अबूझमाड़ में इलाज कराने से किया मना, 4 मासूमों की मौत


अबूझमाड़ में इलाज कराने से किया मना, 4 मासूमों की मौत 


लोटकर मो. इमरान खान
नारायणपुर। अबुझमाड़ में आज भी आदिवासी डॉक्टर और इलाज के नाम पर बिदकते हैं। इसी वजह से रोहताड़ गांव में पिछले 15 दिनों में एक ही परिवार के तीन बच्चों समेत चार मासूमों की मौत निमोनिया एवं पोषण की कमी से हो गई। अस्पताल तक आए इन बच्चों को घरवाले वापस ले गए थे। और तो और गांव में इनका इलाज करने पहुंची टीम का भारी विरोध किया गया। आदिवासी तीर कमान लेकर इन्हें मारने उठ खड़े हुए थे।
गांव में बीमारी की खबर मिलते ही यहां 108 एम्बुलेंस भेजा गया लेकिन गांव वालों ने बीमारों को ओरछा भेजने से मना कर दिया। बुधराम की बेटी लखमी (6), सपना(5) एवं बेटे कुमार(3) को किसी तरह ओरछा हॉस्पिटल लाया गया। यहां भी बुधराम और उसके परिजन इंजेक्शन लगवाने और दवा लेने से मना करते रहे जबकि वहां पदस्थ डॉ नेताम ने तीनों भाई-बहनों को तत्काल सीएचसी में दाखिल करने कहा था। इनकी पर्ची भी बना दी गई थी। किसी तरह लखमी के खून की जांच की गई लेकिन उसे मलेरिया नहीं निकला। डॉक्टर ने पाया कि ये बच्चे बुखार, उल्टी-दस्त एवं सर्दी खांसी से पीड़ित थे। बताया गया है कि उसे एक्यूट रेस्पाइरेटरी इन्फेक्शन यानि निमोनिया हुआ था। तीन-चार घंटे बाद तीनों बच्चों को उनके पिता ले गए। बताते हैं कि तीनों बच्चों के लिए दुआ-प्रार्थना की गई और उन्हें रोहताड़ के ही उरेवाया बस्ती के सिरहा पायको को दिखाया गया। 13 मई को लखमी की मौत हो गई। इसके बाद 19 मई को सपना और कुमार भी चल बसे। इस दौरान 17 मई को रोहताड़ की एक महिला का दो माह के बच्चे की भी मौत हो गई। बीएमओ डॉ बीएन बनपुरिया ने बताया कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने महिला को अच्छा भोजन करने की सलाह दी थी और दवा लेने कहा था। लेकिन महिला ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इससे वह अपने दो माह के बच्चे को ठीक से फीड नहीं कर पाई और बच्चे की मौत हो गई।
टीम ने डाला डेरा
जिला मुख्यालय से प्रभारी सीएमएचओ डॉ एमके सूर्यवंशी, डॉ टीएस नाग एवं जिला मलेरिया सलाहकार डॉ धर्मेश बघेल ने गांव तक पहुंचकर एक टीम को कैम्प करने कहा है। बताया गया है कि रोहताड़ में तीन टोले हैं और सभी के घर-घर जाकर कार्यकर्ता जांच कर रहे हैं। इस गांव में पहले दिन करीब 90 लोगों की जॉंच की गई। इसमें करीब 30 ग्रामीण मलेरिया पॉजीटिव पाए गए। सर्दी-खांसी , बुखार आदि रोगों से ग्रामीण ग्रस्त पाए गए। सभी ग्रामीणों के रक्त की जॉंच की जा रही है। आरएमए डॉ हेमंत साहू समेत ओरछा के कर्मचारी वहां डेरा डाले हुए हैं।
मारपीट पर उतारू हुए लोग
जब स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी गांव पहुंचे तो गांव के तीर-कमान से लैस लोगों ने भारी विरोध किया। यहां तक की एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के साथ गाली-गलौज भी की गई। डॉक्टरों की सलाह भी वे नहीं माने और झाड़फूंक कराने की बात कहते रहे। एक ग्रामीण ने कहा कि वह ‘माता’ से अनुमति लेगा और इसके बाद भी हॉस्पिटल जाएगा। तब डॉक्टरों ने कहा कि वह ‘माता’ को बुलाए हम उससे अनुमति लेंगे। स्वास्थ्य कार्यकर्ता मोजेस ली यहां 18 साल से सेवा दे रहे हैं और वे गोण्डी भली-भांति जानते हैं। वे अफसरों के साथ थे और दुभाषिए का काम कर रहे थे। यहां कोई हिन्दी या हल्बी नहीं समझता है। बीमार बच्चों और ग्रामीणों के लिए दवा दी गई लेकिन वे भी इसे लेने को तैयार नहीं थे। प्रभारी सीएमएचओ ने बताया कि यहां अज्ञानता और अशिक्षा के चलते इलाज करने में काफी परेशानी आई। अभी भी मेडिकल टीम गांव में है। काफी समझाने के बाद कुछ लोग अपने बच्चों का इलाज करवाने सहमत हुए।
बसे हैं दण्डामी माड़िया
बताते हैं कि रोहताड़ गांव में बस्तर जिले के बास्तानार इलाके से दण्डामी माड़िया आकर बस गए हैं। वे झाड़ फूंक पर ज्यादा यकीन करते हैं। ज्ञात हो कि बीस साल पहले से मारडूम और बारसूर के रास्ते लोहंडीगुड़ा, बास्तानार इलाके से दंडामी माड़ियों को अबूझमाड़ में आना शुरू हुआ है। यहां कई परिवार बस गए हैं।
बारिश में रोहताड़ बनेगा टापू
ओरछा से रोहताड़ गांव महज 18 किमी दूर है लेकिन मेडिकल टीम को वहां तक जाने में एक घंटा लगा। इस मार्ग पर चार पुल बनने हैं। इसमें से दो पुलों की सेंटरिंग नहीं हो पाई है। दो पुल अधूरे हाल में हैं। रास्ते में माओवादियों ने मिक्सर मशीन और अन्य वाहनों को जला दिया है। सड़क मार्ग नहीं होने से सरकारी तंत्र की पहुंच मुश्किल है। बारिश में ये गांव पहुंचविहीन हो जाता है। ये जुलाई से ही टापू में बदल जाता है। गांव में एक हैंडपंप ड्राई हो गया है। रामकृष्ण मिशन आश्रम की टीम इसे बना रही है। एक और हैंडपंप स्कूल है। गांव में स्वास्थ्य केन्द्र नहीं हैं। यहां के लोगों में इस वजह से स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता कम है और वे सिरहा-गुनिया के चक्कर में आ जाते हैं।
स्थिति काबू में
रोहताड़ गांव में अब स्थिति नियंत्रण में है। यहां मेडिकल टीम को इलाज करने में काफी परेशानी हो रही है क्योंकि अज्ञानता और अशिक्षा के चलते ग्रामीण डॉक्टरों से इलाज करवाना नहीं चाहते हैं। उन्हें दवा देना भी मुश्किल है। इलाज करने गई टीम को ग्रामीणों के गुस्से का भी शिकार होना पड़ रहा है।
-डॉ. एमके सूर्यवंशी
प्रभारी सीएमएचओ
नारायणपुर

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