तीकोरन में निर्दोष लोगों पर जालियांवाला बाग़ की तर्ज़ पर पुलिस और तमिलनाडु सरकार द्वारा हत्याओं की पी.यू.सी.एल. घोर निंदा करता है.

तीकोरन में निर्दोष लोगों पर जालियांवाला बाग़ की तर्ज़ पर पुलिस और तमिलनाडु सरकार द्वारा हत्याओं की पी.यू.सी.एल. घोर निंदा करता है.

 

 

25.05.2028

दक्षिण तमिल नाडु के तूतीकोरन (थूतुकुड़ी) में 22 मई 2018 को 13 से अधिक लोगों की तमिल नाडु पुलिस द्वारा निशाना साध कर निर्मम हत्या करने की पी.यू.सी.एल. घोर निंदा करता है. मारे गए तमाम लोग तूतीकोरन नगर के मुहाने पर स्थापित स्टरलाईट कारखाने के इर्द-गिर्द बसे उन निहथ्थे हज़ारों स्थानीय निवासियों में से थे जो जनतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर स्टरलाईट कॉपर स्मेल्तेरिंग प्लांट को बंद करने की मांग कर रहे थे, जो व्यापक तौर पर जानलेवा पर्यावरणीय प्रदूषण फैलाता रहा है. यह कारखाना वेदान्त समूह द्वारा संचालित विश्व का ऐसा एक सबसे बड़ा कारखाना है.
 
तमिल नाडु पुलिस और सरकार द्वारा जिन हथकंडों का इस्तमाल कर अविवेकीय और गैर-संवैधानिक तरीके से प्रदर्शनकारियों पर गोली चालन कर उनकी हत्या की गई, वह इस पूरे घटनाक्रम का सबसे खेदजनक पहलू है. यह जग-विदित था कि स्टरलाईट कॉपर प्लांट के खिलाफ जन-अभियान संचालित करने वाले स्टरलाईट-विरोधी आन्दोलन ने लोगों को आव्हान किया था कि वे २२ मई को ( जो इस विरोध-प्रदर्शन का १००वां दिन था) तूतीकोरन जिलाधीश के दफ्तर तक मार्च कर मांग करेंगे कि स्टरलाईट प्लांट के विस्तार सम्बन्धी सभी निर्माण कार्यों को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए, और इस प्लांट को ही बंद कर दिया जाए. यह अच्छी तरह जानते हुए भी कि न केवल तूतीकोरन नगर में वरन पूरे जिले में स्थानीय भावनाएं इस स्टरलाईट प्लांट के चालू रहने के खिलाफ थीं, ज़िला प्रशासन और पुलिस को ऐसे कारगर कदम उठा कर इस शांति-व्यवस्था बनाये रखने की दिशा में २२ मई के पहले ही विरोध-प्रदर्शन करने वाले समूह से चर्चा और संवाद करना चाहिए था; किसी भी हालात में २२ मई को ही मुखियाओं के एक छोटे प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित कर ज़िलाधीश से मुलाकात करवा कर अपना पक्ष रखने का मौका देना चाहिए था.

 

लेकिन जो घटनाक्रम अस्ल में २२ मई २०१८ को घटित हुआ वह संवैधानिक नियमों के पालन के एकदम विपरीत हुआ, और कानून के नियमों और व्यवस्थित शासन के सिधान्तों का खुला उल्लंघन था. अधिकारियों ने हज़ारों की संख्या में लोगों को ज़िलाधीश दफ्तर के सामने इक्कठे होने दिया. रपट के अनुसार पुलिस ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के निहाथ्थी सभा पर अकारण और कठोर लाठी चालन किया. इसके चलते सभा के कुछ हिस्सों में उत्तेजना फैल गई, जिसके फलस्वरूप पत्थर फैकना शुरू हो गया. ऐसी परिस्थिति में उत्तेजित भीड़ को काबू में करने के लिए उपलब्ध पुलिस के लिए निर्धारित आदेश और मार्गदर्शिका का उल्लंघन करते हुए पुलिस ने गोली चालन संभावना की चेतावनी दिए बिना, सभा में जान से मारने के इरादे से पुलिस ने निशाना साध कर गोली चालन कर दिया. मार्गदर्शिका में स्पष्ट दर्शाया गया है कि पुलिस को चेतावनी देते हुए पहले हवा में गोली चालन करना चाहिए, और फिर बाद में घुटने के नीचे गोली दागना चाहिए. इन सभी नियमों का पुलिस ने खुलकर उल्लंघन किया.

