कबीर पर राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी -2018 : 23 वीं अखिल भारतीय कबीर कला प्रदर्शनी का उदघाटन डा. दिनेश मिश्रा द्वारा .

कबीर पर राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी -2018 : 23 वीं अखिल भारतीय कबीर कला प्रदर्शनी का उदघाटन डा. दिनेश मिश्रा द्वारा .

29.06.2018 / रायपुर 

महाकोशल कला परिषद व्दारा 23 वीं अखिल भारतीय कबीर कला प्रदर्शनी -2018 का उदघाटन महाकोशल कला वीथिका में मुख्य अतिथि डॉ.दिनेश मिश्र व्दारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। . कबीर पर आधारित यह प्रदर्शनी में प्रदेश में 23 वीं बार बृहत पैमाने पर आयोजित हुई है जिसमें अखिल भारतीय 50 कलाकारों की कबीर विषय पर आधारित 58 रचनाएँ जिसमें , व्यंगय चित्र , ग्राफिक ड्राईंग , जल, तैल .पेस्टल से निर्मित रचनाएँ प्रदर्शित की गई है .अंकों से कबीर का निर्माण, कबीर के नामों से कबीर रेखांकन का निर्माण , कोलाज माध्यम से कबीर का निर्माण हुआ है.

 

 

इस प्रदर्शनी में मध्य के प्रदेश के बालाघाट से जी.एल. चौरागढे की रचना , आंध्रप्रदेश के विशाखापटनम से पी.ऊषा की रचना , कर्नाटक से पांडूरंगाराव वुडकट तथा लिनोकट से कबीर का निर्माण , पेन,स्याही , जलरंग , पेस्टल , चारकोल , कजली , स्केच पेन , आदि माध्यम से रचना का निर्माण किया गया है ,मुजफ्रपुर से विमल विस्वास की रचना ,अहमदाबाद से अजय तिवारी की रचना , कोयम्बटूकर से रवि राज की रचना , बैंगलोर से विदुषिनी प्रसाद तथा दीपक विजय आर की रचना ,गोवा से सिद्धांत गायतोन्डे की रचना , महाराष्ट्र के नागपुर से समवेद शर्मा की रचना , मुबंई के मनीष महानंद की रचना स राजस्थान के उदयपुर से प्रमोद सोनी की रचना , उडीसा के कटक से बीजू पटनायक की रचना , गुजरात के बडौदा से दवे जलेंदु कुमार की रचना ,अहमदाबाद से अजय तिवारी की रचना , दिल्ली से गोपाल नासकर ,व सिद्धांत शर्मा का रेखांकन , केरल के त्रिचुर से एस.बालासुव्रमणियम की रचना, कलकत्ता से अंजन सेन तथा छत्तीसगढ , आदि राज्यों के कलाकारों का रंग सौदर्य व अनुभव गजब का प्रभाव उत्पन्न करता प्रदर्शित है .

 

कबीर के जीवन के विभिन्न पहलुओं को रेखाकिंत करती है . धनंजय ने कबीर के रौद्र रूप को रेखांकित किया है,सामभावी शर्मा ने कबीर के सौम्य रूप की , पिनाका नाग ने अपने गाँव के कबीर, स्वयं जैन ने कबीर के दोहों के साथ , स्तुति अग्रवाल ने कबीर के सौम्य रूप को , शुभ अग्रवाल व मीनल पुजारी ने कबीर व माँ को , अशोक अदनानी ने कबीर आध्यात्मिक स्वरूप की ,तो ए.व्ही .आदित्य ने कबीर के विराट स्वरूप की कहानी एक तरफ कही है ,सार्थ राय सागर ने कबीर व माँ के वात्सल्य की बात की है , तनिषा अग्रवाल ने कबीर की कृष्ण प्रेम की अभिव्यंजना का दृश्य साकार किया है , पार्थ राय सागर ने कबीर को साधक के रूप को चित्रों में पिरोया है , लुबिना बोस ने कबीर व माँ का मनोहारी चित्रण किया है .शुभम मंडल ने माँ के साथ कबीर का चित्र बनाया आदि विषय इस कला प्रदर्शनी में प्रदर्शित हैं .इस प्रदर्शनी छत्तीसगढ से श्याम निनोरिया , कल्याण प्रसाद शर्मा , अवतार सिंह भंगल , डॉ.प्रवीण शर्मा , विशाल कीर्ति जैन , उमेश चोपकर, असीम प्रताप हिरवानी , चंद्रकांत साहु, प्रीति लच्छवानी , अशोक अदनानी ,अमृता भट्टाचार्या ,नियति वत्स, रोमा लच्छवानी , तृणा विश्वास ,मीनल पुजारी , तरूण वंशपाल , प्रिनाका नाग , नीता परमार , मुत्युजंय , आदि कलाकारों की रचनाएँ प्रदर्शित हैं .

 

महाकोशल कला वीथिका में आयोजित इस प्रदर्शनी में 50 कलाकारों के 58 चित्रजो जल,तैल,पेस्टल, चारकोल , स्याही , एक्रेलिक , कोलाज, माध्यम से निर्मित रचनाएँ प्रद्रशित हैं .प्रदर्शनी दर्शकों के अवलोकनार्थ नि:शुल्क संध्या 06 बजे 07 बजे तक दिनाँक 30 जून 2018 तक खुली रहेगी.  साक्षी आकुला ने बडा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजुर ,पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दुर को रुपायित करती रचना बनायी है ।दिशा ठाकुर ने काल करे सो आज कर , आज करें सो अब पल में प्रलय होएगी बहुरी करेगा कब विषय को लेकर रचना का निर्माण किया ह

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