महानदी और उससे जुड़े जनजीवन को बचाने के लिए ओड़िशा एवं छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों की सरकारें गंभीर नहीं है वे केवल सत्ता के लिए ओछी राजनीति कर रहे हैं.: महानदी बचाओ जीविका बचाओ अभियान समिति , जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा रायगढ़ छत्तीसगढ़ और पत्रकारों के साथ साझा बैठक.

28.05.2018

रायगढ 

महानदी बचाओ जीविका बचाओ अभियान समिति , जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा रायगढ़ छत्तीसगढ़ और पत्रकारों के साथ साझा बैठक दिनांक 27 मई2018 को मोर्चा कार्यालय रायगढ़ छत्तीसगढ़ में संपन्न हुई।बैठक की अध्यक्षता श्रीशिशिर हुई सीपीआईएम ओड़िशा ने की।

ओड़िशा जनसंगठनों का प्रतिनिधि मंडल महानदी के सीमावर्ती क्षेत्रों का अवलोकन एवं अध्ययन करते हुए रायगढ़ बैठक में शामिल हुए। उन्होंने महानदी और अन्य जलस्रोतों की हालत पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि महानदी और उससे जुड़े जनजीवन को बचाने के लिए ओड़िशा एवं छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों की सरकारें गंभीर नहीं है वे केवल सत्ता के लिए ओछी राजनीति कर रहे हैं। एक अध्ययन के अनुसार दोनों सरकारों ने आम जनता किसानों , मछुआरों तथा जल से जुड़े जीविका के हितों कोध्यान में न रखतेहुए औद्योगिक इकाइयों को जलकी उलब्धता और क्षमता से कहीं अधिक पानी देने का एमओयू कर रही है, जिससे महानदी एवं अन्य जलस्त्रोतों के अस्तित्व,उससे जुड़े जनजीवन और जीविका पर गंभीर संकट पैदा हो रहा है। जलजीव नष्ट हो रहे हैं और दोनों सरकारें औद्योगिक घरानों और कारपोरेट्स के सामने घुटने टेके हुए हैं।आम जनता को पीने का शुद्ध पानी,किसानों को कृषि के लिए पानी तथा मछुआरों और मजदूरों के सामने जीवन जीने का घोर संकट उत्पन्न हुआ है।यह अत्यंत दुखद और आश्चर्यजनक है कि दोनों सरकारों के पास जनहित में जल की कोई नीति नहीं है।

जनसंगठनो ने कहा कि ओड़िशा के पहले ही महानदी संकट में है केलो बांध बनने के बावजूद शहर के मध्य चक्र पथ पर आते आते केलो मृत सा हो जाती है।छत्तीसगढ़ के किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है छत्तीसगढ़ की सरकार ने तो ग्रीष्मकालीन धान की खेती पर प्रतिबंध लगाने का किसान विरोधी आदेश तक जारी किया था जिसका छत्तीसगढ़ और ओड़िशा के किसानों एवं जनसंगठनो ने कड़ा विरोध किया था।

जनसंगठनो ने महानदी और अन्य जलस्रोतों तथाउससे जुड़ी जनजीवन और जीविका को बचाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि नदियाँ सरहद नहीं बनाती यह प्रकृति कीअनुपम भेंट है समाज की सामूहिक धरोहर है ।इसकी हिफाजत करना समाजिक जिम्मेदारीहै। जनसंगठनो ने दोनों सरकारों से मांग की है कि वे आपस में बैठकर जनहित में सौहार्दपूर्ण सकारात्मक समाधान निकालने की दिशा में ईमानदार कोशिश करें। तथा
*दोनों सरकारें (ओड़िशा और छत्तीसगढ़) अपने अपने राज्य की जल नीति की घोषणा करें।
*दोनों सरकारें जल की उलब्धता, संरक्षण,उपयोग आदि के संदर्भ में श्वेत पत्र जारी करे।
*जल अधिकार कानून स्पष्ट हो।इसे पंचायत की ग्राम सभाओं को अधिकार दे कर सुनिश्चित किया जाए।
*जल पर पहला अधिकार आम जनता को पीने के पानी एवं उपयोग के लिये हो तत्पश्चात कृषि के लिए तत्पश्चात ग्रामीण लघुकुटीर उद्योग के लिए तत्पश्चात औद्योगिक इकाइयों को पानी दिया जाना सुनिश्चित किया जाए।
*जल को लेकर क्षेत्रीयवाद,अलगाव वाद एवं विभाजन कारी राजनीति की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे मानवता के लिए गंभीर खतरा बतलाया इससे सावधान रहने की जरूरत है।
*जल के बाजारीकरण एवं व्यवसायिक करण पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

बैठक में निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किया गया –
*महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा।
*ट्रीब्युनल के पास सही तथ्यों का ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा ।
*ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर एवं छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पब्लिक कन्वेंशन किया जाएगा।
*महानदी बचाओ जीविका बचाओ अभियान के तहत माननीय प्रधान मंत्री के नाम पोस्ट कार्ड अभियान चलाया जाएगा।
*दोनों राज्यों में जनजागरण अभियान चलाए जाने का निर्णय लिया गया।

बैठक में सर्वश्री श्री शिशिर हुई सीपीआईएम ओड़िशा,अनंता लोकमुक्ति संगठन झारसुगडा ओड़िशा,सुदर्शन छोटराय जनरल सेक्रेटरी ओजीएस ओड़िशा,श्री मांझी ओड़िशा,जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा के साथी बासुदेव शर्मा,एन आर प्रधान, डा•सर्वेश्वर गुप्ता,आर के यादव,के के एस ठाकुर,आर के शर्मा,मदन पटेल,लम्बोदर साव,रघुवीर प्रधान,गणेश मिश्रा,नीलकंठ साहु,इंजीनियर एस डी यादव,पत्रकार साथियों से शमशाद अहमद,संजय बोहिदार,श्री गुप्ता,अमित एवं गणेश कछवाहा ने विचारों को साझा किया।

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