बेटियो की तस्करी की रिपोर्ट ,चारो अंक ,राजकुमार सोनी [पत्रिका ]

बेटियो की तस्करी की  रिपोर्ट ,चारो  अंक ,राजकुमार सोनी [पत्रिका ]


कदम-कदम पर बिछाया बेटियों की तस्करी का जाल[  [1 ]

Posted:2015-06-05 09:28:28 IST   Updated: 2015-06-05 09:28:28 ISTRaipur : Trafficking of girls on work unleash pretext

प्रदेश में गरीबी और बेकारी से जूझ रहे गांवों की मासूम बालिकाओं को काम दिलाने के बहाने तस्करी कर ले जाने का पूरा जाल बिछाया जा चुका है “पत्रिका” की पड़ताल और स्टिंग में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं











[ राजकुमार सोनी की रिपोर्ट ,पत्रिका ,5 ,6 ,15 ]
रायपुर. प्रदेश में गरीबी और बेकारी से जूझ रहे गांवों की मासूम बालिकाओं को काम दिलाने के बहाने तस्करी कर ले जाने का पूरा जाल बिछाया जा चुका है। छत्तीसगढ़ सहित झारखंड और ओडिशा के गांवों में “पत्रिका” की पड़ताल और स्टिंग में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं कि नौकरी दिलाने की आड़ में चल रहीं करीब 1200 एजेंसियों ने अपने गुर्गों को पूरी तरह से सक्रिय कर रखा है और लड़के-लड़कियों की पहली खेप दलालों के मार्फत 15 जून के बाद दिल्ली पहुंचाई जाएगी और यह सिलसिला सितंबर तक बदस्तूर चलेगा। हैरानी यह है कि बेखौफ दलालों द्वारा बांटे गए विजिटिंग कार्ड ग्रामीणों के पास नजर आ रहे हैं। मेट्रो शहरों में मांग के मुताबिक मासूमों को उपलब्ध कराने का दलाल खुलेआम दावा कर रहे हैं।
आश्चर्यजनक ढंग से मानव तस्करी के दलालों का फैला यह जाल दिल्ली के शकूरपुर, पंजाबी बाग और डिफेंस कॉलोनी से संचालित हो रहे हैं। दलालों से बातचीत में उजागर हुआ कि आलीशान कोठियों में आया, कुक, नौकर-नौकरानियों के तौर पर काम करने वालों को मांग के मुताबिक ले जाया जाएगा।
मिल जाएंगे छत्तीसगढ़ के लोग

आदिवासी बहुल क्षेत्र बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ के रेहड़ा गांव में दलाल अरुण के बारे में जानकारी मिली कि वह और उसका परिवार कमीशन लेकर क्षेत्र के लोगों को फैक्ट्रियों, ईंट-भट्ठों में काम करने के लिए यूपी-बिहार भेजते हैं। ग्रामीण से नई दिल्ली के मयूर विहार में संचालित दुर्गी प्लेसमेंट सर्विस और रघुवीर नगर के आशियाना विकास सोसायटी का कार्ड दिया।
रिंगटोन संकेत

दलाल दीपक का नंबर दिया। इसमें फोन लगाने पर फिल्म प्रेम रोग का गाना बजा.. ये गलियां चौबारा, यहां आना न दोबारा अब हम तो भए परदेशी। बात में छानबीन पर पता चला कि दलाल गानों को संकेतों के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। इस रिंगटोन का आशय था। दीपक फिलहाल दिल्ली में नहीं है और वह अपने गांव गया हुआ है। दीपक ने बताया कि वह जुलाई तक लोगों को उपलब्ध करा देगा।
लुभाने के लिए लालच