तमाम विडियो रिकॉर्डिंग और चश्मदीद गवाहों के अनुसार पुलिस ने पेशेवर पुलिस निशानेबाजों का इस्तमाल किया, जो सादी वर्दी में, पुलिस वाहनों पर चढ़कर जुलुस की अगवानी करने वालों पर निशाना साध कर, उन्हें जान से मारने के इरादे से गोली चालन कर रहे थे. यह हकीकत भी खुल कर सामने आई कि जो भी जान से मारे गए उनके शरीर पर गोलियों के निशान या तो कमर के ऊपर या फिर शीर्ष धड पर थे. यह न केवल निर्शंस है बल्कि एक गहन चिंता का विषय भी कि तमिल नाडु पुलिस ने निहथ्थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर निशाना साध कर जान से मरने के इरादे से गोलीचालन किया. तमिल नाडु पुलिस ऐसे कृत्य कभी भी नहीं कर सकती थी, जब तक कि उसे तमिल नाडु राज्य सरकार की अलिखित और गर्भित अनुमति न मिली होती.

यह पुलिस गोलीचालन हमें आज़ादी की लड़ाई के दौरान घटित जलियांवाला बाग़ के नरसंहार की याद दिलाता है.

हमारी सबसे बड़ी चिंता यह है कि लोगों के अनुसार उन्होंने पुलिस द्वारा उन पर गोली चालन के दौरान कम-से-कम ४० से ५० दौर गोली चलाने के धमाके सुनाई दिए हैं. लेकिन मरने वालों की संख्या केवल १३ है. हमारी चिंता है कि कई और स्थानीय लोग गंभीर तौर पर घायल हुए हैं, और पुलिस अत्याचार और प्रतिशोध के दर से कंही छुपे हुए हैं. यह ज़रूरी है कि प्रशासन को ऐसे विश्वसनीय प्रमुख लोगों की मदद लेना चाहिए जिनकी स्थानीय लोगों के बीच साख है, और ऐसे घायलों की मदद और सहयोग करना चाहिए.

पी.यू.सी.एल. आज ऐसी बैचेन करने वाली प्रविर्तियों को उजागर करने पर मजबूर है जो जन-प्रतिरोधों की परिस्थितियों से निपटने के लिए वर्तमान अन्ना डी.एम्.के. सरकार इस्तमाल करती है. जैसा कि जनवरी २०१६ में मरीना प्रतिरोध के समय हुआ, और जैसा कि पुदुकोट्टई और थंजावूर इलाके में नेदुवासल और कदिरामंगालम में मीथेन निकाले जाने के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुआ. उसी तर्ज़ पर पुलिस ने पहले तो भारी संख्या में लोगों को इकठ्ठा होने दिया, और बाद में निहथ्थे प्रदर्शनकारियों पर प्रमुख उनुत्तेजित हमला किया, वह भी इस ख़ास इरादे से कि गंम्भीर चोटें पहुंचाकर और मौत के घात उतारकर भीड़ में भय पैदा करें, और उन्हें ऐसा सबक सिखाया जाए कि भविष्य में सरकार के खिलाफ विरोध प्रगट करने की हिम्मत कोई और समूह न कर सके. स्पष्ट है कि राजनैतिक कार्यपालिका/ राज्य, और उनके साथ प्रशासन और पुलिस ने यह तय कर लिया है कि वे किसी भी संवैधानिक तफसील से, मौलिक अधिकारों के सिद्धांतों, कानून के दिशानिर्देशों के शासन से बंधे नहीं हैं, और दंडमुक्ति के प्रावधान के चलते कानून को तोड़-मरोड़ सकते हैं. आखिरकार, कई घटनाओं में पहले भी पुलिस और राज्य अधिकारी दंडमुक्ति के प्रावधान के चलते बड़ी बेशर्मी से कानून को तोड़ कर उसका मखौल उड़ाते रहे हैं, और इन अपराधों से बच निकले हैं. और इसलिए उन्हें अब और किसी मौके पर डरने की ज़रुरत नहीं है क्योंकि वे उसी तरह से फिर कानून के शिकंजे से बच निकलेंगे. यह ज़रूरी है कि पुलिस और अन्य अधिकारयों को कानून के प्रति ज़िम्मेदार ठहराया जाये.

