कहा कि आप फ़ासिस्ट हैं
तो उसने कहा कि उसके पास तीस फ़ीसदी का बहुमत है
सत्तर फ़ीसदी के अल्पमत की तुलना में

मैंने कहा कि आप फ़ासिस्ट हैं तो उसने कहा कि
गांधी को हमने नहीं मारा हममें से किसी ने उन पर गोली चला दी

मैंने कहा कि आप फ़ासिस्ट हैं
तो उसने कहा कि अब जो कुछ हैं हमीं हैं

*० देवीप्रसाद मिश्र*
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*दस्तक* के लिए प्रस्तुति : *अनिल करमेले*

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