दलालों ने अपने काम के तौर तरीकों में बदलाव कर लिया है। पहले लड़के-लड़कियों को बसों और ट्रेनों से मेट्रो शहरों में भेजा जाता था। अब इसके लिए छोटे वाहनों का इस्तेमाल किया जाने लगा है। शातिर ढंग से काम करते हुए एजेंसियां लड़के-लड़कियों को जींस, टीशर्ट, नाइट ड्रेस, मोबाइल और रिचार्ज जैसी सुविधाएं दे देते हैं, जिससे उनकी चमक-दमक को देखकर और लोग भी गांव से जाने के लिए आकर्षित हों। गांवों में धर्म-जाति और समुदाय विशेष की उपलब्धता के आधार पर विजिटिंग का वितरण किया जा रहा है, जिससे लोगों में यह संदेश जाए कि एजेंसियां अच्छे काम कर रही हैं।
पांच सालों में 14 हजार से ज्यादा बच्चे गायब

छत्तीसगढ़ से पांच सालों में 14114 बच्चे गायब हुए। विधानसभा में विपक्ष के नेता टीएस सिंहदेव के सवाल के लिखित उत्तर में गृह मंत्री रामसेवक पैकरा ने जवाब दिया था कि प्रदेश में 2010 से अब तक 14 हजार 114 बच्चे गायब हैं। इसी अवधि में 19 हजार से ज्यादा वयस्क लड़कियां और महिलाएं भी छत्तीसगढ़ से लापता पाई गईं। 2010 में 2757, 2011 में 3187, 2012 में 3384, 2013 में 2907 और 2014 में 1776 बच्चे गायब हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी राज्य सरकार को फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 13 नवंबर को छत्तीसगढ़ सरकार को बचपन बचाओ आंदोलन की याचिका पर मानव तस्करी मामले में फटकार लगाते हुए लापता बच्चों का पता लगाने को कहा था। छत्तीसगढ़ पुलिस ने आनन-फानन दिल्ली के कई क्षेत्रों में छापेमारी कर कुछ बच्चो को बचाया था, लेकिन इसके बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
सूचना तंत्र के कमजोर होने

का फायदा मानव तस्कर उठा लेते हैं। बड़ी समस्या यह है कि माता-पिता भी बच्चों को बेच देते हैं। जहां मानव तस्करी होती है, हम वहां सघन अभियान चलाएंगे
प्रदीप तिवारी, नोडल अधिकारी, मानव तस्करी, निरोधक प्रकोष्ठ
पहली कॉल

हैलो, क्या ये फिलीफ भाई का नंबर है।
हां, जी।
मुझे लालू बडि़क ने नंबर दिया है। हमको काम करने वाले चाहिए।
फिलीफ जी तो नहीं हैं।
कब मिलेंगे?
डेथ हो गई है उनकी।
अरे..कब?
2009 में।
कैसे हो गया यह…?
508 शुगर हो गई थी उनकी।
आप कौन बोल रही हैं?
मैं उनकी मिसेज बोल रही हूं।
क्या आप रजनी टोप्पो हैं?
नहीं, वो तो दीदी हैं।
मुझे छत्तीसगढ़ के ही कर्मचारी मिल जाएंगे न?
15-16 के बाद फोन करिए मिल जाएंगे।
-राजकुमार सोनी

कापू मानव तस्करी का टापू [2 ]

[रिपोर्ट  का दूसरा अंक ,6 ,6 . 2015 ]

Posted:2015-06-06 09:31:39 IST   Updated: 2015-06-06 09:31:39 IST

छत्तीसगढ़ में भूख और बेकारी से जूझते गांवों में मानव तस्करी के बिछे सघन जाल के बीच कुछ क्षेत्र तो इसके दलदल में बुरी तरह से जकड़े हुए हैं








[ राजकुमार सोनी  , पत्रिका  ]







रायपुर. छत्तीसगढ़ में भूख और बेकारी से जूझते गांवों में मानव तस्करी के बिछे सघन जाल के बीच कुछ क्षेत्र तो इसके दलदल में बुरी तरह से जकड़े हुए हैं। इसमें अंबिकापुर, जशपुर, खरसिया और कोरबा से लगभग समान दूरी (100 किमी) पर मौजूद कापू भी है। पत्रिका की पड़ताल में लगातार हैरान कर देने वाली बातें सामने आ रही हैं।


