डोंगरगढ : खुर्सीपार झूठी मुठभेड़ मे दो आदिवासी युवको की हत्या के खिलाफ आदिवासी महापंचायत .फोरेंसिक जांच,दुबारा पोस्टमार्टम और वाज़िब मुआवजे की मांग.अदालत का दरवाजा खटखटायेंगे .: सर्व आदिवासी समाज .

डोंगरगढ : खुर्सीपार झूठी मुठभेड़ मे दो आदिवासी युवको की हत्या के खिलाफ आदिवासी महापंचायत .फोरेंसिक जांच,दुबारा पोस्टमार्टम और वाज़िब मुआवजे की मांग.अदालत का दरवाजा खटखटायेंगे .: सर्व आदिवासी समाज .

डोंगरगढ / 11.06.2018

आज डोंगरगढ के आदिवासी भवन मे सर्व आदिवासी समाज ने महापंचायत आयोजित की और छतीसगढ सरकार और पुलिस के रवैये पर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया . 29 मई को पुलिस ने नक्सली मुठभेड़ के नाम पर दो आदिवासी युवकों को पकडकर मारपीट के बाद गोली मार दी . जब पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया था तो कानून कोर्ट में पेश करना चाहिए था न कि गोली मार दी जाये .

हत्या इस तरह की गई .

राजनांदगांव ,बोरतलाव ,खुर्सीपार : ईनामी 29 मई को बोरतलाव क्षेत्र मे कनपुरा के पास चंदिया डोंगरी के जंगल मे पुलिस ने तीन नक्सलियों को मारने का दावा किया था ,जिसमे एक इनामी नक्सली आज़ाद के साथ दो अन्य नक्सलियों के मारे जाने की जानकारी पुलिस ने दी थी .

जब की ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम खुर्सीपार खुर्द के आश्रित ग्रामपंचायत चौथना के दो युवा आदिवासी राजकुमार कोवाची और रूपलाल मलगाव को पुलिस ने पकड़ लिया और पहले दोनों को पेड़ से बांध कर उसी पेड़ का डंडा तोड़कर बुरी तरह मारपीट किया और मार मार कर बेहोश कर दिया ,बाद में दोनो को गोली मार दिया .उसके बाद उन्हें माओवादी बता कर उनकी लाश पत्रकारों को दिखा दी गई, जब कि उन दोनों का नक्सलियों से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं था . जबकि रूप लाल मलगांव तो शाला विकास समिति कि अध्यक्ष एवं आदिवासी सोसायटी अध्यक्ष भी था . दोनों के राशनकार्ड ,आधार कार्ड ,मतदान पहचान पत्र एवं अन्य बहुत से सबूत हैं ,जिससे यह सिद्ध होता हैं कि वे सामान्य ग्रामीण ही थे .

आदिवासी समाज आक्रोशित और दी चेतावनी 

सर्व आदिवासी समाज राजनांदगांव ने इन हत्याकांड पर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया है ,उनका एक प्रतिनिधि मंडल एस डी एम से भी मिला और एक ज्ञापन राष्ट्रपती ,मानवाधिकार आयोग ,राज्यपाल को भेजकर पूरे मामले की न्यायिक जांच और परिजनों को मुआवजा के साथ एक व्यक्ति को नोकरी की मांग की है .

आज की बैठक मे आदिवासी नेताओं ने सरकार को चेतावनी भी दी कि आदिवासियों के जल जंगल जमीन तो छीनी ही जा रही हैं ,आदिवासियों के हितों के सारे कानून भी सरकार नहीं मान रही हैं .सरकार न संविधान मानती हैं और न कोर्ट के आदेश .

आज के बैठक में सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष देव नारायण नेताम , गोंडवाना गोंड समाज के जिलाध्यक्ष संतोष सिंह नेताम, किसान संघ के नेता सुदेश टीकम , गोंड समाज तहसील अध्यक्ष हेमन्त ध्रुव, मुड़ा परिक्षेत्र के सामाजिक पदाधिकारी , आस पास के गांव के ग्रामीण जन बडी संख्या में उपस्थित थे.

बैठक में यह फैसला लिया गया कि दोनों ग्रामीण की फारेंसिक जांच कराई जाए पीड़ित परिवार को शासन प्रशासन द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान किया जाए , इस केस को हाई कोर्ट में अपील दायर किया जाए ,यदि तीन दिन में दुबारा पोस्टमार्टम नहीं किया गया तो आदिवासी समाज आंदोलन करने पर बाध्य होगा.

***

CG Basket

Related Posts

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account