सूरजपुर : भाजपा नेताओं नें जगन्नाथपुर की कृषि भूमि व जंगल बिना ग्राम सभा के खनन कंपनी के लिए SECL को बेचा. आदिवासी अपनी खेतॊं की रक्षा के लिए सपरिवार खेतों में ही दो सप्ताह से रहने को मजबूर ,गाँव बारी बारी कर रहें हैं पहरा.

सूरजपुर : भाजपा नेताओं नें जगन्नाथपुर की कृषि भूमि व जंगल बिना ग्राम सभा के खनन कंपनी के लिए SECL को बेचा. आदिवासी अपनी खेतॊं की रक्षा के लिए सपरिवार खेतों में ही दो सप्ताह से रहने को मजबूर ,गाँव बारी बारी कर रहें हैं पहरा.

08 .06.2018 / जंगसाय पोया की रिपोर्ट

सब नियमों को ताक में रखकर जबरन अधिग्रहण लोकतांत्रिक देश में शर्मसार .

जगन्नाथपुर ( जनऊर ) : छग राज्य के जिला सूरजपुर के ग्राम जगन्नाथपुर में कोल परियोजना महान 3 बहुत दिनो से प्रस्तावित था । ग्राम ग्रामसभा नें एकसाथ कहा कि हम कोल परियोजना के लिए एक इंच जमीन नहीं देगें, ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया। कलेक्टर व एस ई सी एल अधिकारी इस प्रस्ताव को मानते हुए न खोलने का आश्वासन देकर चल दिये। किन्तु स्थानीय बीजेपी नेताओं नें अपने मोटी कमीशन हाथ में जाते देख एस ई सी एल प्रबंधन को गुमराह कर बुलाया कि हम गाँव को सहमति के लिए तैयार कर लेंगे, आप आईये। किन्तु गाँव के खूॅटकट्टी मुखिया व ग्राम वासियों नें फिर अधिकारियों को बैरंग वापस कर दिया। जिससे खिन्न होकर होकर बीजेपी नेताओं नें ग्राम मुखिया जो बैक में कर्मचारी भी है को ट्रांसफर कर बाहर भेज दिया। ग्राम मुखिया छ माह बाहर नौकरी में चला जाने के बाद इन जमीन दलालों नें गाँव के लोगों को अलग अलग घर घर जाकर लालच व जमीन चला जाने का भय दिखाकर बहुत से लोगों से फार्म भरवा कर अलग अलग मुआवजा बाॅट कर ग्राम को तोड़ा।

ग्राम मुखिया का अपना ट्रांसफर फिर प्रतापपुर में हुआ, ग्राम सभा नें इस अवैध मुआवजा का कड़ा विरोध किया। जिसके के कारण परियोजना चालू नहीं हो पाया।

ज्ञात हो कि सूरजपुर जिला भारत के संविधान अनुच्छेद 244(1) के तहत पाॅचवी अनुसूचित जिला है, ग्राम सभा को विशेष शक्ति प्राप्त है अनुसूचित क्षेत्र में बिना ग्राम सभा के सहमति जमीन अधिग्रहण नहीं किया जा सकता। अनुसूचित जनजातियों के ग्राम सभा का जमीन व जंगल किसी गैर आदिवासी के नाम पर हस्तांतरण नहीं हो सकता । फिर भी नेताओं के दलाली नें ग्राम सभा व किसानों की जमीन को अवैध तरीके अधिग्रहण कराया। ये निरंकुश एसडीएम, कलेक्टर नें व एस ई सी एल प्रबंधन निम्नलिखित कानूनो के विरुद्ध जाकर जबरन अधिग्रहण कर लिया है जिससे ग्राम के बड़े जमीन मालिको किसानों में रोस ब्याप्त है महिला पुरुष बच्चे अपने खेतों में जाकर सोने को मजबूर है कि कब मशीन उनके खेत में उतार दिया जाए –

1. SECL, SDM, Collector भारत के संविधान के अनुच्छेद 244(1) को नहीं मान रहे है।

1. पेसा एक्ट को नहीं मान रहे है।

3 भू राज्य संहिता का पालन नहीं कर रहे है।

4. वन अधिकार कानून को नहीं मान रहे है।

5. भू अर्जन अधिनियम के तहत अनुसूचित जन जातियों के लिए विशेष प्रावधान को नहीं मान रहे है।

6. सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न जजमेंट जो अनुसूचित जनजातियों के लिए समय समय पर आया है उसको नहीं मान रहे है।
हर हाल में सब कानून को ताक में रख कर अधिग्रहण का आदेश तहसीलदार, SDM, कलेक्टर द्वारा निकला गया है।

१. SECL के पास ग्राम सभा का प्रस्ताव नहीं है, क्योंकि ग्राम सभा नें प्रस्ताव बनने ही नहीं दिया। वह फर्जी प्रस्ताव बनाया होगा।

२. ग्राम सभा का अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं है, क्योंकि ग्राम सभा नें देने से साफ इंकार कर दिया.

सब नियमों को ताक में रखकर जबरन अधिग्रहण लोकतांत्रिक देश में शर्मसार .

जमीन मालिक बड़े किसान, आदिवासियों की बात ,समस्याएं कोई अधिकारी सुनने को तैयार नहीं । सैकड़ो आंदोलन, रैली, चक्काजाम किया गया, ज्ञापन दिया गया जिस पर कुछ कार्यवाही नहीं हुआ। अधिकारियों को संविधान व कानून भी पढाया गया, उन्हे ग्राम सभाओं में मुॅह की खानी पड़ी फिर भी इन्हे कोई फर्क नहीं पड़ा, ऐसे में आदिवासी, किसान किससे न्याय की उम्मीद करें।

विकास यात्रा में मुख्य मंत्री नें इस परियोजना का बिना सत्य जाने सूरजपुर में उद्घाटन भी कर दिया। दूसरे दिन मशीन खेत में उतार दिया गया ,किन्तु ग्राम के महिला पुरूषों के आक्रोश को देखते हुए खदान वालों को उल्टे पाॅव भागना पड़ा, और आज तक खेतों में आदिवासियों द्वारा अपने खेतों में दिए जा रहे पहरा के कारण परियोजना चालू नहीं हो पा रहा है। जिससे खिन्न हो बीजेपी नेंताओं नें ग्राम मुखिया को ग्राम से बाहर भेजने की योजना बना डाली और 5 जून 2018 को ग्राम मुखिया का ट्रांसफर छत्तीसगढ़ में मध्य प्रदेश के निकट किया है, ताकि उनके जमीन में कब्जा किया जा सके।

इन घटनाओं से आदिवासी समाज में भी जबरदस्त रोष हैं । यदि जगन्नाथपुर नहीं बचा तो कहीं के भी आदिवासियों के कृषि भूमि कहीं नहीं बचेगा। इसलिए प्रदेश व देश भर के आदिवासी व किसानो को ग्राम वासी बड़े किसानों ( ज्यादा जमीन वाले ) नें अपील किया है ,ग्राम जगन्नाथपुर के जमीन को बचाने में अधिक से अधिक संगठित होकर सहयोग करें।

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