मानवीय तस्करी के लिए टापू बने कापू में आधा दर्जन से ज्यादा क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक दलाल सक्रिय हैं, लेकिन पुलिस ने अब तक महज छह-सात को ही पकड़ा। नौकरी दिलाने के बहाने मासूमों को ले जाने वाले दलालों के यहां फलने-फूलने की वजह सब कुछ जानने के बाद भी पुलिस का निष्क्रिय होना है। गरीबी और बेकारी से जूझते इस गांव के कमोवेश हर घर की पीड़ा है, जहां लोग दलालों के चंगुल में किसी न किसी तरह से उलझे या उनसे पीडि़त हैं।
पुलिस की पकड़ से दूर दलाल

कापू क्षेत्र में तस्करी की बढ़ती शिकायतों के बाद यहां कुछ समय पहले मानवाधिकार कार्यकर्ता अजय टीजी, डिग्री चौहान, अधिवक्ता रिनचिन, जगदीश कुर्रे, सुमीता केरकेट्टा, रीना रामटेके, फादर जैकब, आशीष बेक,� विनय कुमार एक्का, आनंद स्वरूप, प्रेमसाय लकड़ा, शिशिर दीक्षित, याकूब कुजूर, लक्ष्मण महेश्वरी, धर्मेंद्र जांगड़े ने जनसुनवाई की कार्रवाई की थी और पुलिस को मानव तस्करों की गतिविधियों से अवगत कराया था, लेकिन पुलिस ने अब तक सुशील वर्मा उर्फ करोड़पति, महिला तस्कर संतोषी बाई, चंद्रवती, कमलाबती, फूलकुंवर, जर्नादन यादव और कृष्णा चौहान को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में मानव तस्करी के काम में लगे रमेश, मनोज, गिरधारी, विक्की,� उमेश और जमानत पर रिहा हुए बबलू सिदार की आवाजाही फिर से बढ़ गई है। इलाके में रहने वाले नन्हे नाम के एक शख्स के बारे में ग्रामीणों का कहना है कि उसने रायगढ़ में पदस्थ रहे एक पुलिस अफसर को घरेलू कामकाज के लिए क्षेत्र से दो लोग दिलवाए थे। मानव तस्कर निरोधक प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी प्रदीप तिवारी ने कहा कि मानव तस्करी के मामलों में कापू को बेहद संवेदनशील माना जाता है। बावजूद इसके यदि यहां के पुलिसकर्मी मामलों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं तो उन्हें चेतावनी दी जाएगी।

बेटी के इंतजार में पथरा गई हैं आंखें

कापू के मढ़वाताल में रहने वाले रामसिंह की आपबीती दिल दहला देने वाली है। उसकी आंखें अपनी बेटी के इंतजार में पथरा गई हैं। करीब चार साल पहले उसकी बेटी बुधनी को खम्हारडीह गांव में रहने वाले गिरधारी ने एक मेले से अगवा कर तारा नाम की महिला को बेच दिया था। वहीं, धरमजयगढ़ थाने में पिता चीखता-चिल्लाता रहा कि उसकी बेटी को गिरधारी ले गया है, लेकिन पुलिस ने बुधनी को गुमशुदा बताते हुए इश्तहार जारी कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। रात-दिन एक कर राम सिंह ने खुद ही गिरधारी को गांव में धरदबोचा और बेटी के बारे में पूछा। गिरधारी ने उसे बताया कि रायगढ़ के चक्रधर नगर में एचटी सेवा प्लेसमेंट एंड सिक्योरिटी का फर्म में वह काम कर रही है और उसे वहां तीन हजार रु. महीने मिल रहे हैं। हैरानी की बात यह थी कि बुधनी का नाम बदल कर माला कर दिया गया।
रामसिंह प्लेसमेंट एजेंसी पहुंचा तो मालूम हुआ कि एजेंसी अपना कारोबार समेटकर दिल्ली जा चुकी है। राम सिंह ने इसकी जानकारी पुलिस को दी, लेकिन पुलिस स्टाफ ने आने-जाने के खर्च के लिए 2 हजार रुपए मांगे। गरीबी से जूझ रहे रामसिंह ने कर्ज लेकर पुलिस को रुपए दिए। अपने जीवन में पहली बार ट्रेन की यात्रा करने वाले रामसिंह ने बेटी की तलाश में दिल्ली के पंजाबी बाग, शकूरपुर जैसे कई इलाकों की खाक छानी, लेकिन बेटी नहीं मिली। अब तो रामसिंह के आंसू भी सूख गए हैं और वह अब मरने से पहले बेटी को देखने की बात कहते हुआ बिलख पड़ता है।

