अभियुक्त दबाव डाल रहे हैं मुकदमा वापस लेने के लिये . बीजापुर की आदिवासी युवती को दो साल तक बंधक बनाने वाले ए एस आई और शिक्षिका पर एफआईआर के बाद दो महीने बाद भी नही हुई गिरफ्तारी और नही हुआ निलंबन .: एस पी और सीईओ से मिले अधिवक्ता गण .

अभियुक्त दबाव डाल रहे हैं मुकदमा वापस लेने के लिये . बीजापुर की आदिवासी युवती को दो साल तक बंधक बनाने वाले ए एस आई और शिक्षिका पर एफआईआर के बाद दो महीने बाद भी नही हुई गिरफ्तारी और नही हुआ निलंबन .: एस पी और सीईओ से मिले अधिवक्ता गण .

बिलासपुर / 12.07.2018

बीजापुर से आदिवासी युवती को पुलिस के एएसआई और उनकी शिक्षिका पत्नी ने लगातार दो साल अपने घर मे बंधक बनाये रखने वाले प्रकरण में अभी तक एफ आई आर दर्ज होने के दो महीने बाद भी अभी तक न तो अभियुक्त की गिरफ्तारी हुई और न उसकी पत्नी पर कोई कार्यवाही की गई
पिछले दिनो अभियुक्त गण युवती के परिजनों को फोन पर धमकी दे रहे है कि मुकदमा वापस लेले।
आज इस मामले को लेकर अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला , अधिवक्ता दिव्या जायसवाल और सामाजिक कार्यकर्ता नीलोत्पल शुक्ला पुलिस अधीक्षक तथा सीईओ जिला पंचायत बिलासपुर से मिले और तत्काल कार्रवाही की मांग की .

मुख्य कार्य पालन अधिकारी जिलापंचायत बिलासपुर को आवेदन में लिखा गया कि .

दिनाँक 4 मई 2018 को शिक्षाकर्मी शशि प्रभा सिंह द्वारा एक बेहद झ्झोर देने वाला कृत्य सामने आया था जिसमे अभियुक्त शिक्षाकर्मी शशि प्रभा पति श्री शैलेन्द्र सिंह,निवासनी- सिरगिट्टी के द्वारा अपने पति बर्खास्त पुलिस कर्मी शैलेन्द्र सिंह के साथ मिलकर एक आदिवासी लड़की को लगातार दो सालो से बंधक बनाकर रखा था और उसके साथ लगातार मार पीट करते थे और काम कराते थे. अभियुक्तगण द्वारा किया गया ये कोई पहला मामला नही है, इसके पहले भी बसते संभाग में इस दंपत्ति द्वारा ऐसा कृत्य किया जाता रहा है. आदिवासी लड़की को अभिक्युत शशि प्रभा सिंह के द्वारा यह कहकर लाया गया था कि लड़की को अच्छे से रखेंगी और उसको पढायेगी और पैसे भी देगी परन्तु ये सब बाते झूठ निकली और लड़की को लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा.

मामला सामने आने के बाद आरोपी शिक्षा कर्मी शशिप्रभा सिंह व उसके पति संगीन धाराओ में मामला दर्ज किया गया,यही नही उसी दौरान मामले को दबाने हेतु आरोपीगण द्वारा पीड़िता के पिता को किडनैप कर झूठे शपथपत्र बनवा कर मामले को रफा दफा करने का भी पूरा प्रयास किया गया था, किडनैप करने वाला मामला सामने आने बाद शशिप्रभा सिंह सहित उनके पति पर एक अन्य किडनैप करने का मामला भी सिरगिट्टी थाने दर्ज किया गया था.
चुकी मामला काफी गंभीर था इसलिए लगातार न्यूज़ पेपर में छापा भी गया, जिसके बाद शशि प्रभा सिंह के पति जो कि सिविल लाइन थाने में पदस्थ थे उसे बर्खास्त भी कर दिया गया. कित्नु आज दिनाँक तक शशिप्रभा सिंह जो कि शिक्षा कर्मी है, के खिलाफ सम्बन्धित विभाग से कोई कार्यवाही नही हुयी है और न ही कोई बर्खास्तगी कि खबर सामने आई है.

