देश की पहली मुस्लिम महिला पायलेट मारिया की मुम्बई प्लेन क्रैश में मौत .

ज़ाकिर अली त्यागी की कलम से ….

29.06.2018

देश की पहली मुस्लिम पायलट मारिया ज़ुबेरी मुंबई प्लेन क्रैश में दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान गवा बैठी,मीडिया मारिया के घर पहुंची तो मीडिया माँ से बात करने लगी, मारिया की माँ दहाड़ मार मारकर ख़ूब रोने लगी, मैं रोते हुए नही देख पाया शायद आप भी नही देख पाओगे,क्योंकि हमें मालूम है जब किसी का बेटा या बेटी इस दुनिया से स्वर्ग सिधार जाता है माँ बाप के दिल पर क्या गुज़रती है।
मारिया की इस कोशिश को देखकर मुझे एक शायर की लाइन याद आ गई है जो कि सटीक है कि
औरों की मदद के लिए नुक़सान उठाना,
एक तर्ज़-ए-ईबादत है वह बेकार नही है।।

मारिया ने देश के लिए जान गवा दी जिसको आज देश सुपर हीरो के तौर पर याद कर रहा है, वैसे तो मारिया की मौत आनी ही थी लेकिन मौत की ज़िम्मेदार सरकार है, क्योंकि मारिया जिस चार्टर्ड प्लेन को फ्लाई करती थी उसमें अनेक खराबियां थी जिसमे सरकार की लापरवाही सामने आई है, सरकार अपने प्लेनो की देखभाल करती जिसमे सरकार ख़ुद सफ़र करती है लेकिन उन प्लेनों की देखभाल कौन करे जिनमे प्राइवेट व्यक्ति सफ़र करते हैं?कौन उनकी मौत की ज़िम्मेदारी ले?जाने वाले तो चले जाते है अपने माँ बाप को रुला और ज़ख्म दे जाते हैं जो कि पूरी ज़िंदगी भी नही भर सकते।

अल्लाह मरने वालों के घर वालो को सब्र दे, मारिया की माँ को दुःख सहने की सलाहियत व सरकार को हिदायत दे।

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