झांसा देकर ले गया बेटी को

गितकालो के रहने वाले ढरकूराम भी अपनी बेटी का इंतजार कर रहे हैं। उनकी बेटी शांति सात साल की थी, तब इलाके के एक शख्स केरकेट्टा ने ढरकू से यह कहकर शांति को गोद ले लिया था कि तुम लोग गाय-बैल चराते रह जाओगे। वह लड़की को पढ़ा-लिखाकर इंसान बना देगा। कुछ समय बाद ढरकू को पता चला कि उसकी बेटी दिल्ली में बेच दी गई है। ढरकू ने थाने पहुंचा तो पुलिसवालों ने गाली-गलौज देकर भगा दिया। ढरकू को अब भी बेटी का इंतजार है। वहीं केरकेट्टा गांव में बेखौफ घूम रहा है।

बहन मिली तो पिता गायब

चीतामाढ़ा के इलियस की आपबीती दर्द से भरी है। कुछ समय पहले वह अपनी बहन को खोज रहा था और अब उसे पिता लालसाय की भी तलाश है। दिल्ली की प्लेसमेंट एजेंसी के पृथ्वीपाल ने इलियस की बहन को बेच दिया था। परिवार के लोगों ने पृथ्वीपाल पर दबाव बनाया तो वह उसके पिता लालसाय को अपने साथ मुंबई ले गया। लड़की वापस आ गई तो पिता गायब हो गए।

आरोपी जेल में बेटी का पता नहीं

मढ़वाताल में रहने वाली सनियारो बाई की बेटी जुलेता भी अब तक घर नहीं लौट सकी। सनियारो के घर आने-जाने वाले खम्हार निवासी जनार्दन उसकी बेटी को पढ़ाने-लिखाने के नाम पर ले गया था। सनियारो के पति देवसाय ने बेटी के बारे में पूछा तो जनार्दन ने उसे चार हजार रुपए थमा दिए और कहा कि जुलेता दिल्ली में मेमसाब बन गई है। सनियारो ने थाने में रिपोर्ट लिखवाई तो जनार्दन को जेल भेज दिया गया, लेकिन बेटी का अब तक पता नहीं चला।

तस्करी पर शिकंजा कसने बनेगी समिति

मानव तस्करी के बढ़ते जाल की खबर पत्रिका में प्रकाशित होने के बाद शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में आला अफसरों की बैठक में मानव तस्करों पर शिकंजा कसने की रणनीति पर विचार किया गया। मानव तस्करी के तार झारखंड और ओडिशा से जुड़े हुए हैं, इसलिए तीनों राज्यों की पुलिस से समन्वय बनाया जाए। सीमा क्षेत्रों के थानों में अन्य राज्यों के तस्करों का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखने के अलावा निगरानी समिति गठित करने का निर्णय भी लिया गया।
आदिवासी इलाकों से गरीबी को दूर करने को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। यदि सरकारी योजनाओं को लाभ आदिवासी इलाकों के लोगों को मिलता तो तस्करी पर अंकुश लगता। पांच सालों में 14 हजार से ज्यादा बच्चे और कई हजार युवतियां लापता हुए और सर्वोच्च न्यायालय की कड़ी फटकार के बाद भी राज्य में तस्करी का सिलसिला थम नहीं पाया है तो इसे शर्मनाक ही कहा जाएगा।