एसपी से मिले अधिवक्ता :

एस पी बिलासपुर से मिलकर अधिवक्ताओं ने कहा कि , बीजापुर कि आदिवासी लड़की के मामले में अब तक अभियुक्तगण की गिरफ्तारी करें शशि प्रभा सिंह को बर्खास्त किया जावे .

आवेदन पत्र में लिखा है कि कुछ समय पहले सिविल लाइन थाने में पदस्थ बरखास्त ASI शैलेन्द्र सिंह व उनकी पत्नी शशि प्रभा सिंह द्वारा बीजापुर की एक लड़की को लगातार 2 वर्ष से बंधक बनाकर रखने का मामला सामने आया था. जब लड़की को उसके घर से छुड्वाया गया था तब लड़की कि हालत काफी बुरी तरह पायी गयी थी. जिसके बाद दोनों पति पत्नी के सिरगिट्टी थाने में 294, 506,323,342,34 ipc, sc-st का 318, 327 के अंतर्गत दिनाँक 4 /05 /2018 को मामला दर्ज किया गया था. मामला साफ़ तौर पर मानव तस्करी का था, इसके बावजूद मानव तस्करी कि धारा नही जोड़ी गयी थी. यह बोला गया था कि माँ बाप में से किसी का बयान जब तक नहीं हो जाता तब तक नही जोड़ा जा सकता, जबकि लड़की को जब रिहा कराया गया था, उस वक्त लड़की बालिग़ ही थी और बार बार अपनी कहानी बता रही थी कि जबरन उसको रोककर रखा गया था और बस्तर से झूठ बोलकर लाया गया था और उससे काम कराया जाता था, पैसे मांगने पर मारा जाता था.
इसके अलावा मामला दर्ज होने के दिन से ही शैलेद्र सिंह व शशि सिंह द्वारा अपने अपने रिश्तेदार के साथ मिलकर लड़की के पिता व उसके मुहबोले मामा को अगवा करके मामले को रफा दफा करने हेतु डराया धमकाया गया था और उनसे कुछ झूठे शपथपत्र व सादे कागज पर दस्तखत भी जबरन ले लिया गया था, पिता को अगवा का मामला सामने आने के बाद एक अन्य अगवा कर लेने कि शिकायत सन्नू पूनेम जो कि पीड़ित लड़की का पिता है, के तरफ से सिरगिट्टी थाने में 10/05/2018 को दर्ज करवाई गयी थी. जिसमे अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम की धारा नही जोड़ी गयी थी. थानेदार साहब ने कहा था कि बाद में जोड़ी जायेगी किन्तु धारा जोड़ी गयी या नही इसकी कोई जानकारी अब तक नही हो सकी है.
जब तक परिवार वालो के तरफ से बिलासपुर पुलिस कार्यालय के चक्कर काटे गये तब तक कार्यवाही अच्छे से हुइ और इसी के चलते शैलेन्द्र सिंह का साला गिफ्तार भी हो सका था किन्तु उसके बाद से आज तक शैलेन्द्र सिंह और उसकी पत्नी की गिरफ्तारी नही हो सकी है, और ना ही मामले में जोड़ी जाने वाली धाराओं के सम्बन्ध में अब तक कुछ बताया गया है. रिपोर्ट दर्ज हुए लगभग दो महीना हो चुका है और आज तक अभियुक्तगण बाहर मजे से घूम रहे है, जिसके कारण लगातार अभियुक्तगण पीड़ित के परिवार वालो को डरा धमका रहे है और केस वापस लेने का और बयान से मुकर जाने का दबाव बना रहा है. हाल ही में अभियुक्तगण के तरफ से पीड़ित आदिवासी लड़की बड़ी बहन को भी कॉल करके मुकदमा वापस लेने के लिए धमकी दी गयी है.

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