⚫🔘 कबीर जयंती पर विशेष रागनी  : कंवल भारती 

⚫🔘 कबीर जयंती पर विशेष रागनी  : कंवल भारती 

⚫🔘 कबीर जयंती पर विशेष रागनी  : कंवल भारती 

 

28.06.2018
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काशी के ब्राह्मण कबीर से उनकी जाति पूछते हैं. तो कबीर कहते हैं कि निर्गुण साधुओं से जाति नहीं, उनका ज्ञान पूछना चाहिए. कबीर किस तरह ब्राह्मण को जवाब देते हैं—

मत जाति की बात करे हे तू ब्राह्मण नादान।
जात ना पूछो निर्गुनिया की पूछ लीजिए ज्ञान।।टेक।।
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जात वरन कुल गोत पूछते, कैसा धर्म तुम्हारा।
यह तो धर्म नहीं, अधरम है, मानव का बंटवारा।
वह जग का भगवान नहीं, जो ब्राह्मण का रखवारा।
हम हैं साध ना जात वरन में है विश्वास हमारा।
हम अलख जगावें निर्गुन का मेटें सब अज्ञान।।1।।
जात ना पूछो निर्गुनिया की, पूछ लीजिए ज्ञान।।टेक।।
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अंजन सकल पसारा जग में जिसके हो तुम ध्यानी।।
अंजन ब्रह्मा अंजन शंकर, अंजन वेद की वानी।
अंजन आवे अंजन जावे, अंजन तीरथ पानी।
मेरे राम निरंजन अनहद, तेने नहीं पछानी।
राम निरंजन हिरदै बसता, न कहीं ठौर मकान।।2।।
जाति ना पूछो निर्गुनिया की पूछ लीजिए ज्ञान।।टेक।।
वह ना राम निरंजन, जो घर दशरथ के औतारा था।
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ना वह कृष्ण निरंजन, जिसने नाग कालिया मारा था।
ना महेश, विष्णु, ब्रह्मा, जिन्हें देवलोक ही प्यारा था।
ये तो सारे अंजन थे, पृथ्वी पे जुलम गुजारा था।
भोग के करनी सब मर खपगे, माटी के इन्सान।।3।
जात ना पूछो निर्गुनिया की पूछ लीजिए ज्ञान।।टेक।।
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पूछो ज्ञान हमारा हम हैं निर्गुन साधु जगत में।
करते ना विश्वास क़यामत, दोजख अर जन्नत में।
मन्दिर मस्जिद ना जावें, विश्वास करें मेहनत में।
साधू मा छत्तीस कौम हैं, तू किसकी खिदमत में।
कँवल कहें है कबीरदास का, निर्गुन ज्ञान महान।।4।।
जाति ना पूछो निर्गुनिया की पूछ लीजिए ज्ञान ।।टेक।।
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मत जाति की बात करे हे तू ब्राह्मण नादान।
जात ना पूछो निर्गुनिया की पूछ लीजिए ज्ञान।।टेक।।

 

कंवल भारती ,लेखक और कार्यकर्तो 

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