टीएस सिंहदेव , नेता प्रतिपक्ष

इससे इंकार नहीं है कि कापू इलाके में जमकर मानव तस्करी होती है। मां-बाप खुद प्लेसमेंट एजेंसी वालों से पैसे लेकर बच्चों को दिल्ली, मुंबई भेज देते हैं। बच्चे पैसा भेजना बंद कर देते हैं तो चिल्लाने लगते हैं कि मेरे बच्चों को तस्कर ले गए। ऐसे कई अभिभावकों के बयान है, जिसमें उन्होंने स्वीकारा है कि बच्चों को सहमति से भेजा है।

आरपी तिवारी, कापू में मानव तस्करी मामलों के विवेचना अधिकारी






छत्तीसगढ़ में मानवतस्करी की रिपोर्ट का तीसरा अंक 

[रिपोर्ट 7 ,6 . 2015 

भारत दर्शन और शादी की आड़ में बेटियों की तस्करी [3 ]

Posted:2015-06-07 09:58:33 IST   Updated: 2015-06-07 09:58:33 ISTRaipur : Daughters to trafficking in chhattisgarh

पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि यहां भारत दर्शन कराने और शादी की आड़ में लड़कियों की तस्करी करने के कई मामले उजागर हुए हैं

[राजकुमार सोनी ,पत्रिका ]
रायपुर. मानव तस्करी के लिए बदनाम छत्तीसगढ़ की सीमा से लगा झारखंड का गुमला जिला। पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि यहां भारत दर्शन कराने और शादी की आड़ में लड़कियों की तस्करी करने के कई मामले उजागर हुए हैं। छत्तीसगढ़ और झारखंड में मानव तस्करी में लिप्त दलाल बीरबल ने लड़कियों को दिल्ली के गुडग़ांव भेजने के लिए पहले गांव-गांव में अपने गुर्गों के जरिये संदेश भिजवाया कि जिन्हें छत्तीसगढ़, आगरा और दिल्ली की सैर करनी हो, वे गुमला पहुंचें।

झांसे में आईं लड़कियां गुमला पहुंचीं तो भारत दर्शन के बोर्ड लगे बस में उन्हें� बैठा दिया गया। यह बस जशपुर से होकर गुजरी तो सामाजिक कार्यकर्ताओं को इसकी भनक लग गई और सामाजिक कार्यकर्ता त्रिभुवन शर्मा ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। इस बीच बीरबल लड़कियों को गुडग़ांव में छोड़कर भाग निकला और अब तक वह पुलिस की पकड़ से बाहर है।

भरोसे का करते हैं कत्ल
मानव तस्करी के लिए प्लेसमेंट एजेंसियों के दलाल और गुर्गे महंगी गाडिय़ों और अपनी ठाट-बाट से मासूमों को बरगलाते हैं। रायगढ़ के कापू इलाके के माझापारा में रहने वाले दिलसाय और उसकी पत्नी कलाबाई की घास-फूस से बनी झोपड़ी में सुशील वर्मा सिर्फ� इसलिए आता-जाता था, क्योंकि दोनों मजदूर थे।
सुशील उन्हें वक्त-बेवक्त इधर-उधर काम पर ले जाता और अच्छा-खासा भुगतान भी कर देता था। एक रोज सुशील अपनी पत्नी संतोषी के साथ महंगी गाड़ी में मुर्गा-शराब लेकर पहुंचा और दिलसाय को दिल्ली चलने के लिए कहा। आनाकानी करने पर सुशील ने उसकी पत्नी को भी ले जाने और पूरा खर्च उठाने की बात कही। वह दोनों को दिल्ली ले गया, जहां दिलसाय को ईंट-भ_े में लगा दिया और उसकी पत्नी कोठियों के मालिकों की मसाज के लिए भेज दी गई। इस बीच दिलसाय पैदल ही भाग निकला और कानपुर पहुंचा, जहां ढाबों में उसने बर्तन साफ किए और पैसे जमा कर घर पहुंचने का इंतजाम किया। पत्नी भी जैसे-तैसे बचकर आई।