इसके अलावा एक और चिंता का विषय यह है कि पुलिस ने २३ मई २०१८ को उन परिवारों के सदस्यों पर रबर बुलेट दागीं जो सरकारी अस्पताल में पुलिस गोली चालन में मृतक अपने परिजनों के शव लेने पहुंचे थे. हम इस गोली चालन की भी घोर निंदा करते हैं, और इस विकट दुखद घटना के पीड़ित स्थानीय लोगों की परिस्थिति के प्रति अफसरों द्वारा असंवेदनशीलता की भी हम घोर निंदा करते हैं.
पी.यू.सी.एल. मांग करता है कि पुलिस और प्रशासन को सरकार स्पष्ट आदेश दे कि स्थानीय लोगों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने पर तुरंत लगाम लगाये. पी.यू.सी.एल. यह भी मांग करता है कि २२ मई २०१८ को गोली चालन के दौरान मौके पर मौजूद उन सभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारीयों को चिन्हित कर तुरंत प्रभाव से उन्हें निलंबित किया जाए, जब तक कि पुलिस जांच में उनकी भूमिका तय न हो जाए. सरकार न केवल अधीनस्थ पुलिस और राजस्व अधिकारीयों के खिलाफ कार्यवाही करे, लेकिन उन सभी के खिलाफ जो इस आदेश की पूरी श्रृंखला की कड़ी रहे हैं, और इस पूरी घटना की निगरानी के ज़िम्मेदार हैं.

पी.यू.सी.एल. पूरे देश के जागरूक नागरिकों और मानव अधिकारों के प्रति कार्यरत समूहों से आव्हान करती है कि तमिल नाडु पुलिस द्वारा १३ से भी अधिक नागरिकों की निर्मम हत्या किये जाने जैसे गैरकानूनी कृत्य के खिलाफ वे अपनी आवाज़ बुलंद करें. पी.यू.सी.एल.अन्य नागरिकों और मानव अधिकार समूहों को आव्हान करती है कि तूतीकोरन के स्टरलाईट-विरोधी प्रदर्शकारियों के साथ एकजुटता दर्शा कर उन्हें हर संभव सहयोग प्रदान करें, जिसमें तूतीकोरन में एकजुटता यात्रा कर वहां होने वाली दमनकारी घटनाओं का स्वम अध्ययन करें.

पी.यु.सी.एल. इस बात को दोहराना चाहेगी कि हमारे अधिकारों की सुरक्षा और राज्य और उनके अधिकारीयों की जवाबदारी प्रबुद्ध और सतर्क नागरिकों द्वारा ही तय की जा सकती है.

इस विकट परिदृश्य में जहां २२ मई को पुलिस गोली चालन में १३ से अधिक ज़िन्दगी कुर्बान हो गयी हों, यह ध्यान देने योग्य है कि मद्रास उच्च न्यायालय की डिवीज़न बेंच ने अंतरिम आदेश जारी कर तूतीकोरन में स्टरलाईट उद्योग के विस्तार के लिए किये जा रहे निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है, जो इस विवाद की जड़ में था, और जिसके कारण ही वर्तमान प्रतिरोध प्रदर्शन की शुरुआत हुई. न्यायपालिका द्वारा इस समयोचित हस्तक्षेप से एक आशा जगी है, और यह एक ऐसा कदम है जो तूतीकोरन के लोगों को आशान्वित करता है कि अंत में न्याय की जीत होगी. 

श्री रवि किरण जैन                       डॉ. व्ही. सुरेश
राष्ट्रीय अध्यक्ष, PUCL                  महासचिव                     

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