झूठ का सहारा
जशपुर के कांसाबेल इलाके के ढेंगुरजोर के संजय कुमार, भगीरथ, अर्जुनराम, संजय, मतियस, फूलसाय, भुलेश्वर और विपिन से तमिलनाडु की सिंधु बोरवेल कंपनी में काम करने वाले रमेश नाम के एक शख्स ने संपर्क किया था। रमेश ने अपने खेल को अंजाम देने के लिए युवकों को मोबाइल भी दिया। एक रोज कंपनी की गाड़ी गांव पहुंची और फिर सब भोपाल, हरदा, कर्नाटक सहित कई स्थानों पर घूमते रहे। बोरवेल कंपनी के लिए बंधक बनकर काम रहे यु

आईपीएस अफसर राहुल भगत रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक थे, तब सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शिकायत की थी कि रोहतक, हरियाणा, पंजाब के लोग आदिवासी युवतियों से शादी कर उन्हें तस्करी के धंधे में धकेल रहे हैं। एसपी ने जवाब दिया था कि किसी को प्रेम और विवाह करने से रोका नहीं जा सकता। हरिद्वार के चंद्रशेखर उर्फ� रमेश ने चंद्रवती से शादी की है और चंद्रवती अपनी मां कमला के साथ बच्चों की तस्करी के मामले में जेल की सजा काट रही है। सुशील उर्फ� करोड़पति भी हरियाणा का रहने वाला है और फिलहाल अपनी पत्नी संतोषी के साथ रायगढ़ जेल में बंद है।

कौन है दामाद नहीं मालूम

जशपुर विकासखंड के टिकुल गांव में मीना (परिवर्तित नाम) दिल्ली चली गई थी। कुछ समय पहले जब वह लौटी तो उसकी गोद में बच्चा था। इलाके की सामाजिक कार्यकर्ता ममता कुजूर ने उससे बच्चे के पिता के बारे में जानना चाहा तो युवती ने अपने पति को इंजीनियर बताया, मगर नाम नहीं बताया। सामाजिक कार्यकताओं ने छानबीन की तो पता चला कि बच्चा किसी कोठी के मालिक का था।
500 से ज्यादा की तस्करी करने वाला आजाद
छत्तीसगढ़ के पांच हजार से ज्यादा बच्चों और इंसानों को देश-विदेश में बेचने वाला गौरव साहा छह महीने से जशपुर जेल में बंद था, लेकिन अब वह जमानत पर है। तीन जिलों बलरामपुर, रायगढ़ और जशपुर में सक्रिय रहकर मानव तस्करी करने वाला गौरव चंपारण बिहार का निवासी है। गौरव को गिरफ्तार करने वाली कांसालबेल की थाना प्रभारी मल्लिका बनर्जी बताती हैं कि गौरव के गुर्गे गांव के बच्चे, भोले-भाले आदिवासी युवकों, युवतियों को उनकी जरूरतों के हिसाब से टारगेट बनाते हैं।

आपरेशन मुस्कान से लापता बच्चों की तलाश

प्रदेश सरकार एक जुलाई से 31 जुलाई तक राज्य से लापता बच्चों की खोजबीन के लिए� ऑपरेशन मुस्कान चलाएगी। मुख्य सचिव विवेक ढांड ने इस सम्बन्ध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी जिलों के कलक्टरों को लापता बच्चों की खोजबीन के लिए सघन छापेमारी और हर लापता बच्चे की एंट्री ऑनलाइन करने को कहा गया है। ऑपरेशन मुस्कान केंद्रीय महिला एवं विकास मंत्रालय की योजना है।
राज्य में मानव तस्करी का शिकार बनने वाले आदिवासियों की हालत बेहद विवशतापूर्ण है। दलालों के चंगुल में फंसने के बाद ग्रामीणों की गरीबी और बेकारी से बाहर निकलने की उम्मीद जैसे खत्म सी हो जाती है। बलरामपुर जिले के चांदोपुर थाने के जोधपुर गांव का एक दृश्य।
राजकुमार सोनी







मानव तस्करी : वे दिल्ली जाते हैं बेटियों को खोजने, मिलती है मायूस  [ 4 ]






Posted:2015-06-08 10:28:28 IST   Updated: 2015-06-08 10:28:28 ISTRaipur : they find daughters to Delhi, get desolation

दुनियाभर से लोग देश की राजधानी दिल्ली घूमने पहुंचते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों से अभागे माता-पिता को अपनी बेटियों की तलाश के लिए वहां जाना पड़ रहा है।
रायपुर. दुनियाभर से लोग देश की राजधानी दिल्ली कुतुबमीनार, लाल किला और राष्ट्रपति भवन जैसे स्थानों को देखने के लिए पहुंचते हैं, लेकिनछत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों से अभागे माता-पिता को अपनी बेटियों की तलाश के लिए वहां जाना पड़ रहा है। वजह है कि उनकी हंसती-खेलती बेटियों को मानव तस्करों ने नरक में धकेल दिया है। प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों से तस्करी कर ले जाए रहे मासूमों की पत्रिका द्वारा की गई पड़ताल में ऐसे बूढ़े माता-पिता मिले, जिन्हें अपनी बेटियों को तलाशने के लिए कर्ज लेकर, अपना घर, गाय-बैल बेचकर पैसा जुटाना पड़ा और कांक्रीट के जंगल में दर-दर की ठोंकरें खानी पड़ी।
मिलीं बेटी की हड्डियां
जशपुर जिले के बगीचा तहसील के महुआडीह गांव निवासी हेमसाय चौहान की बेटी अलोचना बाई को भी विलियम नाम के दलाल� ने दिल्ली में बेच दिया। हेमसाय बताते हैं, विलियम बार-बार उनके घर आकर कहता था कि गरीबी दूर करना चाहते हो तो बेटी को दिल्ली भेज दो। बेटी भी जिद करने लगी तो उसे जाने दिया, लेकिन कुछ दिनों बाद गांव से थोड़ी दूर स्थित एसटीडी-पीसीओ में फोन आया कि उनकी बेटी बीमार है, आकर देख लो। वे गाय-बैल बेचकर दिल्ली पहुंचे तो पता चला कि बेटी को अस्पताल के फ्रिज में रखा गया है। उसके आसपास कोई नहीं था। अस्पताल वालों ने 29 हजार 160 रुपए का बिल भी थमा दिया। पराए शहर में इतने पैसे कहां से लाता। अस्पताल वाले के हाथ-पांव जोड़े तो लाश मिल पाई। हेमसाय का गला यह बताते हुए रुंध जाता है कि बेटी का चेहरा देखने के लिए कफन उठाया तो सिर्फ हड्डियां नजर आई।
कर्ज तो चुका दूंगा, बस बेटी मिल जाए
रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ ब्लॉक के कापू में देवसाय की बेटी जुलेता को दलाल जनार्दन ने दिल्ली में बेच दिया था। जनार्दन अब जेल में है। देवसाय ने दिल्ली जाकर बेटी को खूब तलाशा पर वह नहीं मिली। अब वह 10 हजार रुपए का कर्जदार भी हो गया है। देवसाय कहते हैं, पैसे तो चुका दूंगा, बस बेटी मिल जाए।

(राजकुमार सोनी)

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